विशेष रिपोर्ट

विशेष रिपोर्ट (18)

ये मोबाइल हमारा है ,पतिदेव से भी प्यारा है

 

  • ये मोबाइल हमारा है ,पतिदेव से भी प्यारा है
  •  उठते ही मोबाइल के दर्शन पहले पाऊं मैं।
  • पति परमेशवर को ऐसे में बस भूल ही जाऊं मैं।
  • मध्यम आंच पर चाय चड़ाऊं मैं।व्हॉट्सएप को पढ़ती जाऊं मैं।
  •  चाय उबल कर हो गई काड़ा।चिल्ला रहा है अब पति देव हमारा।
  •  कानों में है ईयरफ़ोन लगाया।अब मैंने फेसबुक है चलाया।
  •  रोटी बनाने की बारी आई।दाल गैस पर चढ़ा कर आई।
  •  इतने में सखी का फ़ोन आया।पार्टी का उसने संदेशा सुनाया।
  •  करने लगी बातें मैं प्यारी।इतने में भिन्डी हो गई करारी।
  • सासूजी चबा ना पाई।मन ही मन वो खूब बड़बड़ाई।
  •  ससुर जी बैठे हैं बाथरूम में।खत्म हो गया पानी टंकी में।
  •  कैंडी-क्रश गेम में उलझ गई थी मैं।मोटर चालु करना ही भूल गई थी मैं।
  •  ग्रुप की एडमिन बन कर है नाम बहुत कमाया।
  • सबके घर की बहुओं को अपने ही साथ उलझाया।
  •  बच्चों की मार्कशीट के मार्क्स ही ऐसे आए।
  • जो पति परमेश्वर के दिल को ना है भाए।
  • उसे देख पतिदेव ने सिंघम रूप बनाया।
  • “आता माझी सटकली” हमको है सुनाया
  •  घर का बजा रहा है बारा ऐसा है मोबाइल हमारा!
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नई दिल्ली। भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने देश की प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसा करने से केवल गरीब बच्चों को अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा ही नहीं मिलेगी, बल्कि देश की एकता और अखंडता भी मजबूत होगीअश्विनी उपाध्याय ने मंगलवार को ट्वीट कर लिखा, “वर्तमान समय में देश में कुल 5464 तहसील हैं लेकिन केंद्रीय विद्यालय मात्र 1209 हैं. मेरा व्यक्तिगत विचार है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलना चाहिए। इससे गरीब बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मिलेगी, उन्हें समान अवसर मिलेगा, आपसी भाईचारा बढ़ेगा तथा देश की एकता और अखंडता मजबूत होगी।”

गरीब बच्चों को मिलेगी उच्च गुणवत्ता की शिक्षा

अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि गरीबी के चलते किसान-मजदूर के होनहार बच्चों को अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा नहीं मिल पाती हैष प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने से उच्च कोटि की शिक्षा गरीब छात्रों तक पहुंचेगी जो अभीतक इससे वंचित है. तहसील में रहने वाले तहसीलदार, उपजिलाधिकारी, कोतवाल, थानेदार, बिजली विभाग के अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अभियंता, लेक्चरर, प्रोफेसर और सरकारी डॉक्टर अपना परिवार साथ नहीं रखते क्योंकि तहसील मुख्यालय पर उनके बच्चों के लिए अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा व्यवस्था नहीं होती है। प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने से उक्त सभी लोग अपना परिवार अपने साथ रख सकेंगे। ऐसे में सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रोजाना लंबी यात्रा नहीं करेंगे और छुट्टियों पर नहीं जाएंगे जिसका सीधा फायदा यह होगा कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी जरुरतमंद लोगों को हर समय उपलब्ध रहेंगे और इससे प्रशासनिक कार्य अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।

 

