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दुनिया

दुनिया (2)

 रविवार को ईस्टर के दिन देश में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों के मद्देनजर श्रीलंका सरकार ने आज रात 12 बजे से देश में आपातकाल की घोषणा की है।  इससे पहले सरकार ने कर्फ्यू लगाने की घोषणा भी की है। यह सोमवार रात आठ बजे से लेकर मंगलवार तड़के चार बजे तक लगा रहेगा। देश में विभिन्न जगहों पर हुए विस्फोटों में 290 लोग मारे गए हैं और 500 से ज्यादा घायल हुए हैं। 

राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने दो अन्य जगहों पर विस्फोटों के साथ तीन लक्जरी होटलों और तीन चर्चों में विस्फोटों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की है।  समाचार पत्र डेली मिरर के अनुसार, समिति में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विजित माललगोडा शामिल हैं। 

राष्ट्रपति ने समिति को विस्फोटों से संबंधित सभी मामलों की जांच करने, इसकी पृष्ठभूमि और अन्य तथ्यों की जांच करने के और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

सभी आत्मघाती हमलावर श्रीलंकाई
श्रीलंका के इतिहास में हुई सबसे बड़ी आतंकवादी घटना के पीछे नेशनल तौहीद जमात नाम के स्थानीय संगठन का हाथ था। श्रीलंका के एक शीर्ष मंत्री ने सोमवार को यह जानकारी दी। ईस्टर के मौके पर हुए इस घातक हमले में 290 लोगों की मौत हो गई थी और 500 अन्य घायल हो गए थे।

स्वास्थ्य मंत्री एवं सरकारी प्रवक्ता रजीत सेनारत्ने ने भी कहा कि विस्फोट में शामिल सभी आत्मघाती हमलावर श्रीलंकाई नागरिक मालूम हो रहे हैं। यहां संवाददाता सम्मेलन में मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय इंटेलिजेंस एजेंसी के प्रमुख ने 11 अप्रैल से पहले इन हमलों की आशंका को लेकर पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) को आगाह किया था।

सेनारत्ने ने कहा, “चार अप्रैल को, अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों ने इन हमलों को लेकर आगाह किया था। आईजीपी को नौ अप्रैल को सूचित किया गया था।”उन्होंने कहा कि कट्टर मुस्लिम समूह -नेशनल तौहीद जमात नाम के स्थानीय संगठन को इन घातक विस्फोटों को अंजाम देने के पीछे माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जुड़े हुए हों।

सेनारत्ने ने सुरक्षा में हुई इस बड़ी चूक के लिए पुलिस प्रमुख पुजीत जयासुंदरा का इस्तीफा मांगा है। सरकार के एक मंत्री एवं मुख्य मुस्लिम पार्टी - श्रीलंकन मुस्लिम कांग्रेस के नेता रॉफ हकीम ने कहा कि यह निराशाजनक है कि इस तरह की जानकारी के बावजूद कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए। 

 

पाकिस्तान में तेजी से बढ़ रही आबादी 'टिकटिक करता टाइम बम' है. ये हम नहीं कह रहे बल्कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा है. दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी आबादी वाले मुल्क पाकिस्तान की सबसे ऊंची अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर बढ़ती आबादी पर काबू नहीं पाया गया तो कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान पूरी तरह कर्ज में डूब जाएगा. पाकिस्तान में फिलहाल आलम ये है कि यहां पैदा होने वाला हर बच्चा अपने सिर पर डेढ़ लाख लाख रुपए का कर्ज लेकर पैदा होता है. इसीलिए अब पाकिस्तान में भी हम दो हमारे दो की मांग तेजी से उठने लगी है.

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान में पैदा होने वाला हर बच्चा ‘टिकटिक करता टाइम बम’ है. बढ़ती आबादी पर क़ाबू पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नसीहत दी है. साथ ही मुल्क में बढ़ती बेरोज़गारी को देखते हुए आबादी पर अंकुश लगाने की हिदायत भी दी. इसके बाद अब पाकिस्तान में भी हम दो हमारे दो की मांग जोर पकड़ रही है.

