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दुनिया

दुनिया (9)

अफगानिस्तान के पश्चिमी फ़राह प्रांत के लश वा जुविन में तालिबानी ठिकानों पर कार्रवाई के दौरान 9 सैनिकों की मौत हो गई। कुंडुज-तखार हाईवे पर तालिबान ने एएनए दस्ते पर हमला किया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 9 सैनिकों को पश्चिमी फराह प्रांत के लश वा जुविन जिले में तालिबान के ठिकानों को निशाना बनाते हुए मारे गए। यहां उन्होंने आतंकवादियों को निशाना बनाया था। देर रात को रेस्टिव जिले में सुरक्षा चौकियों पर हमला करने जा रहा थे, लेकिन पहले से चल रहे सुरक्षाबलों के साथ आतंकवादियों के ठिकानों पर कार्रवाई की थी। जानकारी के लिए बता दें कि काबुल से 700 किलोमीटर दूर पश्चिम में फराह की प्रांतीय राजधानी को खत्म करने के लिए तालिबान के आतंकवादियों पर कार्रवाई की गई थी। जिसके बाद से यहां गतिविधियां तेज हो गई थी।

 

वाशिंगटन। महंगाई के खिलाफ  दुनिया के 3 देशों की जनता सड़कों पर उतर आई है। महंगाई से परेशान होकर ईरान, फ्रांस और चिली  के लोगों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ईरान में पेट्रोल की राशनिंग और दाम बढ़ाने के सरकारी फैसले के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। चिली में प्रदर्शन की शुरुआत मेट्रो के किराए में बढ़ोतरी से हुई थी, लेकिन बाद में यह प्रदर्शन कई बुनियादी मुद्दों को लेकर व्यापक हो गया। इस प्रदर्शन में 22 लोगों की मौत हो गई है और 2,000 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। फ्रांस में सरकार विरोधी यलो वेस्ट आंदोलन के एक वर्ष पूरा होने के मौके पर जारी प्रदर्शन में पुलिस ने देशभर से 260 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। बोलीविया में चुनाव में हुई गड़बड़ी के बाद भड़की हिंसा में 23 लोग मारे जा चुके हैं।

लंदन: ब्रिटेन में निर्वासित जीवन बिता रहे मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें और उनके साथियों को भारत में शरण देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें भारत में शरण नहीं दी जा सकती तो कम से कम अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में मुकदमा लड़ने के लिए वित्तीय मदद ही दी जाए। किसी तरह की राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करने का वादा करते हुए हुसैन ने पिछले हफ्ते सोशल मीडिया के जरिए यह बयान जारी किया और साथ ही कहा कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का वह स्वागत करते हैं। आपको बता दें कि ब्रिटेन में 67 वर्षीय हुसैन पाकिस्तान में कुछ साल पहले अपने समर्थकों को दिए भाषण के जरिए आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। हुसैन ने 9 नवंबर को जारी भाषण में कहा, ‘अगर आज भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुझे भारत आने की इजाजत देंगे और मुझे समर्थकों के साथ शरण देंगे तो मैं अपने सहयोगियों के साथ भारत आने को तैयार हूं, क्योंकि मेरे दादा वहां दफन हैं, मेरी दादी वहां दफन हैं, मेरे हजारों रिश्तेदार भारत में दफन है। मैं वहां जाना चाहता हूं। मैं उनकी कब्रों पर जाना चाहता हूं। वहां इबादत करना चाहता हूं।’

 

इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने भारत के साथ डाक सेवा तीन महीने तक निलंबित रखने के बाद फिर से बहाल कर दी है। भारत द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के निर्णय के मद्देनजर पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच डाक सेवा निलंबित कर दी थी। यह जानकारी पाकिस्तानी मीडिया ने मंगलवार को दी। भारत द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के लिए संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उत्पन्न हो गया था। भारत के गत पांच अगस्त के निर्णय को लेकर पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया जतायी। पाकिस्तान ने राजनयिक संबंध कमतर कर दिये और उसके साथ सभी संवाद संबंधों के साथ ही व्यापारिक संबंध भी निलंबित कर दिये। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार भारत के साथ डाक मेल सेवा बहाल हो गई है लेकिन पार्सल सेवा निलंबित रहेगी। हालांकि, भारत के साथ सीमित डाक सेवा बहाली के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। पाकिस्तान ने 27 अगस्त के बाद से भारत से कोई डाक खेप स्वीकार नहीं की थी। इस कदम को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के जवाब के तौर पर देखा जा रहा था। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गत अक्टूबर में कहा था कि पाकिस्तान ने डाक सेवा एकतरफा बंद की और उसने ऐसा भारत को कोई पूर्व नोटिस दिये बिना किया। प्रसाद ने कहा था, ‘‘पाकिस्तान का निर्णय विश्व डाक यूनियन के नियमों के बिल्कुल विपरीत है। यद्यपि पाकिस्तान पाकिस्तान है।’’ पाकिस्तान का कदम अभूतपूर्व था क्योंकि डाकसेवा पूर्व में बंटवारे, युद्धों और सीमापार तनावों के बीच भी जारी रही थी।

 

 ब्राजीलिया। रूसी राष्ट्रपति ने कहा है कि सबकुछ सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और भारत को एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम S-400 की आपूर्ति तय समय पर की जाएगी। ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेने ब्राजीलिया पहुंचे रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यह बात कही है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया है कि उनके भारतीय साथी प्रधानमंत्री मोदी ने इस सौदे की प्रक्रिया को तेज करने के लिए कोई आग्रह नहीं किया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह बयान रूस और भारत के बीच हुए डिफेंस सिस्टम के 5.43 अरब डॉलर (40 हजार करोड़ रुपए) के सौदे को लेकर बेहद अहम है।पुतिन और मोदी ब्रिक्स समिट में भाग लेने ब्राजील आए थे। रूस और भारत के बीच हुए इस सौदे का अमेरिका विरोध कर रहा है और कई मौकों पर वह अपने प्रतिबंध कानूनों का हवाला देकर भारत पर दबाव डाल चुका है। भारत और रूस के बीच एस-400 डिफेंस सिस्टम को लेकर 2015 में सौदा हुआ था। अमेरिका तभी से इसका विरोध कर रहा है। रूसी सिस्टम को दुनिया का सर्वोत्कृष्ट एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है। यह दुश्मन की ओर से होने वाले किसी भी हवाई हवाई हमले को 400 किलोमीटर दूरी पर ही खत्म करने में सक्षम है। यह मिसाइल, फाइटर प्लेन और हर तरह के ड्रोन को निशाना बनाने में सक्षम है। जबकि अमेरिका का बहुचर्चित थाड डिफेंस सिस्टम केवल मिसाइल हमले को ही रोक सकता है। भारत रूसी डिफेंस सिस्टम के लिए पूरी धनराशि का भुगतान कर चुका है, इसलिए इसकी आपूर्ति पूर्व निर्धारित समय से पहले होगी। सिस्टम की पहली बैटरी 2021 में भारत को मिल जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को ब्राजीलिया में समिट से इतर द्विपक्षीय मसलों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने आपसी समझौतों और सौदों की प्रगति की भी समीक्षा की। दोनों नेताओं ने आपसी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के तरीकों पर भी चर्चा की। भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी दबाव में आए बगैर अपने हितों के मुताबिक फैसले लेने की नीति पर चलता रहेगा। रूस के साथ उसके पुराने और प्रगाढ़ संबंध इसी नीति पर आगे बढ़ रहे हैं।