Reliance Jio अपने यूजर्स के लिए अक्सर एक से बढ़कर एक ऑफर्स लाता रहता है और इसी कड़ी में कंपनी ने अपने यूजर्स के लिए 251 रुपए वाला प्लान पेश किया है। बाजार में इन दिनों मिल रहे तगड़ चैलेंज को देखते हुए Jio ने भी अपने यूजर्स के लिए एक स्पेशल प्लान पेश किया है। इन दिनों जारी India vs New Zealand सीरीज के कारण यह प्लान आपके बड़े फायदे का सौदा साबित हो सकता है। Jio अपने यूजर्स के लिए 251 रुपए का रिचार्ज प्लान लेकर आई है। इस प्लान को उन लोगों के लिए लाया गया है जिनका डेटा यूज ज्यादा है। इस प्लान में यूजर को ना सिर्फ लंबी वैलेडिटी का फायदा मिलता है बल्कि ज्यादा डेटा भी ऑफर किया जाता है।इस प्लान की डिटेल में बात करें तो अगर आप भी Reliance Jio यूजर हैं तो आप भी इस 251 रुपए के प्लान का फायदा ले सकते हैं। इसे कंपनी ने Jio Cricket Pack नाम दिया है जिसमें आपको 51 दिनों की वैलेडिटी मिलीत है और रोजाना 2 जीबी डेटा भी दिया जाता है। अगर आप भी Jio Cricket Plan लेना चाहते हैं तो ले सकते हैं लेकिन यह जान लें कि यह केवल एक डेटा प्लान है और इसमें किसी भी तरह की वॉइस कॉलिंग और SMS नहीं मिलते हैं। यह प्लान केवल क्रिकेट लवर्स के लिए लॉन्च किया गया है जिसका यूज आप क्रिकेट मैच देखने के लिए कर सकते हैं। इस प्लान में कम से कम आपको डेटा खत्म होने की वजह से मैच का मजा नहीं छोड़ना पड़ेगा। इस पैक को लेकर यह भी बता दें कि यह विशेषतौर से क्रिकेट के सीजन को देखते हुए पेश की गई है।यह प्लान Airtel और Vodafone Idea को टक्कर देगा। एयरटेल 249 रुपए का प्लान पेश करता है जिसमें यूजर को 1.5 जीबी डेटा मिलता है।

 

 

कोलकाता। केंद्र सरकार पंजाब नेशनल बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स (ओबीसी) के विलय के बाद बनने वाले नए बैंक के लिए नए नाम और प्रतीक चिन्ह की घोषणा करेगा। बैंक के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।नया बैंक एसबीआई के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा, जिसका कुल कारोबार 18 लाख करोड़ रुपए का होगा। यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) के एक अधिकारी ने कहा, 'सरकार विलय के बाद बनने वाले नए बैंक का नाम और प्रतीक चिन्ह की घोषणा करेगा। यह एक अप्रैल 2020 से परिचालन में आएगा।'अधिकारी ने कहा कि नए बैंक की पहचान बनाने को लेकर प्रतीक चिन्ह (लोगो) काफी महत्वपूर्ण है। इस बारे में तीनों सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में उधा स्तर पर चर्चा हुई है। अधिकारी ने कहा कि तीनों बैंकों ने प्रक्रियाओं के मानकीकृत बनाने और तालमेल बैठाने को लेकर 34 समितियां बनाई थी। समितियों ने संबंधित निदेशक मंडलों को अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप दी है।

 

माघ मास में आने वाली पूर्णिमा तिथि को माघ पूर्णिमा कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान, ध्यान और दान, पूजा -पाठ करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा स्नान का बड़ा महत्व शास्त्रों में बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षमण होता है। इसलिए इस दिन गंगा के तटों पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इसके साथ दूसरी पवित्र नदियों में भी लोग इस दिन स्नान कर दान-धर्म करते हैं।

