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महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन के लिए अब तक जारी सियासी खींचतान के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राज्यसभा में एनसीपी की तारीफ के बाद बुधवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार की प्रधानमंत्री से मुलाकात से चर्चाओं का बाजार गर्म है।सवाल उठ रहा है कि क्या राज्य में शिवसेना, कांग्रेस के साथ सरकार बनाने में जुटे पवार सीधे या परोक्ष रूप से भाजपा के मददगार साबित हो सकते हैं। वैसे भी भाजपा से बहुत दूर जा चुकी शिवसेना भी राज्य में कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनने को ले कर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।दरअसल शिवसेना के आधिकारिक रूप से भाजपा से अलग होने के बाद पवार ने अपने कदमों से कई बार चौंकने पर मजबूर किया है। संघ सूत्रों का दावा है कि राज्य में भाजपा की अगुवाई में सरकार बन सकती है। अगर इस बीच किसी तरह शिवेसना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बन भी गई तो ज्यादा देर तक नहीं चल पाएगी। वैसे भी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम, सत्ता में विभिन्न दलों की साझेदारी, बीएमसी, राज्यसभा, विधान परिषद चुनाव के लिए फार्मूले पर सहमति बनने के बावजूद तीनों दल मिल कर अब तक राज्यपाल के समक्ष दावा नहीं कर पाए हैं। इसलिए सवाल उठ रहा है कि जब सभी बिंदुओं पर सहमति बन गई है तब तीनों दल सरकार क्यों नहीं बना रहे?

 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में जनरल सर्जरी विभाग व कॉलेज ऑफ नर्सिंग की ओर से आयोजित नेशनल वुंडकॉन-2019 का विधिवत ढंग से समापन हुआ। तीन दिवसीय सम्मेलन के समापन मौके पर प्रतिभागियों ने जख्मों के विषय पर तैयार किए अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए, इसमें अव्वल प्रतिभागियों को आयोजित समिति की ओर से सम्मानित भी किया गया। करीब 250 देशी-विदेशी विषय विशेषज्ञों, फैकल्टी, चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ ने इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने नर्सिंग स्टाफ को जख्मों से संबंधित जानकारियां दी और उन्हें संक्रमण से बचाव के तौर तरीके बताए।डॉ रविकांत ने नेशनल कांफ्रेंस के सफल आयोजन के लिए आयोजक समिति व संबंधित विभागों को बधाई दी। इस अवसर पर तीन वर्गों में प्रतियोगिता हुई। जिसमें 30 प्रतिभागियों ने जख्म विषय पर आधारित शोधपत्र प्रस्तुत किए। अव्वल प्रतिभागियों को समिति की ओर से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. अशोक कुमार, डॉ राजेश कुमार शर्मा, डॉ सिद्धार्थ दुभाषी, डॉ. राकेश शर्मा, डॉ.सीमा सचदेवा, डॉ.प्रभजोत सैनी, मनीष शर्मा, राजराजेश्वरी, हिमांशु व्यास आदि ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। सम्मेलन में संस्थान की वरिष्ठ सर्जन, आईबीसीसी प्रमुख व आयोजन समिति की अध्यक्ष प्रो बीना रवि, वर्ल्ड यूनियन ऑफ वूंड हिलिंग सोसाइटी के अध्यक्ष मार्को रोमानाली, जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो सोमप्रकाश बासू, प्रो वर्तिका सक्सेना, प्रो. श्रीपर्णा बासू, सुक्रिया नायक, हरिकृष्ण, के राघव नायर, जुलीयट प्राइस, ट्रामा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम, डीन नर्सिंग प्रो सुरेश कुमार शर्मा, डॉ. फरहान उल हुदा, डॉ. मधुवरी वाथुल्या, डॉ. सुधीर कुमार,डॉ. तरुण गोयल, डॉ. मनु मल्होत्रा, डॉ.अजय कुमार, डॉ. प्रतीक शारदा, अशीषा आदि उपस्थित थे।

 

