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दिल्ली

दिल्ली (7)

आज के समय में जहॉं देखे छल प्रपंच का माहौल ही देखने को मिलता है। बेईमानी तो आधुनिक युग में चरम पर है। इस समय मे भी ईमानदारी जिन्दा है। जी हां मामला दिल्ली के बदरपुर क्षेत्र का है। दरअसल मदनपुर खादर विस्तार निवासी धर्मवीर सिंह कहीं जा रहे थे, रास्ते में कहीं उनका बैग गिर गया। उक्त बैग मे कुछ नकदी के साथ धर्मवीर का सभी जरुरी कागजात था, जिसके कारण धर्मवीर बहुत परेशान थे। ऐसे मे आशा का किरण बनकर उनका पता पूछते हुए राजीव कुमार सिंह नामक ऑटो चालक जो मोलड़बन्द स्कूल के पास रहते हैं पहुंचे और धर्मवीर को बैग सौंप दिया। बातचीत से पता चला कि राजीव जब अपने DL1RM 7115 न. की ऑटो से जा रहे थे तो प्रहलादपुर फ्लाईओवर के पास उन्हे यह बैग मिला। इस बैग के अन्दर के कागजात से पता मालूम कर लौटाने चले आए। ऑटो चालक ऱाजीव का यह कदम काबीलेतारीफ है और आधुनिक युग के लिए अनुकरणीय है। 

स्क्रूटनी के दौरान दिल्ली की सातों लोकसभा क्षेत्रों में दाखिल कुल नामांकनों में से 60 फीसद नामांकन  निरस्त हो गए है। दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार बुधवार को प्राप्त नामांकनों की स्क्रूटनी की गई, जिसके बाद सभी सातों लोकसभा क्षेत्रों में 173 नामांकन ही सही पाए गए हैं।

दिल्ली में 12 मई को होने वाले मतदान के लिए 16 अप्रैल से नामांकन प्रक्रिया शुरू की गई थी, जो 23 अप्रैल मंगलवार तक आयोजित हुई। दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार दो दिन राजकीय अवकाश व एक दिन रविवार होने की वजह से कुल पांच दिन नामांकन प्रक्रिया आयोजित हुई। जिसमें सभी सातों लोकसभा सीटों पर कुल 439 नामांकन प्राप्त हुए। इन सभी प्राप्त नामांकनों की बुधवार को स्क्रूटनी की गई, जिसमें 266 नामांकन अधूरे-अपुष्ट पाए गए, जिन्हें निरस्त कर दिया गया है। जबकि 173 नामांकन ही सही पाए गए हैं। जिसके बाद सबसे अधिक 30 नामांकन दक्षिणी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से हो गए हैं।

गुरुवार- शुक्रवार नाम वापस ले सकेंगे उम्मीदवार : दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार बुधवार को नामांकनों की स्क्रूटनी की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इसके बाद दो दिन उम्मीदवारों को नाम वापसी के लिए दिए जाएंगे। जिसके तहत गुरुवार व शुक्रवार को नाम वापसी की प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। उम्मीदवार तब तक नाम वापस ले सकते हैं। इसके बाद उम्मीदवारों को आखिरी सूची जारी की जाएगी। अंतिम सूची जारी होने के साथ ही राजधानी की सातों संसदीय सीटों पर चुनावी समय की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। 

अर्थ डे के अवसर पर पर्यावरण संतुलन के मद्देनजर कल दिल्ली के ओखला स्थित आली विहार में जागरुकता रैली निकाली गई। मैजिक बस व विम्बलडन फॉउण्डेशन द्वारा आयोजित यह रैली आलीविहार से प्रियंका कैम्प तक निकाली गई। इस जागरुकता रैली में धरती बचाओ जैसे नारे लगाए गए। रैली में मैजिक बस से सुभाष, पीटर और विनोद महतो के साथ सैकडों बच्चे सम्मिलित थे।

      इस अवसर पर विनोद महतो ने कहा कि पर्यावरण असंतुलन की वजह से धरती के अस्तित्व पर संकट व्याप्त है, अत:  संकट दूर हो सके और आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण मिल सके इस उद्देश्य से यह जागरुकता रैली निकाली गई है।