शास्त्रों में किया है ऐसा महिमामंडन

पद्म पुराण में कहा गया है कि जिस व्यक्ति के पास धन की कमी है और शरीर निरोगी नहीं है, वह यदि माघ शुक्ल त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा को सूर्योदय से पहले स्नान कर दान-पुण्य कर लें तो उसको संपूर्ण माघ स्नान का फल मिल जाता है। माघ मास में सूर्योदय के पूर्व स्नान करने से देवी-देवताओं की कृपा मिलती है। पुराणों के अनुसार माघ पूर्णिमा को साक्षात विष्णु गंगाजल में विराजमान रहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर से कहा था कि माघ पूर्णिमा का फल वैशाख और कार्तिक पूर्णिमाओं के समान ही मिलता है। इसलिए इस दिन काशी में किया गया गंगा स्नान उत्तम फल देता है। इस दिन पितृों का तर्पण करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और पितृों को आशीर्वाद मिलता है। माघ पूर्णिमा के दिन प्रयाग में आए कल्पवासी गंगा स्नान और दान-पुण्य कर फिर से गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं। ब्रह्म वैवर्त्य पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में गंगा स्नान करने से ब्रहमलोक और बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

आत्म बोध

 

काश, हम थोड़े दिनों तक सांझ को इसे सोचते रहें, तो कल के लिए सुख की आशा बांधनी बहुत मुश्किल हो जाएगी। और जब आदमी में सुख की आशा बंधनी एकदम असंभव हो जाती है तब उस व्यक्ति की अंतरऱ्यात्रा शुरू होती है। उस व्यक्ति की अंतरऱ्यात्रा कभी शुरू नहीं होती जिसे सुख की आशा बाहर बनी रहती है। सुख बाहर है तो व्यक्ति कभी गहराई में नहीं उतर सकता है। सुख बाहर नहीं है, तो सिवा भीतर की गहराई में उतरने के और कोई उपाय नहीं रह जाता।

