Wednesday, 12 February 2020 17:18

मॉक ड्रिल: कहीं भूकंप, तो कहीं रासायनिक गैसों के रिसाव से लोगों की जान पर बना खतरा

Written by Scanner India news agency
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उत्तराखंड के तीन जिलों देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में आज भोपाल गैस कांड जैसी आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और गृह मंत्रालय की ओर से मॉक ड्रिल की गई। इस दौरान सभी विभागों की सतर्कता देखी गई। जानकारी के अनुसार, देहरादून में सुबह 7.7 तीव्रता का भूकंप आया। जिसके कारण सेलाकुई की रासायनिक फैक्ट्री में काफी नुकसान हुआ। इसकी सूचना मिलते ही वहां आपदा प्रबंधन की टीम पहुंची और राहत-बचाव कार्य किया। वहीं, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर की सिडकुल फैक्ट्री में भी नुकसान हुआ। टाटा और सनसेरा कंपनी में रसायनिक पदार्थों से घायल व्यक्तियों को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया। सेटेलाइट फोन ऑफिस में रखने के लिए नहीं.आपदा प्रबंधन के तहत हुई मॉक ड्रिल से प्रदेश के अधिकारियों को बहुत कुछ सीखने को भी मिला। पहला पाठ प्रदेश के आपदा प्रबंधन तंत्र ने संचार व्यवस्था को चुस्त रखने का पढ़ा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सलाहकार जेपी दत्ता के मुताबिक सेटेलाइट फोन ऑफिस में रखने के लिए नहीं हैं। अधिकारी फोन अपने पास रखे और इमरजेंसी मेें इसका उपयोग करें। सचिवालय में मीडिया से मुखातिब जेपी दत्ता ने कहा कि मॉक ड्रिल में संचार को लेकर समस्याएं सामने आईं। अधिकारियों को बताया गया कि किसी बड़ी आपदा के आने पर अधिकारी आदेश का इंतजार न करें, बल्कि अपनी तरफ से पूर्व निर्धारित दायित्व के तहत तुरंत सक्रिय हों।पुलिस के वायरलेस नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाए। हेम रेडियो नेटवर्क को भी इसमें शामिल किया जाए। दत्ता के मुताबिक जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन तंत्र और उद्योगों के बीच संचार को और अधिक मजबूत करने की जरूरत भी महसूस हुई है। उद्योग अपना वायरलेस नेटवर्क रखते हैं। इनको अन्य नेटवर्क से जोड़ा जाना चाहिए। 

 

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