पाकिस्तान की जनता को कश्मीर की नहीं बल्कि सबसे ज्यादा चिंता आसमान छूती महंगाई और बेरोजगारी की सता रही है. गलप इंटरनेशनल ने आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के सभी चार प्रांतों में एक सर्वेक्षण करवाया है, जिसमें यह बात सामने आई है.‘गलप ऐंड गिलानी पाकिस्तान’ की ओर से किया गया यह अध्ययन पिछले मंगलवार को प्रकाशित हुआ है. इसमें बताया गया कि अध्ययन में शामिल 53 फीसदी लोगों का मानना है कि देश के सामने सबसे बड़ी समस्या अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई है. सर्वेक्षण के मुताबिक महंगाई के बाद 23 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी, चार फीसदी ने भ्रष्टाचार और चार फीसदी ने जल संकट को चिंता का विषय बताया.पाकिस्तान की सरकार कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से महज आठ फीसदी ने कश्मीर मुद्दे का नाम लिया. सर्वेक्षण के लिए बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध के लोगों से बात की गई है.बीते कुछ वर्षों से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में है. जुलाई में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा था कि पाकिस्तान कमजोर और असंतुलित विकास के कारण उल्लेखनीय आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. देश की अर्थव्यवस्था इस हालत में है कि उसे सुधारने के लिए काफी बड़े कदम उठाने की जरूरत है.

 

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है। पाक को चेतावनी देते हुए उसे फरवरी 2020 तक एक्शन प्लान पूरा करने के लिए कहा गया है। एएनआई के मुताबिक, एफएटीएफ ने पिछले साल आतंकवाद को पालने पोसने वाले देशों की एक ग्रे सूची में पाकिस्तान को रखा था। संगठन ने शुक्रवार को कहा कि हम पाकिस्तान से आग्रह करता हूं कि वह फरवरी 2020 तक अपना एक्शन प्लान दें। वहीं चेतानवी देते हुए कहा कि अगर वो ऐसा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ एफएटीएफ कार्रवाई करेगा। वहीं पाकिस्तान से लेन देने करने वाले वित्तीय संस्थानों को सलाह देने के लिए सदस्यों से आग्रह किया गया है। जानकारी के लिए बता दें कि एफएटीएफ ने टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर जो 27 नियम बनाए हैं उसमें से 22 पर पाकिस्तान खरा नहीं उतरा है। ऐसे में एक्शन प्लान ने देने पर ब्लैक लिस्ट किया जा सकता है। बीते साल जून से पाकिस्तान पर टेरर फंडिंग को लेकर अंतर्राष्ट्रीय जांच चल रही है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। पाकिस्तान के प्रदर्शन की समीक्षा एफएटीएफ के 39 सदस्य देश कर रहे हैं।

 रविवार को ईस्टर के दिन देश में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों के मद्देनजर श्रीलंका सरकार ने आज रात 12 बजे से देश में आपातकाल की घोषणा की है।  इससे पहले सरकार ने कर्फ्यू लगाने की घोषणा भी की है। यह सोमवार रात आठ बजे से लेकर मंगलवार तड़के चार बजे तक लगा रहेगा। देश में विभिन्न जगहों पर हुए विस्फोटों में 290 लोग मारे गए हैं और 500 से ज्यादा घायल हुए हैं। 

राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने दो अन्य जगहों पर विस्फोटों के साथ तीन लक्जरी होटलों और तीन चर्चों में विस्फोटों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की है।  समाचार पत्र डेली मिरर के अनुसार, समिति में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विजित माललगोडा शामिल हैं। 

राष्ट्रपति ने समिति को विस्फोटों से संबंधित सभी मामलों की जांच करने, इसकी पृष्ठभूमि और अन्य तथ्यों की जांच करने के और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

सभी आत्मघाती हमलावर श्रीलंकाई
श्रीलंका के इतिहास में हुई सबसे बड़ी आतंकवादी घटना के पीछे नेशनल तौहीद जमात नाम के स्थानीय संगठन का हाथ था। श्रीलंका के एक शीर्ष मंत्री ने सोमवार को यह जानकारी दी। ईस्टर के मौके पर हुए इस घातक हमले में 290 लोगों की मौत हो गई थी और 500 अन्य घायल हो गए थे।