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   जैसे कोई आद सागर की गहराइयों में उतरना चाहता हो और तट के किनारे बंधी हुई जंजीर को जोर से पकड़े हो और पूछता हो कि सागर की गहराई में मुझे जाना है, सागर की गहराई में जाने में क्या-क्या बाधाएं आ सकती हैं? तो उस आदमी को कहना पड़ेगा कि पहली बाधा तो यही है कि तुम तट पर बंधी हुई जंजीर को पकड़े हुए हो। दूसरी बाधा यह होगी कि तुम स्वयं ही सागर की गहराई में जाने के खिलाफ लड़ने लगो, तैरने लगो, बचने का उपाय करने लगो। और तीसरी बाधा यह होगी कि गहराई का अनुभव मृत्यु का अनुभव है। जितनी गहराई में जाओगे उतने ही खो जाओगे। अंतिम गहराई पर गहराई रह जाएगी, तुम न रहोगे। इसलिए यदि अपने को बचाने का थोड़ा-सा भी मोह है तो गहराई में जाना असंभव है।जगत हमारे चारों ओर फैला हुआ है। उस जगत में बहुत कुछ हम जोर से पकड़े हुए हैं। वह जोर से जो हमारी पकड़ है, वही स्वयं के भीतर की गहराइयों में उतरने में सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए इस जगत के संबंध में कुछ सूत्र समझ लेने जरूरी हैं।बुद्ध कहा करते थे अपने भिक्षुओं से कि जीवन एक धोखा है। और जो इस धोखे को समझ लेता है, उसकी पकड़ जीवन पर छूट जाती है।इस पहले सूत्र को समझने की कोशिश करें--जीवन एक धोखा है। यहां जो जैसा दिखायी पड़ता है वह वैसा नहीं है। और यहां जैसी आशा बंधती है वैसा कभी फल नहीं होता है। यहां जो मानकर हम चलते हैं, उपलब्धि पर उसे कभी वैसा नहीं पाते। खोजते हैं सुख और मिलता है दुख। खोजते हैं जीवन, आती है मौत। खोजते हैं यश, अपयश के अतिरिक्त अंत में कुछ भी हाथ नहीं बचता है। खोजते हैं धन, भीतर की निर्धनता बढ़ती चली जाती है। चाहते हैं सफलता और पूरी जिदगी असफलता की लंबी कथा सिद्ध होती है। जीतने निकलते हैं, हारकर लौटते हैं। इस पूरी जिदगी के धोखे को ठीक से देख लेना जरूरी है उस साधक के लिए, जो स्वयं के भीतर जाना चाहता है। यदि पहचान ले कि जीवन धोखा है, तो उस पर से उसकी पकड़ छूट जाती है। तट पर बंधी हुई जंजीर से हाथ मुक्त हो जाता है।हम जानते हैं, फिर भी देखते नहीं हैं। शायद देखना यही चाहते हैं कि जीवन शायद धोखा नहीं है। हम अपने को धोखा देना चाहते हैं। जीवन तो निमित्त मात्र है। क्योंकि वही जीवन किसी के जागने का कारण भी बन जाता है और वही जीवन किसी के सोने का आधार हो जाता है। ठीक ऐसे ही है जैसे राह पर चलते हुए, अंधेरे में कोई रस्सी सांप जैसी दिख जाये। रस्सी को सांप जैसा दिखने की कोई आकांक्षा भी नहीं है। रस्सी को कुछ पता भी नहीं है। लेकिन मुझे रस्सी सांप जैसी दिख सकती है। रस्सी सिर्फ निमित्त हो जाती है। मैं उसमें सांप को आरोपित कर लेता हूं। फिर भागता हूं, हांफता हूं, पसीने से लथपथ, भयभीत। और वहां कोई सांप नहीं है। लेकिन मेरे लिए है। रस्सी ने धोखा दिया, ऐसा कहना ठीक नहीं। रस्सी से मैंने धोखा खाया, ऐसा ही कहना ठीक है। पास जाऊं और देखूं, रस्सी दिखाई पड़ जाये तो भय तत्काल तिरोहित हो जायेगा। पसीने की बूंदें सूख जायेंगी। हृदय की धड़कनें वापस अपनी गति ले लेंगी। खून अपने रक्तचाप पर लौट जायेगा। और मैं हंसूंगा और उसी रस्सी के पास बैठ जाऊंगा, जिस रस्सी से भागा था।परंतु जिदगी में उलटी हालत है। यहां हमने रस्सी को सांप नहीं समझा है, सांप को रस्सी समझ लिया है। इसलिए जिसे हम जोर से पकड़े हुए हैं, कल अगर पता चल जाये कि वह सांप है तो छोड़ने में क्षण भर की भी देर नहीं लगती। इसलिए जीवन को उसकी सचाई में, उसके तथ्यों में देख लेना जरूरी है। बच्चा रोता है जब पैदा होता है, और हम सब बैंड-बाजे बजाकर हंसते हैं, और प्रसन्न होते हैं। कहते हैं, सिर्फ एक बार भूलचूक हुई है इस जगत में, सिर्फ एक बार ऐसा हुआ कि एक बच्चा जरथुस्त्र पैदा होते वक्त हंसा था। अब तक कोई बच्चा पैदा होते वक्त हंसा नहीं है। और तब से हजारों लोगों ने पूछा है कि जरथुस्त्र पैदा होते वक्त क्यों हंसा? अब तक कोई उत्तर भी नहीं दिया गया है। लेकिन मुझे लगता है जरथुस्त्र हंसा होगा उन लोगों को देखकर जो बैंड-बाजे बजाते थे और खुश हो रहे थे। क्योंकि हर जन्म मृत्यु की खबर है। हंसा होगा जरथुस्त्र जरूर! वह उन लोगों पर हंस रहा था, जो सांप को रस्सी समझकर पकड़ रहे थे। वह उन लोगों पर हंसा होगा, जो जिदगी को उसके चेहरे से पहचानते हैं और उसकी आत्मा से नहीं पहचानते।

 

 

ऑफिस में आप अपने काम में चाहे कितने ही माहिर क्यों न हो, लेकिन आपकी बातचीत का तरीका भी आपकी छवि बनाता है. आपकजी इसी तरीकें से लोग आपके कायल होते हैं और इसी तरीके से आप खतरे में भी पद सकते है. यह तरीखा कई हद तक आपका जीवन संवारता और बिगाड़ता है. ऑफिस में आप कई बार अनजाने में ही कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग कर देते हैं, जो आपके सहकर्मियों के बीच आपकी इमेज को खराब करने में कारगर साबित होते हैं. तो आइए आपको आज ऐसे ही शब्दों के बारे में हम बताने जा रहे हैं जिनके इस्तेमाल से आपको ऑफिस में बचना चाहिए...