आयुष छात्रों से ज्यादा फीस वसूलने के मामले में सरकार ने आयुर्वेद विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को शासन से इस संबंध में आदेश जारी किए जाएंगे। सरकार ने फीस निर्धारण के लिए स्थायी समिति गठित करने का निर्णय लिया है।इसके लिए हाईकोर्ट से फीस निर्धारण समिति में न्यायाधीश नामित करने का अनुरोध किया जाएगा। उधर, आंदोलन कर रहे आयुष छात्रों का कहना है जब तक हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हो जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।फीस बढ़ोत्तरी को लेकर आयुर्वेद छात्रों के आंदोलन को समाप्त करने के लिए बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में आयुष विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। निर्णय लिया गया कि आयुर्वेद विश्वविद्यालय व कॉलेजों को हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करने के लिए निर्देश जारी किए जाएंगे।सीएम ने कहा कि सभी सरकारी व निजी आयुर्वेद कॉलेजों को हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को आदेशों का पालन कराने के निर्देश दिए। कहा कि छात्रों के लंबे समय तक आंदोलनरत रहने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।उच्च न्यायालय से समय-समय पर जारी निर्देशों का गहनता से पालन किया जाए। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आयुर्वेद छात्रों की फीस निर्धारण के लिए स्थायी समिति के शीघ्र गठन करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। समिति के अध्यक्ष पद पर न्यायाधीश को नामित करने के लिए हाईकोर्ट से आग्रह किया जाएगा।फीस निर्धारण पर समिति के निर्णय के अनुसार अगली कार्यवाई की जाएगी। बैठक में आयुष मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव आयुष दिलीप जावलकर, सचिव न्याय प्रेम सिंह खिमाल, प्रभारी सचिव उच्च शिक्षा विनोद रतूड़ी, अपर सचिव आनंद स्वरूप, संयुक्त सचिव एमएम सेमवाल, रजिस्ट्रार उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय डॉ.माधवी गोस्वामी आदि मौजूद थे।सरकार को फीस का निर्धारण करने का अधिकार नहीं था। इसका अधिकार सिर्फ फीस निर्धारण कमेटी को ही है। इसलिए इस मामले को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट का 2006 के अनुसार फीस कमेटी निर्धारित करने का निर्णय था। इस आदेश के अनुसार पहले विश्वविद्यालय व कॉलेज को न्यायालय के आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए थे। दूसरी बार भी निर्देश जारी किए थे। फिर से सभी कॉलेजों को आदेशों का पालन करने के लिए निर्देश जारी किए जाएंगे।

 

 

महाराष्ट्र में गुरुवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और दो अन्य नेताओं के खिलाफ  'धोखाधड़ी' की शिकायत दर्ज की गई है। शिकायत में हिंदुत्व के नाम पर वोट मांगने और चुनाव पूर्व सहयोगी भाजपा के साथ सरकार नहीं बनाने का आरोप है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मतदाताओं के साथ धोखा है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में उद्धव ठाकरे और पार्टी के दो अन्य नेताओं के खिलाफ औरंगाबाद जिले के बेगमपुरा पुलिस स्टेशन में बुधवार को लिखित आवेदन दिया गया है। शिकायतकर्ता का नाम रत्नाकर चौरे है जो की भाजपा समर्थक है। उन्होंने का कि हमने आवेदन प्राप्त कर लिया है और इसे विशेष शाखा को भेज दिया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान उद्धव ठाकरे, नव-निर्वाचित शिवसेना विधायक प्रदीप जायसवाल (औरंगाबाद सेंट्रल) और पार्टी के पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे ने हिंदुत्व की रक्षा के नाम पर शिवसेना-भाजपा गठबंधन के लिए वोट मांगे।  चौरे ने कहा कि राज्य में शिवसेना-भाजपा गठबंधन को सत्ता में लाने के उद्देश्य से, निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा समर्थकों ने भी जायसवाल को वोट दिया, जिसके बाद वह जीत गए। परिणाम के बाद, शिवसेना ने भाजपा के साथ संबंध तोड़ दिए और अपने चुनाव पूर्व सहयोगी के साथ सरकार नहीं बनाई।शिकायतकर्ता चौरे का कहना है कि, उन्होंने शिवसेना की चाल से धोखा महसूस किया क्योंकि उन्होंने और उनके परिवार के सदस्यों ने हिंदुत्व की रक्षा के लिए गठबंधन के उम्मीदवार को वोट दिया था। इसलिए  उसने बेगमपुरा पुलिस स्टेशन का दरवाजा खटखटाया और ठाकरे और दो अन्य नेताओं के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने के लिए आवेदन दिया।चौरे ने कहा कि वह चुनाव आयोग को भी एक पत्र लिखेंगे, जिसमें जायसवाल के पक्ष में अपना वोट वापस लेने और विधायक का चुनाव रद्द करने की मांग करेंगे। भाजपा के साथ गठबंधन करने के बाद, शिवसेना कांग्रेस और एनसीपी के पास पहुंच गई है, जिसके खिलाफ उसने वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए पिछले महीने का चुनाव लड़ा था।