स्वास्थ्य मंत्री एवं सरकारी प्रवक्ता रजीत सेनारत्ने ने भी कहा कि विस्फोट में शामिल सभी आत्मघाती हमलावर श्रीलंकाई नागरिक मालूम हो रहे हैं। यहां संवाददाता सम्मेलन में मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय इंटेलिजेंस एजेंसी के प्रमुख ने 11 अप्रैल से पहले इन हमलों की आशंका को लेकर पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) को आगाह किया था।

सेनारत्ने ने कहा, “चार अप्रैल को, अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों ने इन हमलों को लेकर आगाह किया था। आईजीपी को नौ अप्रैल को सूचित किया गया था।”उन्होंने कहा कि कट्टर मुस्लिम समूह -नेशनल तौहीद जमात नाम के स्थानीय संगठन को इन घातक विस्फोटों को अंजाम देने के पीछे माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जुड़े हुए हों।

सेनारत्ने ने सुरक्षा में हुई इस बड़ी चूक के लिए पुलिस प्रमुख पुजीत जयासुंदरा का इस्तीफा मांगा है। सरकार के एक मंत्री एवं मुख्य मुस्लिम पार्टी - श्रीलंकन मुस्लिम कांग्रेस के नेता रॉफ हकीम ने कहा कि यह निराशाजनक है कि इस तरह की जानकारी के बावजूद कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए। 

 

पाकिस्तान में तेजी से बढ़ रही आबादी 'टिकटिक करता टाइम बम' है. ये हम नहीं कह रहे बल्कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा है. दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी आबादी वाले मुल्क पाकिस्तान की सबसे ऊंची अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर बढ़ती आबादी पर काबू नहीं पाया गया तो कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान पूरी तरह कर्ज में डूब जाएगा. पाकिस्तान में फिलहाल आलम ये है कि यहां पैदा होने वाला हर बच्चा अपने सिर पर डेढ़ लाख लाख रुपए का कर्ज लेकर पैदा होता है. इसीलिए अब पाकिस्तान में भी हम दो हमारे दो की मांग तेजी से उठने लगी है.

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान में पैदा होने वाला हर बच्चा ‘टिकटिक करता टाइम बम’ है. बढ़ती आबादी पर क़ाबू पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नसीहत दी है. साथ ही मुल्क में बढ़ती बेरोज़गारी को देखते हुए आबादी पर अंकुश लगाने की हिदायत भी दी. इसके बाद अब पाकिस्तान में भी हम दो हमारे दो की मांग जोर पकड़ रही है.

हर नवजात डेढ लाख का कर्ज़दार

पूरी दुनिया में जब भी ये किलकारी गूंजती है तो चेहरे खुशियों से झूम उठते हैं. मगर पाकिस्तान अकेला दुनिया का ऐसा मुल्क है जहां ये किलकारी भी खतरे की घंटी की तरह बजती है. जानते हैं क्यों. क्योंकि यहां मां की कोख से बाहर आने वाले हर बच्चा पैदा होते ही करीब डेढ लाख रुपये का कर्ज़दार हो जाता है. आंकड़े कहते हैं कि पाकिस्तानी आबादी के 21 में से सात करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं. यानी हर दस में से चार पाकिस्तानी गरीब है. उस पर सितम ये कि मुल्क पर करीब 30 हज़ार अरब का क़र्जा है. तो अब जब भी कोई बच्चा यहां जन्म लेता है तो समझिए कि वो ‘टिकटिक करता टाइमबम’ है. ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि ये पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का कहना है.

लागू हो दो बच्चों का नियम

चीफ़ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान साक़िब निसार ने कहा कि पाकिस्तान दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश है. यहां तेजी से बढ़ रही जनसंख्या 'टिकटिक करता टाइमबम' है. धार्मिक विद्वानों, नागरिक संगठनों और सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को बढ़ावा देना चाहिए साथ ही प्रति परिवार दो बच्चों का नियम भी लागू करना चाहिए. बढ़ती जनसंख्या आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरनाक है.