हर नवजात डेढ लाख का कर्ज़दार

पूरी दुनिया में जब भी ये किलकारी गूंजती है तो चेहरे खुशियों से झूम उठते हैं. मगर पाकिस्तान अकेला दुनिया का ऐसा मुल्क है जहां ये किलकारी भी खतरे की घंटी की तरह बजती है. जानते हैं क्यों. क्योंकि यहां मां की कोख से बाहर आने वाले हर बच्चा पैदा होते ही करीब डेढ लाख रुपये का कर्ज़दार हो जाता है. आंकड़े कहते हैं कि पाकिस्तानी आबादी के 21 में से सात करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं. यानी हर दस में से चार पाकिस्तानी गरीब है. उस पर सितम ये कि मुल्क पर करीब 30 हज़ार अरब का क़र्जा है. तो अब जब भी कोई बच्चा यहां जन्म लेता है तो समझिए कि वो ‘टिकटिक करता टाइमबम’ है. ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि ये पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का कहना है.

लागू हो दो बच्चों का नियम

चीफ़ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान साक़िब निसार ने कहा कि पाकिस्तान दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश है. यहां तेजी से बढ़ रही जनसंख्या 'टिकटिक करता टाइमबम' है. धार्मिक विद्वानों, नागरिक संगठनों और सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को बढ़ावा देना चाहिए साथ ही प्रति परिवार दो बच्चों का नियम भी लागू करना चाहिए. बढ़ती जनसंख्या आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरनाक है.

राष्ट्रव्यापी जागरूकता आंदोलन की ज़रूरत

दरअसल पाकिस्तान में बढ़ती आबादी को कंट्रोल करने के लिए दो बच्चों का नियम लागू किए जाने की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ़ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान मियां साक़िब निसार ने ये फैसला सुनाया. साथ ही तमाम ज़िम्मेदार नुमाइंदो से इस सिलसिले में देशभर में मुहिम चलाने की अपील भी की. विस्फोटक रूप से बढ़ती जनसंख्या से देश के प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव है. प्रत्येक परिवार में दो बच्चों की नीति ही भविष्य में जनसंख्या पर नियंत्रण करने में मददगार साबित होगी. हमें एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता आंदोलन चलाने की जरूरत है. अब समय आ गया है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए देश एकजुट हो.

प्रोग्रेस रिपोर्ट देने के आदेश

इतना ही नहीं चीफ़ जस्टिस मियां साक़िब निसार ने देश के स्वास्थ्य सचिव कैप्टन जाहिद सईद को इसलिए कड़ी फटकार लगाई क्योंकि सईद ने कहा था कि स्वास्थ्य विभाग न तो जनसंख्या नियंत्रण के उपाय बना सकता है और न ही इन्हें लागू कर सकता है. कोर्ट ने अब संबंधित विभाग को हर तीन महीने में प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया है. जिसके बाद सचिव ने कोर्ट को बताया कि जनसंख्या वृद्धि दर को काबू करने के लिए एक योजना तैयार की गई है. जिसके तहत 2025 तक जनसंख्या वृद्धि दर 1.5 फीसदी तक कम किया जाना है.

आपको बता दें कि साल 2017 की जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़ 77 लाख से ज़्यादा है.. इस लिहाज़ से वो चीन, भारत, अमेरिका और इंडोनेशिया के बाद दुनिया का पांचवां सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है.. जबकि क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का नंबर दुनिया में 33वें नंबर पर आता है.

जनसंख्या कंट्रोल पर बहस

पाकिस्तान की बढ़ती आबादी वहां के संसाधनों पर काफी असर डाल रही है. क्योंकि एक तरफ तो मुल्क खाद्य संकट से जूझ रहा है. वहीं दूसरी तरफ मुल्क के पास पीने की पानी की भारी किल्लत है. और इन्हीं संकटों को देखते हुए इन दिनों पाकिस्तान में जनसंख्या कंट्रोल की बहस छिड़ी हुई है.

पाकिस्तान में तेजी से बढ़ रही आबादी 'टिकटिक करता टाइम बम' है. ये हम नहीं कह रहे बल्कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा है. दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी आबादी वाले मुल्क पाकिस्तान की सबसे ऊंची अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर बढ़ती आबादी पर काबू नहीं पाया गया तो कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान पूरी तरह कर्ज में डूब जाएगा. पाकिस्तान में फिलहाल आलम ये है कि यहां पैदा होने वाला हर बच्चा अपने सिर पर डेढ़ लाख लाख रुपए का कर्ज लेकर पैदा होता है. इसीलिए अब पाकिस्तान में भी हम दो हमारे दो की मांग तेजी से उठने लगी है.

