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डेरा बाबा नानक: पंजाब के गुरुदासपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक कस्बे डेरा बाबा नानक में आठ नवंबर, 2019 से अगले चार दिनों तक प्रतिदिन हजारों तीर्थयात्रियों के आने का अनुमान है. बता दें, तीर्थयात्रियों के ठहरने के लिए करीब 30 एकड़ जमीन को सभी जरूरी सुविधाओं से युक्त एक तंबुओं की नगरी में बदल दिया गया है. इसकी क्षमता प्रतिदिन करीब 3,500 लोगों की है. सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के अवसर पर आने वाले इन तीर्थयात्रियों के स्वागत के लिए पूरी तैयारी की गई है. तीर्थयात्रियों के ठहरने के लिए यूरोपीय शैली के 544 तंबू, 100 स्विस कॉटेज और 20 दरबार शैली के तंबू लगाए गए हैं. तंबू नगरी परियोजना की लागत 4.2 करोड़ रुपए है.बता दें, राज्य सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को तंबू नगरी और मुख्य तंबू का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं को लेकर संतुष्टि जताई. बयान में कहा गया कि मुख्य तंबू में 30,000 तीर्थयात्रियों को ठहराने का इंतजाम है. डेरा बाबा नानक उत्सव आठ नवंबर से 11 नवंबर तक चलेगा. वहीं मुख्यमंत्री ने पीने के पानी और लंगर सहित जनसुविधाओं के इंतजाम का भी निरीक्षण किया. लंगर हाल में एक बार में 1500 लोग भोजन कर सकते हैं. इसके लिए रसोई में आधुनिक सुविधाओं से युक्त उपकरण लगाए गए हैं. बता दें, इस उत्सव में शामिल होने के लिए पंजीकरण निशुल्क है और इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन किया जा सकता है. ऑनलाइन बुकिंग शनिवार से शुरू होंगी.

 

 

 

पंजाब सरकार ने प्रोग्रेसिव पंजाब इंवेस्टर समिट से पहले इंडस्ट्री के लिए बड़ी सौगातों का एलान किया है। दफ्तरों के चक्करों और इंस्पेक्शन से बचाने के लिए सरकार राइट टू बिजनेस एक्ट लाने जा रहे हैं। इसके अलावा तीन पुराने एक्ट में संशोधन कर उद्योगों को रियायत दी गई है।वहीं, शामलात जमीन खरीदने की प्रक्रिया में बदलाव को कैबिनेट ने मंजूरी दी जिससे गांवों में लैंड बैंक स्थापित हो सकेंगे और इंडस्ट्री को आसानी से जमीन मिल सकेगी। सरकार की नजरें 5-6 दिसंबर को इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में होने वाले समिट में ज्यादा से ज्यादा निवेश आकर्षित करने पर लगी हैं।पंजाब में कारोबार को प्रोत्साहित करने के मकसद से राज्य सरकार राइट टू बिजनेस एक्ट और राइट टू बिजनेस रूल्स 2019 लाएगी। इसमें सिर्फ एक स्व-घोषणा पत्र से एमएसएमई की स्थापना और चलाने में कई मंजूरियों और इंस्पेक्शन से निजात मिल सकेगी। कैबिनेट बैठक में पास किए प्रस्ताव के तहत इस एक्ट के दायरे में लाई गई सेवाओं में बिल्डिंग प्लान, कंपलीशन-ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट, फायर एनओसी, ट्रेड लाइसेंस का रजिस्ट्रेशन, चेंज ऑफ लैंड यूज, फैक्ट्री बिल्डिंग प्लान की मंजूरी और दुकान का रजिस्ट्रेशन शामिल है। 

 