 'मैं यह काम नहीं कर सकता', इस तरह का वाक्य न बोलें. इस शब्द का गलती से भी इस्तेमाल ना करें. ऐसा बोलने पर यह प्रतीत होगा कि आप जिम्मेदारियों से भागते हैं या भाग रहे है.

  1. यह तो 'असंभव' है, जैसा शब्द न बोलें. इस शब्द का मतलब भी पहले वाले शब्द जैसा ही हुआ. अत: इस तरह के शब्द दूसरों के सामने आपकी नकारात्मक छवि बनाते हैं.
  2. कई बार ऐसा होता होगा कि आप ऑफिस में किसी परिस्थिति में असमंजस में होते हैं, तब भी आपको ये शब्द नहीं कहना चाहिए कि मैं पक्के से नहीं कह सकता कि क्या करना चाहिए? इसका मतलब यह है कि यह आपका आत्मविश्वास डगमगा रहा है, जो कि सबके लिए काफी जरूरी होता है. ऐसे में लोग आप पर भरोसा नहीं कर पाते हैं.
  3. अक्सर देखने में आता है कि कई लोगों को हर छोटी-बड़ी बात पर 'सॉरी' कहने की आदत होती है. गलती होने पर 'सॉरी' कहना अच्छी बात है, लेकिन बात-बात पर 'सॉरी' कहने से आपकी कमजोरी साफ झलकती है और छवि बिगड़ती जाती है.

 

अपनी शादी को लेकर जहां लड़की के मन में कई सपने होते है, वहीं कुछ डर भी होते है जैसे की उसे ससुराल में जाकर क्या करना चाहिए, मैं उन अजनबी लोगों के बीच अपनापन महसूस कर पाऊगी या नहीं ऐसे कई सवाल होते है, जो एक नई नवेली दुल्हन के मन में आते है। अगर आपकी शादी भी होने जा रही है और यह सोच डर रही तो आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे, जिनको फॉलो करके आप ससुराल में अपनी एच अच्छी जगह बना सकती है।

 

  1. ससुराल की मायके में शिकायत

कभी भी ससुराल वालों की मायके वालों के सामने निदा या उनकी तुलना अपने मायके वालों से न करें। अगर आप ऐसा करती है तो इससे आपकी परेशानियां और बढ़ सकती है। इसलिए अपने ससुराल की परेशानियों का हल खुद ही करें।

  1. परिवार से बातचीत

माना की पराए घर में वह लड़की हर किसी से अनजान होती है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वह अकेले में बैठी रहे और किसी से बातचीत न करें। अगर ससुराल वालों से घूलेगी-मिलेगी नहीं तो उनके विचारों का कैसे बता लगाएंगी। इसलिए अपने ससुराल वालों से मिले-जुले उन्हें समझने की कोशिश करें।

  1. सुबह उठे और अभिवादन करें

नई बहू को सुबह ही उठने की आदत डाल लेनी चाहिए। साथ ही अपने बड़ों का अभिवादन लेना चाहिए। इससे ससुराल वालों की आपके प्रति प्यार बनेगा। साथ ही आपको उनके सामने पहला इम्प्रैशन अच्छा निकलेगा। इसलिए शादी के पहले दिन ही आप जैसी छवि अपने ससुराल वालों को दिखाएंगे, आगे भी वैसे ही बनी रहती है।

  1. पॉजिटिव सोच रखें

ससुराल में हमेशा अपनी सोच को पॉजिटिव रखें । अपने मन ससुराल वालों के लेकर कोई गलत विचार न आने दें। कहते है कि जैसी सोच रखों सब वैसा ही दिखता है। इसलिए बेहतर होगा कि अपनी सोच को सही रखे और प्यार के साथ अपने ससुराल वालोंका दिल जीतने की कोशिश करें। इससे आप भी खुश रहेगी साथ ही ससुराल वाले भी।

