विशेष रिपोर्ट

विशेष रिपोर्ट (4)

 साधारण परिस्थितियों में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन को इस बार विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपन्न करना पड़ा। आज जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है, इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता पहली बार संसार की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मंच जी-20 पर ही देखी गई। इस मंच पर सदस्य देशों ने जो संकल्प लिए हैं, उन्हें वे पूरा कर ले गए तो कोरोना के अभिशाप से निपटने में दुनिया को इससे काफी मदद मिलेगी। कोरोना वायरस के असर से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाली मार का मुकाबला करने के लिए जी-20 देशों ने पांच ट्रिलियन डॉलर खर्च करने का फैसला किया है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए सऊदी अरब के शाह सलमान ने जी-20 के नेताओं से अपील की कि वे वैश्विक महामारी से निपटने के लिए ‘कारगर एवं समन्वित कार्यवाही’ की ओर बढ़ें। उन्होंने जी-20 देशों से विकासशील देशों की मदद करने का भी आग्रह किया। इतने सारे राष्ट्राध्यक्षों के विडियो संवाद का यह पहला अवसर था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, जापान के पीएम शिंजो आबे और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व खाद्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर सच में दुनिया की हालत सुधारनी है तो हमें केवल आर्थिक पहलू पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय जनकल्याण पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें इस बहस में नहीं जाना चाहिए कि कोरोना वायरस का संक्रमण कहां से या कैसे शुरू हुआ। जी-20 के सदस्य देशों को मिलकर इस वैश्विक संक्रमण को दूर करने के उपायों पर बात करनी चाहिए। भारत इस महामारी के प्रभावों से निपटने के लिए कई नीतिगत उपाय कर रहा है। शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने मुख्य ब्याज दर रेपो रेट में 0.75 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट में 0.90 प्रतिशत की कटौती घोषित की, जो एक दिन में ब्याज दरों में अभी तक का सबसे बड़ा बदलाव है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इन कदमों से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए 3.74 लाख करोड़ रुपये के बराबर अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी। सभी वाणिज्यिक बैंकों और ऋणदाता संस्थानों को छूट दी गई है कि वे किसी भी कर्ज की किस्तें तीन महीने तक न जमा होने पर भी उसे बट्टे खाते में न डालें। उम्मीद करें कि तमाम देश अपने यहां ऐसे सभी उपाय करेंगे, जिनसे घर बैठने के बावजूद लोगों का जीवन चलता रहे, वे अपनी कर्ज अदायगी को लेकर परेशान न हों, और जैसे ही महामारी काबू में आनी शुरू हो, विश्व अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की शुरुआत भी हो जाए। 

 

 

साधारण परिस्थितियों में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन को इस बार विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपन्न करना पड़ा। आज जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है, इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता पहली बार संसार की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मंच जी-20 पर ही देखी गई। इस मंच पर सदस्य देशों ने जो संकल्प लिए हैं, उन्हें वे पूरा कर ले गए तो कोरोना के अभिशाप से निपटने में दुनिया को इससे काफी मदद मिलेगी। कोरोना वायरस के असर से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाली मार का मुकाबला करने के लिए जी-20 देशों ने पांच ट्रिलियन डॉलर खर्च करने का फैसला किया है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए सऊदी अरब के शाह सलमान ने जी-20 के नेताओं से अपील की कि वे वैश्विक महामारी से निपटने के लिए ‘कारगर एवं समन्वित कार्यवाही’ की ओर बढ़ें। उन्होंने जी-20 देशों से विकासशील देशों की मदद करने का भी आग्रह किया। इतने सारे राष्ट्राध्यक्षों के विडियो संवाद का यह पहला अवसर था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, जापान के पीएम शिंजो आबे और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व खाद्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर सच में दुनिया की हालत सुधारनी है तो हमें केवल आर्थिक पहलू पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय जनकल्याण पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें इस बहस में नहीं जाना चाहिए कि कोरोना वायरस का संक्रमण कहां से या कैसे शुरू हुआ। जी-20 के सदस्य देशों को मिलकर इस वैश्विक संक्रमण को दूर करने के उपायों पर बात करनी चाहिए। भारत इस महामारी के प्रभावों से निपटने के लिए कई नीतिगत उपाय कर रहा है। शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने मुख्य ब्याज दर रेपो रेट में 0.75 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट में 0.90 प्रतिशत की कटौती घोषित की, जो एक दिन में ब्याज दरों में अभी तक का सबसे बड़ा बदलाव है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इन कदमों से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए 3.74 लाख करोड़ रुपये के बराबर अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी। सभी वाणिज्यिक बैंकों और ऋणदाता संस्थानों को छूट दी गई है कि वे किसी भी कर्ज की किस्तें तीन महीने तक न जमा होने पर भी उसे बट्टे खाते में न डालें। उम्मीद करें कि तमाम देश अपने यहां ऐसे सभी उपाय करेंगे, जिनसे घर बैठने के बावजूद लोगों का जीवन चलता रहे, वे अपनी कर्ज अदायगी को लेकर परेशान न हों, और जैसे ही महामारी काबू में आनी शुरू हो, विश्व अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की शुरुआत भी हो जाए। 