राष्ट्रव्यापी जागरूकता आंदोलन की ज़रूरत

दरअसल पाकिस्तान में बढ़ती आबादी को कंट्रोल करने के लिए दो बच्चों का नियम लागू किए जाने की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ़ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान मियां साक़िब निसार ने ये फैसला सुनाया. साथ ही तमाम ज़िम्मेदार नुमाइंदो से इस सिलसिले में देशभर में मुहिम चलाने की अपील भी की. विस्फोटक रूप से बढ़ती जनसंख्या से देश के प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव है. प्रत्येक परिवार में दो बच्चों की नीति ही भविष्य में जनसंख्या पर नियंत्रण करने में मददगार साबित होगी. हमें एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता आंदोलन चलाने की जरूरत है. अब समय आ गया है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए देश एकजुट हो.

प्रोग्रेस रिपोर्ट देने के आदेश

इतना ही नहीं चीफ़ जस्टिस मियां साक़िब निसार ने देश के स्वास्थ्य सचिव कैप्टन जाहिद सईद को इसलिए कड़ी फटकार लगाई क्योंकि सईद ने कहा था कि स्वास्थ्य विभाग न तो जनसंख्या नियंत्रण के उपाय बना सकता है और न ही इन्हें लागू कर सकता है. कोर्ट ने अब संबंधित विभाग को हर तीन महीने में प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया है. जिसके बाद सचिव ने कोर्ट को बताया कि जनसंख्या वृद्धि दर को काबू करने के लिए एक योजना तैयार की गई है. जिसके तहत 2025 तक जनसंख्या वृद्धि दर 1.5 फीसदी तक कम किया जाना है.

आपको बता दें कि साल 2017 की जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़ 77 लाख से ज़्यादा है.. इस लिहाज़ से वो चीन, भारत, अमेरिका और इंडोनेशिया के बाद दुनिया का पांचवां सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है.. जबकि क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का नंबर दुनिया में 33वें नंबर पर आता है.

जनसंख्या कंट्रोल पर बहस

पाकिस्तान की बढ़ती आबादी वहां के संसाधनों पर काफी असर डाल रही है. क्योंकि एक तरफ तो मुल्क खाद्य संकट से जूझ रहा है. वहीं दूसरी तरफ मुल्क के पास पीने की पानी की भारी किल्लत है. और इन्हीं संकटों को देखते हुए इन दिनों पाकिस्तान में जनसंख्या कंट्रोल की बहस छिड़ी हुई है.

पाकिस्तान में तेजी से बढ़ रही आबादी 'टिकटिक करता टाइम बम' है. ये हम नहीं कह रहे बल्कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा है. दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी आबादी वाले मुल्क पाकिस्तान की सबसे ऊंची अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर बढ़ती आबादी पर काबू नहीं पाया गया तो कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान पूरी तरह कर्ज में डूब जाएगा. पाकिस्तान में फिलहाल आलम ये है कि यहां पैदा होने वाला हर बच्चा अपने सिर पर डेढ़ लाख लाख रुपए का कर्ज लेकर पैदा होता है. इसीलिए अब पाकिस्तान में भी हम दो हमारे दो की मांग तेजी से उठने लगी है.

 

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान में पैदा होने वाला हर बच्चा ‘टिकटिक करता टाइम बम’ है. बढ़ती आबादी पर क़ाबू पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नसीहत दी है. साथ ही मुल्क में बढ़ती बेरोज़गारी को देखते हुए आबादी पर अंकुश लगाने की हिदायत भी दी. इसके बाद अब पाकिस्तान में भी हम दो हमारे दो की मांग जोर पकड़ रही है.