  1. रिश्तो को महकाने की कोशिश

कभी भी खुद पर घमंड न करें। कहते है जिन रिश्तों में घमंड आ जाता है वह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाते। अपनी ननंद आदि से बहनों जैसा व्यवहार करें ताकि घर में कोई लड़ाई-झगड़े की बात ही न हो सके।

  1. किस्मत को न कोसे

ऐसा जरूरी नहीं कि जैसा आपने अपने ससुराल वालों के बारे में सोचा हो वैसा ही हो। उनके और आपके विचारों में काफी फर्क हो सकता है। अगर ससुराल वाले ऐसे न हो तो अपने नसीब को कोसने के बजाएं अपनी परिस्थितियों को सुधारने की कोशिश करें, ताकि आप अपनी शादीशुदा जिदगी को अच्छे से निभा पाएं।

 

 

 

पकौड़े बेचने का प्लान धरा का धरा रह गया। अब तय किया है कि कचौड़ी बेचूंगा! जब से अलीगढ़ के कचौड़ी वाले की करोड़पति होने की खबर देखी है, तब से मन बना लिया कि करियर अब कचौड़ी बेचने में ही बनाना है!यों भी, हिंदुस्तान में पकौड़े-कचौड़ी वालों का भविष्य उज्ज्वल है। हिंदुस्तानी सबकुछ छोड़ सकता है पर खाना, वो भी बाहर का, कभी नहीं छोड़ सकता। मुझे ही ले लीजिए, हफ्ते में सात दिन मैं खाना बाहर का ही खाता हूं। सात दिन इसलिए क्योंकि हफ्ते में दिन ही सात होते हैं। इस मसले पर बीवी से विवाद भी खूब होता है, लेकिन जब बीवी पर कंट्रोल न कर सका तो जीभ पर कैसे करूं!नौकरी या लेखन में अब कुछ रक्खा नहीं। खर्च बढ़ता जा रहा है और आमदनी वही अठन्नी। नौकरी में क्या कम झंझट हैं। बॉस की सुनो। क्लाइंट की सुनो। टाइम पर आओ जरूर पर जाने का कोई टाइम नहीं।ऊपर से हजार तरह की खुर-पेंच। छुट्टी मांगो तो लगे की भीख मांग रहे हैं। शाम को थके-हारे घर लौटो तो बीवी की शिकायतें और किस्म-किस्म की फरमाइशें। किस्म पर ज्यादा दिमाग न लगाइएगा, बात पिक्चर दिखाने, शॉपिंग कराने, ससुराल जाने देने संबंधी फरमाइशों की है।लेखन में ही भला कौन-सा सुख है। नौकरी की तरह ही लेखन में भी दबाके कॉम्पिटिशन हो गया है। इतनी तरह के तो लेखक आ गए हैं। कोई भी लेखक हजार तरह का लेखन कर गुजरता है। यह नहीं कि अगला व्यंग्य लिखता है तो व्यंग्य ही लिखेगा। व्यंग्य के साथ वो कविता, कहानी और उपन्यास भी लिख-पेल लेता है। वो तो गनीमत है कि अब नहीं लिखते, वरना पहले तो वे वक्त-जरूरत पड़ने पर मकान की रजिस्ट्री, किरायानामा, नोटरी की ड्राफ्टिंग आदि भी लिख लेते थे। लेखक जो ठहरे।जहां तक लिखकर पेट भर सकने की बात है तो लिखने के बाद भी यह गारंटी नहीं कि फलां जगह छपेगा ही। और छप भी गया तो चेक या नकद मिलेगा ही! जुगाड़ अपन को आता नहीं, इसके बिना छप पाता नहीं।कितने ही पुरस्कार जुगाड़ के चलते इस या उस को दिए और दिलवा दिए जाते हैं। यहां तो इतना समय हो गया लिखते हुए, मजाल है किसी ने पुरस्कार के नाम पर एक कलम भी दी हो। कुछ जगह तो मेहनताने के पैसे तक दबे पड़े हैं। मगर देखने वाले को लगता है कि अगला लेखक है तो दबाकर पीट रहा होगा। इसीलिए तो मैंने नौकरी और लेखन को त्याग कर कचौड़ी बेचने का निर्णय लिया है। कम से कम रोज की कमाई तो पक्की है इसमें। न बॉस की जली-कटी सुनने को, न क्लाइंट की गीदड़-भभकी झेलने को मिलेगी। जब चाहो कचौड़ियां तलो, न मन हो तो मत तलो। हालांकि मेरे इस निर्णय पर बीवी को घोर टाइप की आपत्ति है। वो कहती है- 'इत्ती अच्छी जॉब छोड़कर कचौड़ी बेचोगे! तुम्हें शर्म नहीं आएगी? नाते-रिश्तेदारों में नाक कटवाओगे क्या?" मैं उसे समझाने की कोशिश करता हूं- 'कचौड़ी से नाक का क्या ताल्लुक? जब अलीगढ़ के करोड़पति कचौड़ी वाले की नाक नहीं कटी तो मेरी क्यों कटेगी?" मेरा ये जवाब सुन वो मेरी ओर हिकारत भरी नजर से देखती है, हालांकि करोड़पति शब्द उसके कान में गूंज गया है। इसलिए अब मैंने तय कर लिया है कि ठेला तो मैं कचौड़ी का ही लगाऊंगा। भले ही फिर मेरे खुद के पकौड़े क्यों न तल जाएं?