दुल्हन ने विदाई के वक़्त शादी को किया नामंजूर

शादी के बाद विदाई का समय था, नेहा अपनी माँ से मिलने के बाद अपने पिता से लिपट कर रो रही थीं। वहाँ मौजूद सब लोगों की आंखें नम थीं। नेहा ने घूँघट निकाला हुआ था, वह अपनी छोटी बहन के साथ सजाई गयी गाड़ी के नज़दीक आ गयी थी। दूल्हा अविनाश अपने खास मित्र विकास के साथ बातें कर रहा था। विकास -'यार अविनाश... सबसे पहले घर पहुंचते ही होटल अमृतबाग चलकर बढ़िया खाना खाएंगे...यहाँ तेरी ससुराल में खाने का मज़ा नहीं आया।' तभी पास में खड़ा अविनाश का छोटा भाई राकेश बोला -'हा यार..पनीर कुछ ठीक नहीं था...और रस मलाई में रस ही नहीं था।' और वह ही ही ही कर जोर जोर से हंसने लगा। अविनाश भी पीछे नही रहा -'अरे हम लोग अमृतबाग चलेंगे, जो खाना है खा लेना... मुझे भी यहाँ खाने में मज़ा नहीं आया..रोटियां भी गर्म नहीं थी...।' अपने पति के मुँह से यह शब्द सुनते ही नेहा जो घूँघट में गाड़ी में बैठने ही जा रही थी, वापस मुड़ी, गाड़ी की फाटक को जोर से बन्द किया... घूँघट हटा कर अपने पापा के पास पहुंची...।अपने पापा का हाथ अपने हाथ में लिया..'मैं ससुराल नहीं जा रही पिताजी... मुझे यह शादी मंजूर नहीं।' यह शब्द उसने इतनी जोर से कहे कि सब लोग हक्के बक्के रह गए...सब नज़दीक आ गए। नेहा के ससुराल वालों पर तो जैसे पहाड़ टूट पड़ा... मामला क्या था यह किसी की समझ में नहीं आ रहा था। तभी नेहा के ससुर राधेश्यामजी ने आगे बढ़कर नेहा से पूछा -- 'लेकिन बात क्या है बहू? ???????शादी हो गयी है...विदाई का समय है अचानक क्या हुआ कि तुम शादी को नामंजूर कर रही हो?'??????...? अविनाश की तो मानो दुनिया लूटने जा रही थी...वह भी नेहा के पास आ गया, अविनाश के दोस्त भी।सब लोग जानना चाहते थे कि आखिर एन वक़्त पर क्या हुआ कि दुल्हन ससुराल जाने से मना कर रही है।नेहा ने अपने पिता दयाशंकरजी का हाथ पकड़ रखा था... नेहा ने अपने ससुर से कहा -'बाबूजी मेरे माता पिता ने अपने सपनों को मारकर हम बहनों को पढ़ाया लिखाया व काबिल बनाया है। आप जानते है एक बाप के लिए बेटी क्या मायने रखती है?? ????......आप व आपका बेटा नहीं जान सकते क्योंकि आपके कोई बेटी नहीं है।' नेहा रोती हुई बोले जा रही थी- 'आप जानते है मेरी शादी के लिए व शादी में बारातियों की आवाभगत में कोई कमी न रह जाये इसलिए मेरे पिताजी पिछले एक साल से रात को 2-3 बजे तक जागकर मेरी माँ के साथ योजना बनाते थे... खाने में क्या बनेगा...रसोइया कौन होगा...पिछले एक साल में मेरी माँ ने नई साड़ी नही खरीदी क्योकि मेरी शादी में कमी न रह जाये... दुनिया को दिखाने के लिए अपनी बहन की साड़ी पहन कर मेरी माँ खड़ी है... मेरे पिता की इस डेढ़ सौ रुपये की नई शर्ट के पीछे बनियान में सौ छेद है.... मेरे माता पिता ने कितने सपनों को मारा होगा...न अच्छा खाया न अच्छा पीया...बस एक ही ख्वाहिश थी कि मेरी शादी में कोई कमी न रह जाये...आपके पुत्र को रोटी ठंडी लगी!!! नके दोस्तों को पनीर में गड़बड़ लगी व मेरे देवर को रस मलाई में रस नहीं मिला...