मिनिस्टरी ऑफ होम अफेयर्स (एमएचए) ने पंजाब सरकार से राज्य की विभिन्न जेलों में बंद तीन आतंकी संगठनों के सदस्यों की डिटेल मांगी है। इन सबकी रिपोर्ट बनाकर सरकार को एक हफ्ते के भीतर एमएचए को भेजनी है। इसलिए राज्य के होम डिपार्टमेंट ने इन सब आतंकियों की लिस्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। इन आतंकी संगठनों में खालिस्तान कमांडो फोर्स, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और खालिस्तान लिबरेशन फोर्स शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार इन आतंकी संगठनों से संबंधित आतंकवादी सूबे की पटियाला, नाभा अमृतसर, बठिंडा और जालंधर जेलों में बंद हैं। सूत्रों के अनुसार इंटेलिजेंस ब्यूरो को खबर मिली है कि इन आतंकी संगठनों से संबंधित लोग, जो विदेशों में बैठे हैं, वे लगातार इनके संपर्क में हैं और ये लोग पंजाब व देश के अन्य राज्यों में माहौल खराब करना चाहते हैं। पंजाब में जो पिछले दिनों हथियारों समेत आतंकी पकड़ गए थे वे उनकी योजना का ही हिस्सा थे, जो कि किसी घटना को अंजाम देने से पहले ही पकड़े लिए गए। यह जानकरी देनी है गृह मंत्रालय को - * कुछ दिनों पहले पकड़े गए आतंकियों से कैसे हथियार पकड़े गए * जो व्यक्ति गिरफ्तार हुए वे किन संगठन से जुड़े थे * अब तक के पूछताछ में किस तरह के तथ्य सामने आए हैं * आतंकियों से पूछताछ में जो भी जानकारी मिली है, उसके आधार पर पंजाब पुलिस ठोस कार्रवाई कर पाई है या नहीं * जेलों में बैठकर बना रहे वारदात की योजना * IB को यह भी जानकारी मिली है कि इन आतंकी संगठनों के सदस्य जेलों में बैठकर ही मोबाइल व इंटरनेट का इस्तेमाल अपने साथियों के साथ संपर्क साधने में सफल रहे हैं और किसी वारदात को अंजाम देने की लिए योजना बना रहे हैं। इसलिए जेल अिधकारियों को अलर्ट किया गया है कि वे ऐसे कैदियों की बैरकों चेकिंग करें। पंजाब पुलिस अलर्ट - आईबी द्वारा दी गई जानकारी के बाद पंजाब पुलिस अलर्ट हो गई है। डीजीपी ने पुलिस अिधकारियों और जेल अधीक्षकों को सतर्क रहने को कहा हैं। जेल अधीक्षकों को कहा गया है कि वे ऐसे लोगों को स्पेशल बैरकों में रखे और विशेष नजर रखें ताकि इन हर गतिविधि की पूरी जानकारी मिलती रहे।

पंजाब में किसानों द्वारा धान की पराली जलाने के मामलों में लगातार कमी आ रही है। वर्ष 2016 में 1 अक्तूबर से 10 अक्तूबर तक जहां पराली को आग लगाने के 3715 मामले सामने आए थे, वह इस साल इसी अवधि में केवल 700 रह गए हैं।यह दावा पंजाब के कृषि सचिव काहन सिंह पन्नू ने किया है। ओवरआल पंजाब के 60 फीसदी किसानों ने अब पराली जलाना छोड़ दिया है और हैपी सीडर जैसी नवीन तकनीक के जरिए खेतों में पराली का निष्पादन किया जा रहा है। डिजिटल मीडिया पर एक साक्षात्कार के दौरान पन्नू ने बताया कि उन्होंने एनजीटी के समक्ष यह आंकड़े पेश किए हैं, जिसके अनुसार राज्य के 22 में से 14 जिलों में पराली जलाने के मामलों में 50 फीसदी तक कमी आ चुकी है। उन्होंने बताया कि केवल आठ जिलों में सरकार को जागरुकता अभियान और तेज करना पड़ रहा है। पन्नू ने कहा कि किसानों में पराली न जलाने को लेकर जागरुकता बढ़ी है और उन्होंने मशीनों का उपयोग शुरु कर दिया है। उन्होंने बताया कि यह किसानों में आई जागरूकता का ही असर है कि इस बार 3100 गांव में पराली जलाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

धान के सीजन में बिगड़ती है पंजाब की हवा

उन्होंने बताया कि पराली जलाने का मुद्दा एक गंभीर चुनौती बन गया है। पंजाब में 1980 से पहले धान के अधीन केवल 3 लाख हेक्टेयर भूमि थी, जो अब 30 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। इस तरह धान का उत्पादन बढ़ने के साथ ही उससे निकलने वाली पराली की मात्रा भी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी मात्रा में पराली को आग लगाने से प्रदेश की हवा हर साल दूषित हो रही है। 

उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में पंजाब का एयर क्वालिटी इंडेक्स 70-100 के बीच रहता है और धान के सीजन में यह बढ़कर 200 तक पहुंचता है। लेकिन दिवाली के आसपास यह बढ़कर 400 के अत्यंत खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है।

पराली न जलाने से बढ़ी गेहूं की पैदावार
पन्नू ने बताया कि किसानों द्वारा पराली जलाने के पारंपरिक तरीके को छोड़ने के बाद यह बात भी सामने आई है कि इन्हीं खेतों में एक तरफ तो यूरिया-डीएपी आदि की उपयोग घटा है, वहीं अगली फसल गेहूं की पैदावार में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि बीते दो सालों से पंजाब में गेहूं की पैदावार 131 लाख टन तक पहुंच चुकी है, जिसे देखते हुए यह अनुमान है कि पराली को जलाने का काम पूरी तरह खत्म करने पर यह उत्पादन 140 लाख टन तक पहुंच जाएगा। 

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