 

भारत में स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों पर अब तक डेढ़ करोड़ से अधिक उच्च रक्तचाप, 125 करोड़ से अधिक डायबिटीज और डेढ़ करोड़ से अधिक कैंसर के केस डायग्नोज हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी जानकारी ट्वीट करके दी है। पीएमओ इंडिया ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि आप हैरान रह जाएंगे कि इतने कम समय में, इन सेंटर्स पर डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों को उच्च रक्तचाप सवा करोड़ से ज्यादा डायबिटीज, डेढ़ करोड़ से ज्यादा कैंसर के केस डायग्नोज हो चुके हैं। पहले प्राइमरी हेल्थकेयर सेंटर्स में ये संभव ही नहीं था।इसके अलावा एक और ट्वीट में लिखा कि अब इसके लिए पूरे देश में डेढ़ लाख स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र तैयार किए जा रहे हैं और इनको के तौर पर विकसित किया जा रहा है। बहुत ही कम समय में अब तक 21 हज़ार से ज्यादा ऐसे सेंटर तैयार भी हो चुके हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने उत्तराखंड के हरिद्वार में 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक अपने सभी संगठनों के प्रचारकों की मीटिंग बुलाई है। इस बैठक में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भैयाजी जोशी, दत्तात्रेय होसाबले और कृष्ण गोपाल मौजूद रहेंगे। बता दें कि यह बैठक पांच साल में एक बार होती है। मिली जानकारी के मुताबिक मीटिंग में आने वाले पांच साल का रोडमैत तैयार किया जाएगा। इस बीच पत्रकारों से बातचीत पर एक सत्र भी आयोजित किया जाएगा। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हर 5 साल में अपने सभी संगठनों के प्रचारकों के साथ देशव्यापी बैठक करता है। इस बैठक का उद्देश्य यह होता है कि अगले पांच साल में किन-किन मुद्दों पर कार्य करना है, और इसके लिए एजेंडा तय किया जाता है। इस बैठक मोहन भागवत की अगुवाई में होगी। मीडिया से बातचीत सत्र होगा आयोजित बैठक के दौरान प्रचारकों के लिए मीडिया से बातचीत पर एक सत्र का आयोजित किया जाएगा। इसमें यह जानकारी दी जाएगी की मीडिया के सामने किस तरह से बातचीत करें और लोगों अपनी बाच पहुंचाएं। इस में प्रचारकों को पत्रकारों से बातचीत करने के तौर-तरीकों की भी जानकारी दी जाएगी। इसी के मद्देनजर इस कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है।

पहली बार चांद पर कोई पौधा उगाया गया है. चीन के नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि चैंगे-4 मिशन ने कपास का पौधा उगाने में सफलता हासिल की है. अंतरिक्ष रिसर्च के क्षेत्र में ये एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

चैंगे-4 पहला ऐसा मिशन है जो चंद्रमा के दूरस्थ स्थलों का जायजा लिया. वे जगहें जो धरती से काफी दूरी पर हैं. चैंगे-4 मिशन 3 जनवरी को चंद्रमा पर पहुंचा था. इसका उद्देश्य चंद्रमा की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करना था. इससे पहले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पौधा उगाया गया था, लेकिन चंद्रमा पर नहीं. इस सफलता के बाद आने वाले दिनों में लंबे स्पेस मिशन के दौरान साइंटिस्ट पौधे उगाने की और कोशिशें करेंगे.