इनका खिलखिलाकर हँसना मेरे पिता के अभिमान को ठेस पहुंचाने के समान है...। नेहा हांफ रही थी...।' नेहा के पिता ने रोते हुए कहा -'लेकिन बेटी इतनी छोटी सी बात..।' नेहा ने उनकी बात बीच मे काटी -'यह छोटी सी बात नहीं है पिताजी...मेरे पति को मेरे पिता की इज्जत नहीं... रोटी क्या आपने बनाई! रस मलाई ... पनीर यह सब केटर्स का काम है... आपने दिल खोलकर व हैसियत से बढ़कर खर्च किया है, कुछ कमी रही तो वह केटर्स की तरफ से... आप तो अपने दिल का टुकड़ा अपनी गुड़िया रानी को विदा कर रहे है??? आप कितनी रात रोयेंगे क्या मुझे पता नहीं... माँ कभी मेरे बिना घर से बाहर नही निकली... कल से वह बाज़ार अकेली जाएगी... जा पाएगी? जो लोग पत्नी या बहू लेने आये है वह खाने में कमियां निकाल रहे...मुझमे कोई कमी आपने नहीं रखी, यह बात इनकी समझ में नही आई??' दयाशंकर जी ने नेहा के सर पर हाथ फिराया - 'अरे पगली... बात का बतंगड़ बना रही है... मुझे तुझ पर गर्व है कि तू मेरी बेटी है लेकिन बेटा इन्हें माफ कर दे.... तुझे मेरी कसम, शांत हो जा।' तभी अविनाश ने आकर दयाशंकर जी के हाथ पकड़ लिए -'मुझे माफ़ कर दीजिए बाबूजी...मुझसे गलती हो गयी...मैं ...मैं।' उसका गला बैठ गया था..रो पड़ा था वह। तभी राधेश्यामजी ने आगे बढ़कर नेहा के सर पर हाथ रखा -'मैं तो बहू लेने आया था लेकिन ईश्वर बहुत कृपालु है उसने मुझे बेटी दे दी... व बेटी की अहमियत भी समझा दी... मुझे ईश्वर ने बेटी नहीं दी शायद इसलिए कि तेरे जैसी बेटी मेरी नसीब में थी...अब बेटी इन नालायकों को माफ कर दें... मैं हाथ जोड़ता हूँ तेरे सामने... मेरी बेटी नेहा मुझे लौटा दे।' और दयाशंकर जी ने सचमुच हाथ जोड़ दिए थे व नेहा के सामने सर झुका दिया। नेहा ने अपने ससुर के हाथ पकड़ लिए...'बाबूजी।' राधेश्यामजी ने कहा - 'बाबूजी नहीं..पिताजी।' नेहा भी भावुक होकर राधेश्याम जी से लिपट गयी थी। दयाशंकर जी ऐसी बेटी पाकर गौरव की अनुभूति कर रहे थे। नेहा अब राजी खुशी अपने ससुराल रवाना हो गयी थीं... पीछे छोड़ गयी थी आंसुओं से भीगी अपने माँ पिताजी की आंखें, अपने पिता का वह आँगन जिस पर कल तक वह चहकती थी.. आज से इस आँगन की चिड़िया उड़ गई थी किसी दूर प्रदेश में.. और किसी पेड़ पर अपना घरौंदा बनाएगी।यह कहानी लिखते वक्त मैं उस मूर्ख व्यक्ति के बारे में सोच रहा था जिसने बेटी को सर्वप्रथम 'पराया धन' की संज्ञा दी होगी। बेटी माँ बाप का अभिमान व अनमोल धन होता है, पराया धन नहीं। कभी हम शादी में जाये तो ध्यान रखें कि पनीर की सब्ज़ी बनाने में एक पिता ने कितना कुछ खोया होगा व कितना खोएगा... अपना आँगन उजाड़ कर दूसरे के आंगन को महकाना कोई छोटी बात नहीं। खाने में कमियां न निकाले... । बेटी की शादी में बनने वाले पनीर, रोटी या रसमलाई पकने में उतना समय लगता है जितनी लड़की की उम्र होती है। यह भोजन सिर्फ भोजन नहीं, पिता के अरमान व जीवन का सपना होता है। बेटी की शादी में बनने वाले पकवानों में स्वाद कही सपनों के कुचलने के बाद आता है व उन्हें पकने में सालों लगते है, बेटी की शादी में खाने की कद्र करें। अगर उपर्युक्त बातें आपको अच्छी लगे तो कृपया दूसरों से भी साझा करें.... एक कदम बेटियों के सम्मान के लिए