 

हर नवजात डेढ लाख का कर्ज़दार

 

पूरी दुनिया में जब भी ये किलकारी गूंजती है तो चेहरे खुशियों से झूम उठते हैं. मगर पाकिस्तान अकेला दुनिया का ऐसा मुल्क है जहां ये किलकारी भी खतरे की घंटी की तरह बजती है. जानते हैं क्यों. क्योंकि यहां मां की कोख से बाहर आने वाले हर बच्चा पैदा होते ही करीब डेढ लाख रुपये का कर्ज़दार हो जाता है. आंकड़े कहते हैं कि पाकिस्तानी आबादी के 21 में से सात करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं. यानी हर दस में से चार पाकिस्तानी गरीब है. उस पर सितम ये कि मुल्क पर करीब 30 हज़ार अरब का क़र्जा है. तो अब जब भी कोई बच्चा यहां जन्म लेता है तो समझिए कि वो ‘टिकटिक करता टाइमबम’ है. ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि ये पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का कहना है.

 

लागू हो दो बच्चों का नियम

 

चीफ़ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान साक़िब निसार ने कहा कि पाकिस्तान दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश है. यहां तेजी से बढ़ रही जनसंख्या 'टिकटिक करता टाइमबम' है. धार्मिक विद्वानों, नागरिक संगठनों और सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को बढ़ावा देना चाहिए साथ ही प्रति परिवार दो बच्चों का नियम भी लागू करना चाहिए. बढ़ती जनसंख्या आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरनाक है.

 

राष्ट्रव्यापी जागरूकता आंदोलन की ज़रूरत

 

दरअसल पाकिस्तान में बढ़ती आबादी को कंट्रोल करने के लिए दो बच्चों का नियम लागू किए जाने की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ़ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान मियां साक़िब निसार ने ये फैसला सुनाया. साथ ही तमाम ज़िम्मेदार नुमाइंदो से इस सिलसिले में देशभर में मुहिम चलाने की अपील भी की. विस्फोटक रूप से बढ़ती जनसंख्या से देश के प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव है. प्रत्येक परिवार में दो बच्चों की नीति ही भविष्य में जनसंख्या पर नियंत्रण करने में मददगार साबित होगी. हमें एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता आंदोलन चलाने की जरूरत है. अब समय आ गया है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए देश एकजुट हो.

 

प्रोग्रेस रिपोर्ट देने के आदेश

 

इतना ही नहीं चीफ़ जस्टिस मियां साक़िब निसार ने देश के स्वास्थ्य सचिव कैप्टन जाहिद सईद को इसलिए कड़ी फटकार लगाई क्योंकि सईद ने कहा था कि स्वास्थ्य विभाग न तो जनसंख्या नियंत्रण के उपाय बना सकता है और न ही इन्हें लागू कर सकता है. कोर्ट ने अब संबंधित विभाग को हर तीन महीने में प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया है. जिसके बाद सचिव ने कोर्ट को बताया कि जनसंख्या वृद्धि दर को काबू करने के लिए एक योजना तैयार की गई है. जिसके तहत 2025 तक जनसंख्या वृद्धि दर 1.5 फीसदी तक कम किया जाना है.

 

आपको बता दें कि साल 2017 की जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़ 77 लाख से ज़्यादा है.. इस लिहाज़ से वो चीन, भारत, अमेरिका और इंडोनेशिया के बाद दुनिया का पांचवां सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है.. जबकि क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का नंबर दुनिया में 33वें नंबर पर आता है.

 

जनसंख्या कंट्रोल पर बहस

 

पाकिस्तान की बढ़ती आबादी वहां के संसाधनों पर काफी असर डाल रही है. क्योंकि एक तरफ तो मुल्क खाद्य संकट से जूझ रहा है. वहीं दूसरी तरफ मुल्क के पास पीने की पानी की भारी किल्लत है. और इन्हीं संकटों को देखते हुए इन दिनों पाकिस्तान में जनसंख्या कंट्रोल की बहस छिड़ी हुई है.

 

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