वातावरण में व्याप्त प्रदूषण की वजह से ओजोन परत में छिद्र होता जा रहा है। जिसके फलस्वरुप धरती का परत दिन ब दिन गर्म हो रहा है, समस्त जीव जन्तु का जीवन संकटमय होता जा रहा है। यदि प्रदूषण का यह हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब पृथ्वी जीवन यापन के अनुकूल नहीं रह पाएगी। मानव जीवन नष्ट हो सकता है। ऐसे में जरुरत है धरती को बचाने की, पर्यावरण में संतुलन लाने की। इस परिपेक्ष्य में मैजिक बस व विम्बलडन फाउणडेशन द्वारा आयोजित यह जागरुकता रैली एक सराहनीय कदम है।

ओखला के मदनपुर खादर पुलिया पर रोजाना सुबह शाम ट्राफिक जाम का सामना करना पड़ता है . उल्लेखनीय है कि इस पुलिया की चौड़ाई बहुत ही कम है जिसे वन वे की संज्ञा दी जाती है . और इसी कम चौड़ाई वाले पुलिया होकर हजारों की तादाद में गाड़ियों की आवाजाही लगी रहती है . क्योंकि एक मात्र यही सड़क है जो मदनपुर खादर को मथुरा रोड से जोड़ती है. जाम का आलम यह है कि यहाँ जाम लगने के बाद अनिश्चित काल के लिए लगी रहती है. कई बार तो यह जाम काफी जद्दोजहद करने पर भी 4 - 5 घंटे लग जाते है. यहाँ की जनता इस जाम से इस कदर परेशान है कि कहा नहीं जा सकता . इस सड़क से जाने वाले कमोबेश सभी लोग अपने कार्यस्थल पर अक्सर देर से पहुँचते है तथा अपने अधिकारियों के कोप का भाजन बनते हैं. इस सन्दर्भ में जब सम्बंधित विभाग एवं जन प्रतिनिधियों से जवाब तलब की गई तो वे इसका कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए. जन प्रतिनिधि तो इस सवाल को टाल ही गए. विडम्बना यह है कि हर चुनाव में लगभग सभी उम्मीदवारों एवं पार्टियों के एजेन्डे में इस जाम से मुक्ति के बारे में वायदा किया जाता है . लेकिन जीतने के बाद किसी भी जनप्रतिनिधि ने अभी तक इस जाम की सुधि नहीं ली है . आज इस क्षेत्र के समस्त जनमानस के मन में एक ही सवाल है ` आखिर कब मिलेगी जाम से मुक्ति’.

 

ओखला के मदनपुर खादर जे जे कॉलोनी को बसे 17 वर्ष हो चुके हैं। लेकिन अभी तक यहां के निवासी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। उल्लेखनीय हैं कि श्री राम चौक से होकर पानी का पाइप लाइन गया है। लेकिन इन पाइप लाइन से जाने वाली पानी इनके नसीब में नहीं है। यहां के निवासी मजबूरन पीने के लिए अन्य स्रोत पर निर्भर हैं। चापाकल का पानी पीने योग्य नहीं होता। इससे स्वास्थ्य बिगड़ने के खतरा रहता है। अतः मजबूरन लोगों को 15-20 रुपये गैलन के दर से पेय जल खरीदना पड़ता है।

गौरतलब है कि सभी चुनाव यहां पानी जैसे मूलभूत सुविधाओं के मुद्दे पर लड़ा जाता है। पानी का मुद्दा सभी पार्टियों के घोषणा पत्र में प्राथमिकता में रहता है। परंतु चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। और जनता जनार्दन बार बार छले जाते हैं।

ज्ञात हो कि इस मुद्दे को लेकर मैथिल स्वाभिमान संघ ने कई बार आवाज उठाया भी। परंतु इतने हो हल्ला पर भी जनप्रतिनिधि चैन की नींद ले रहे है तथा इस तरफ से लापरवाह हैं। बरहाल यहां के जनता के जुबान पर यही सवाल रहता है कि कब मिलेगा पानी?