 

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान में पैदा होने वाला हर बच्चा ‘टिकटिक करता टाइम बम’ है. बढ़ती आबादी पर क़ाबू पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नसीहत दी है. साथ ही मुल्क में बढ़ती बेरोज़गारी को देखते हुए आबादी पर अंकुश लगाने की हिदायत भी दी. इसके बाद अब पाकिस्तान में भी हम दो हमारे दो की मांग जोर पकड़ रही है.

 

हर नवजात डेढ लाख का कर्ज़दार

 

पूरी दुनिया में जब भी ये किलकारी गूंजती है तो चेहरे खुशियों से झूम उठते हैं. मगर पाकिस्तान अकेला दुनिया का ऐसा मुल्क है जहां ये किलकारी भी खतरे की घंटी की तरह बजती है. जानते हैं क्यों. क्योंकि यहां मां की कोख से बाहर आने वाले हर बच्चा पैदा होते ही करीब डेढ लाख रुपये का कर्ज़दार हो जाता है. आंकड़े कहते हैं कि पाकिस्तानी आबादी के 21 में से सात करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं. यानी हर दस में से चार पाकिस्तानी गरीब है. उस पर सितम ये कि मुल्क पर करीब 30 हज़ार अरब का क़र्जा है. तो अब जब भी कोई बच्चा यहां जन्म लेता है तो समझिए कि वो ‘टिकटिक करता टाइमबम’ है. ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि ये पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का कहना है.

 

लागू हो दो बच्चों का नियम

 

चीफ़ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान साक़िब निसार ने कहा कि पाकिस्तान दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश है. यहां तेजी से बढ़ रही जनसंख्या 'टिकटिक करता टाइमबम' है. धार्मिक विद्वानों, नागरिक संगठनों और सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को बढ़ावा देना चाहिए साथ ही प्रति परिवार दो बच्चों का नियम भी लागू करना चाहिए. बढ़ती जनसंख्या आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरनाक है.

 

राष्ट्रव्यापी जागरूकता आंदोलन की ज़रूरत

 

दरअसल पाकिस्तान में बढ़ती आबादी को कंट्रोल करने के लिए दो बच्चों का नियम लागू किए जाने की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ़ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान मियां साक़िब निसार ने ये फैसला सुनाया. साथ ही तमाम ज़िम्मेदार नुमाइंदो से इस सिलसिले में देशभर में मुहिम चलाने की अपील भी की. विस्फोटक रूप से बढ़ती जनसंख्या से देश के प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव है. प्रत्येक परिवार में दो बच्चों की नीति ही भविष्य में जनसंख्या पर नियंत्रण करने में मददगार साबित होगी. हमें एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता आंदोलन चलाने की जरूरत है. अब समय आ गया है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए देश एकजुट हो.

 

प्रोग्रेस रिपोर्ट देने के आदेश

 

इतना ही नहीं चीफ़ जस्टिस मियां साक़िब निसार ने देश के स्वास्थ्य सचिव कैप्टन जाहिद सईद को इसलिए कड़ी फटकार लगाई क्योंकि सईद ने कहा था कि स्वास्थ्य विभाग न तो जनसंख्या नियंत्रण के उपाय बना सकता है और न ही इन्हें लागू कर सकता है. कोर्ट ने अब संबंधित विभाग को हर तीन महीने में प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया है. जिसके बाद सचिव ने कोर्ट को बताया कि जनसंख्या वृद्धि दर को काबू करने के लिए एक योजना तैयार की गई है. जिसके तहत 2025 तक जनसंख्या वृद्धि दर 1.5 फीसदी तक कम किया जाना है.

 

आपको बता दें कि साल 2017 की जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़ 77 लाख से ज़्यादा है.. इस लिहाज़ से वो चीन, भारत, अमेरिका और इंडोनेशिया के बाद दुनिया का पांचवां सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है.. जबकि क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का नंबर दुनिया में 33वें नंबर पर आता है.

 

जनसंख्या कंट्रोल पर बहस

 

पाकिस्तान की बढ़ती आबादी वहां के संसाधनों पर काफी असर डाल रही है. क्योंकि एक तरफ तो मुल्क खाद्य संकट से जूझ रहा है. वहीं दूसरी तरफ मुल्क के पास पीने की पानी की भारी किल्लत है. और इन्हीं संकटों को देखते हुए इन दिनों पाकिस्तान में जनसंख्या कंट्रोल की बहस छिड़ी हुई है.

 

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