 

मेष :पूरे हफ्ते उन चीज़ों को करने की कोशिश करें जिससे आपको शांति और और सुकून महसूस होता हो। आर्थिक मामलों के लिए समय अच्छा है.

वृष :करियर के लिए समय अच्छा है, किसी प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए तरक्की मिल सकती है, सैलरी बढ़ने के योग भी हैं।

मिथुन :करियर के लिए समय अच्छा है, कार्यक्षेत्र पर किसी समस्या का व्यवहारिक समाधान आसानी से निकालकर आगे बढ़ेंगे। 

कर्क: किसी अच्छे काम के लिए दिए गए दान से समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। किसी काम को पूरा करने में परिवार का साथ और सहयोग मिलेगा .

सिंह : परिवार के साथ कहीं घूमने जाना काफी मजेदार साबित होगा। पढ़ाई के लिए समय अच्छा चल रहा है, समय का लाभ उठाते हुए एकाग्र होकर जमकर मेहनत करें, सफलता जरूर मिलेगी।

कन्या: घर परिवार पर अच्छा माहौल रहेगा, लंबे समय से बीमार चल रहे परिवार के किसी बुजुर्ग सदस्य की सेहत में धीरे-धीरे सुधार होगा। 

तुला : कार्यक्षेत्र पर कुछ समस्याएं हो सकती हैं, किसी सीनियर के खराब मूड के चलते उसके गुस्से का सामना करना पड़ेगा। 

वृश्चिक : करियर के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा, तरक्की मिलने के योग बन रहे हैं, किसी खास प्रोफेशन से जुड़े लोगों को अच्छी खबर सुनने को मिल सकती हैं। 

धनु :आर्थिक रूप से कुछ समस्याएं आ सकती हैं, बिना सोच-समझकर किए गए किसी निवेश के कारण नुकसान हो सकता है।

मकर: पूरा सप्ताह काफी जोश भरा रहेगा। मौसम को एंजॉय करने के लिए ड्राइविंग पर जा सकते हैं। माता-पिता का मूड अच्छा रहने के कारण घर पर खुशी का माहौल रहेगा.

कुंभ : करियर के लिए सप्ताह लाभ दिलाने वालारहेगा। करियर में तरक्की के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र पर शत्रुओं को आसानी से परास्त कर लेंगे। 

मीन :किसी के साथ पार्टनरशिप में नया व्यवसाय शुरू कर सकते हैं, हालांकि ये फायदा का सौदा है लेकिन कोई भी साझेदारी करने से पहले चीजों को अच्छे से परखना आपके लिए हितकर साबित होगा।

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