 
 
 

राजधानी दिल्ली के ओखला में मदनपुर खादर एक्सटेंशन के लोग गंदगी में जीवन यापन को मजबूर हैं। बात दरअसल यह है कि यहां दूर दूर तक कोई कूड़ा दान या कूड़ा घर नहीं है। और न ही यहां नियमित रूप से mcd का कोई कूड़ा गाड़ी कूड़ा लेने आती है। मजबूरन लोग बाद अपने अपने घरों का कूड़ा अगल बगल में खाली पड़े प्लॉट में फेंकते हैं। ये कूड़ा हवा से उड़कर लोगों के घरों में भी आ जाते हैं। गंदगी के जमा होने से लोग बाग विभिन्न बीमारियों से भी ग्रस्त हो जाते है। 
स्थानीय लोगों से जब बात की गई तो पता चला कि कूड़ा गाड़ी महीना 2 महीना में कभी इस क्षेत्र में आता है और आधा अधूरा कूड़ा उठा कर चलता बनता है। गंदगी के जमा होने से क्षेत्र के निवासियों की स्थिति नारकीय है। इस क्षेत्र की सफाई व्यवस्था को देखकर तो भारत सरकार का स्वच्छता अभियान दम तोड़ता नज़र आता है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनी फॉक्सवैगन को शुक्रवार शाम 5 बजे तक 100 करोड़ रुपये का जुर्माना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board) के पास जमा कराने का आदेश दिया है. एनजीटी ने सख्त लहजे में कहा कि अगर यह रकम शुक्रवार तक फॉक्सवैगन कंपनी ने नहीं जमा कराई, तो कंपनी के एमडी को गिरफ्तार किया जाएगा.

फॉक्सवैगन कंपनी से ये जुर्माना इसलिए वसूला जा रही है, क्योंकि कार बनाने वाली इस कंपनी ने डीजल वाहनों में कार्बन उत्सर्जन कम दिखाने के लिए हेर-फेर करने वाली डिवाइस लगा दी थी. इस गड़बड़ी के कारण सड़कों पर चलती फॉक्सवैगन की गाड़ियों ने पर्यावरण में प्रदूषण फैलाया और उन नियमों का पालन नहीं किया, जो प्रदूषण को रोकने के लिए कार निर्माता कंपनी को करना अनिवार्य होता है.

इस मामले के सामने आने के बाद NGT ने जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी, जिसने पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन किया था. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद एनजीटी ने फॉक्सवैगन कंपनी पर 171 करोड़ का जुर्माना लगाया था. हालांकि, इस जुर्माने को भरने के बजाय फॉक्सवैगन कंपनी ने एनजीटी के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी थी, लेकिन मामले में शीर्ष अदालत ने कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया था. सर्वोच्च अदालत ने जुर्माने की रकम को भरने को लेकर कंपनी को कोई स्टे नहीं दिया और मामले की सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तारीख तय कर दी.

इसके बाद गुरुवार को एनजीटी ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी को निर्देश दिया कि वह 100 करोड़ रुपये की रकम या तो शुक्रवार शाम 5 बजे तक जमा कराए या फिर गंभीर नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहे. अगर कंपनी ने एनजीटी के आदेशों का पालन करते हुए गुरुवार तक 100 करोड़ रुपये की रकम नहीं चुकाई, तो कंपनी के एमडी की गिरफ्तारी से लेकर भारत में फॉक्सवैगन कंपनी की संपत्तियों को जब्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है.

फॉक्सवैगन कंपनी ने पहली बार साल 2015 में माना था कि उसने साल 2008 से साल 2015 के बीच दुनियाभर में बेची गई एक करोड़ 11 लाख गाड़ियों में 'डिफीट डिवाइस' लगाई थी. इस डिवाइस की खासियत ये है कि यह लैब परीक्षण के दौरान फॉक्सवैगन तारों को पर्यावरण के मानकों पर खरा साबित कर देती थी, जबकि सच्चाई ये थी कि फॉक्सवैगन कार नाइट्रिक ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन ज्यादा कर रही थीं. यह उत्सर्जन यूरोपीय मानकों से चार गुना अधिक था.