इसका मतलब ये हुआ है कि एस्ट्रोनॉट भविष्य में अंतरिक्ष में अपने लिए खाना उगाने में सक्षम हो सकते हैं. इससे सप्लाई के लिए जल्दी धरती पर वापस आने की जरूरत खत्म हो सकती है. चीन के मून लैंडर के जरिए कपास और आलू के बीज भेजे गए थे. पौधे सील किए हुए कंटेनर में उगाए गए हैं. पौधे उगाने में सफलता से ये भी संभावना बढ़ी है कि अंतरिक्ष में सेल्फ सस्टेनिंग एन्वायरमेंट बनाया जा सकता है.

चीन के लुनर मिनी बायोस्फेयर एक्सपेरिमेंट को इस तरह से डिजायन किया गया था जिससे फोटोसिंथेसिस और रेस्पिरेशन प्रोसेस को टेस्ट किया जा सके. इन प्रोसेस के जरिए ही इनर्जी का प्रोडक्शन होता है. ये पूरा एक्सपेरिमेंट 18 सेमी लंबे, 3 किलो के कंटेनर में हुआ. इसे चीन की 28 यूनिवर्सिटी ने मिलकर तैयार किया था.

कंटेनर के भीतर पानी, हवा की सप्लाई की व्यवस्था थी. हालांकि, साइंटिस्ट के लिए सबसे बड़ी मुश्किल टेंपरेचर को कंट्रोल में रखना था. क्योंकि चांद पर -173C से 100C के बीच तापमान में अंतर होता है.

पहली बार चांद पर कोई पौधा उगाया गया है. चीन के नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि चैंगे-4 मिशन ने कपास का पौधा उगाने में सफलता हासिल की है. अंतरिक्ष रिसर्च के क्षेत्र में ये एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

 

चैंगे-4 पहला ऐसा मिशन है जो चंद्रमा के दूरस्थ स्थलों का जायजा लिया. वे जगहें जो धरती से काफी दूरी पर हैं. चैंगे-4 मिशन 3 जनवरी को चंद्रमा पर पहुंचा था. इसका उद्देश्य चंद्रमा की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करना था. इससे पहले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पौधा उगाया गया था, लेकिन चंद्रमा पर नहीं. इस सफलता के बाद आने वाले दिनों में लंबे स्पेस मिशन के दौरान साइंटिस्ट पौधे उगाने की और कोशिशें करेंगे.

 

इसका मतलब ये हुआ है कि एस्ट्रोनॉट भविष्य में अंतरिक्ष में अपने लिए खाना उगाने में सक्षम हो सकते हैं. इससे सप्लाई के लिए जल्दी धरती पर वापस आने की जरूरत खत्म हो सकती है. चीन के मून लैंडर के जरिए कपास और आलू के बीज भेजे गए थे. पौधे सील किए हुए कंटेनर में उगाए गए हैं. पौधे उगाने में सफलता से ये भी संभावना बढ़ी है कि अंतरिक्ष में सेल्फ सस्टेनिंग एन्वायरमेंट बनाया जा सकता है.

 

चीन के लुनर मिनी बायोस्फेयर एक्सपेरिमेंट को इस तरह से डिजायन किया गया था जिससे फोटोसिंथेसिस और रेस्पिरेशन प्रोसेस को टेस्ट किया जा सके. इन प्रोसेस के जरिए ही इनर्जी का प्रोडक्शन होता है. ये पूरा एक्सपेरिमेंट 18 सेमी लंबे, 3 किलो के कंटेनर में हुआ. इसे चीन की 28 यूनिवर्सिटी ने मिलकर तैयार किया था.

 

कंटेनर के भीतर पानी, हवा की सप्लाई की व्यवस्था थी. हालांकि, साइंटिस्ट के लिए सबसे बड़ी मुश्किल टेंपरेचर को कंट्रोल में रखना था. क्योंकि चांद पर -173C से 100C के बीच तापमान में अंतर होता है.

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