फॉक्सवैगन को इस हेर-फेर के कारण अब तक अलग-अलग जगहों पर अरबों रुपये का जुर्माना देना पड़ा है. कंपनी सिर्फ जर्मनी में ही करीब 8,300 करोड़ रुपये का जुर्माना भर चुकी है. साथ ही कंपनी के कुछ शीर्ष अधिकारियों को इस मामले में जेल भी हो चुकी है. अब भारत में भी फॉक्सवैगन कंपनी की मुश्किल बढ़ गई है.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनी फॉक्सवैगन को शुक्रवार शाम 5 बजे तक 100 करोड़ रुपये का जुर्माना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board) के पास जमा कराने का आदेश दिया है. एनजीटी ने सख्त लहजे में कहा कि अगर यह रकम शुक्रवार तक फॉक्सवैगन कंपनी ने नहीं जमा कराई, तो कंपनी के एमडी को गिरफ्तार किया जाएगा.

 

फॉक्सवैगन कंपनी से ये जुर्माना इसलिए वसूला जा रही है, क्योंकि कार बनाने वाली इस कंपनी ने डीजल वाहनों में कार्बन उत्सर्जन कम दिखाने के लिए हेर-फेर करने वाली डिवाइस लगा दी थी. इस गड़बड़ी के कारण सड़कों पर चलती फॉक्सवैगन की गाड़ियों ने पर्यावरण में प्रदूषण फैलाया और उन नियमों का पालन नहीं किया, जो प्रदूषण को रोकने के लिए कार निर्माता कंपनी को करना अनिवार्य होता है.

 

इस मामले के सामने आने के बाद NGT ने जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी, जिसने पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन किया था. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद एनजीटी ने फॉक्सवैगन कंपनी पर 171 करोड़ का जुर्माना लगाया था. हालांकि, इस जुर्माने को भरने के बजाय फॉक्सवैगन कंपनी ने एनजीटी के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी थी, लेकिन मामले में शीर्ष अदालत ने कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया था. सर्वोच्च अदालत ने जुर्माने की रकम को भरने को लेकर कंपनी को कोई स्टे नहीं दिया और मामले की सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तारीख तय कर दी.

 

इसके बाद गुरुवार को एनजीटी ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी को निर्देश दिया कि वह 100 करोड़ रुपये की रकम या तो शुक्रवार शाम 5 बजे तक जमा कराए या फिर गंभीर नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहे. अगर कंपनी ने एनजीटी के आदेशों का पालन करते हुए गुरुवार तक 100 करोड़ रुपये की रकम नहीं चुकाई, तो कंपनी के एमडी की गिरफ्तारी से लेकर भारत में फॉक्सवैगन कंपनी की संपत्तियों को जब्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है.

 

फॉक्सवैगन कंपनी ने पहली बार साल 2015 में माना था कि उसने साल 2008 से साल 2015 के बीच दुनियाभर में बेची गई एक करोड़ 11 लाख गाड़ियों में 'डिफीट डिवाइस' लगाई थी. इस डिवाइस की खासियत ये है कि यह लैब परीक्षण के दौरान फॉक्सवैगन तारों को पर्यावरण के मानकों पर खरा साबित कर देती थी, जबकि सच्चाई ये थी कि फॉक्सवैगन कार नाइट्रिक ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन ज्यादा कर रही थीं. यह उत्सर्जन यूरोपीय मानकों से चार गुना अधिक था.

 

फॉक्सवैगन को इस हेर-फेर के कारण अब तक अलग-अलग जगहों पर अरबों रुपये का जुर्माना देना पड़ा है. कंपनी सिर्फ जर्मनी में ही करीब 8,300 करोड़ रुपये का जुर्माना भर चुकी है. साथ ही कंपनी के कुछ शीर्ष अधिकारियों को इस मामले में जेल भी हो चुकी है. अब भारत में भी फॉक्सवैगन कंपनी की मुश्किल बढ़ गई है.

 

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