 

 

दुश्मन को हराना है तो जरूरी है कि उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल की जाए। दुनिया में किसी भी लड़ाई को आजतक डरकर नहीं जीता जा सका है और यही बात Corona Virus के खिलाफ भी लागू होती है। हम डरकर इसे हरा नहीं सकते।

दुश्मन को हराना है तो जरूरी है कि उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल की जाए। दुनिया में किसी भी लड़ाई को आजतक डरकर नहीं जीता जा सका है और यही बात Corona Virus के खिलाफ भी लागू होती है। हम डरकर इसे हरा नहीं सकते।

यह देखा गया कि जो लोग कोरोना पॉजिटिव पाए जाते हैं, उनमें इस वायरस को फैलाने की गति सिंप्टम्स शो होने से पहले कहीं अधिक होती है। यानी वो हाइली कॉन्टेजियस होते हैं, उस स्थिति में जब उनमें लक्षण नजर नहीं आ रहे होते हैं। और उनके जरिए यह वायरस बहुत तेजी से अन्य लोगों में फैलता चला जाता है।

किसी व्यक्ति में Covid-19 के सिंप्टम्स इस वायरस के उनकी बॉडी में एंट्री करने के 2 से 14 दिन के बीच नजर आते हैं। साथ ही यह भी देखा गया कि सिंप्टम्स आने के बाद 8 से 10 दिन तक व्यक्ति कॉन्टेजियस रहता है। इसके बाद उसके जरिए इंफेक्शन होने के चांस लगभग खत्म हो जाते हैं।

अगर मान लिया जाए कि किसी व्यक्ति में 14वें दिन इस बीमारी के लक्षण नजर आए हैं और अगले 8 से 10 दिन वह व्यक्ति कॉन्टेजियस रहनेवाला है तो कुल मिलाकर एक संक्रमित व्यक्ति 22 से 24 दिन तक इस बीमारी को फैलाने की क्षमता रखता है।

एक अन्य स्टडी में यह बात सामने आई है कि यह वायरस एक व्यक्ति के शरीर में ज्यादातर 20 दिन रहता है जबकि कुछ केसेज में यह एक व्यक्ति के शरीर में 37 दिन तक भी पाया गया है। हालांकि ऐसे केस रेयर हैं।

दुनियाभर में 14 दिन के क्वारंटाइन यानी एकांतवास के पीछे की कैल्कुलेशन यह है कि इस बीमारी के लक्षण आने में ज्यादातर मामलों में 6 दिन लगते हैं और अगले 8 दिन तक संक्रमित व्यक्ति घातक स्तर पर संक्रमण फैला सकता है। यानी बीमारी के लक्षण उजागर होने के पहले के 6 दिन और लक्षण उजागर होने के बाद के 8 दिन, मतलब 6+8=14 दिन।

हमारा शरीर इंफेक्शन होने के बाद करीब-करीब 6 से 12 दिन में ही इस वायरस के खिलाफ ऐंटिबॉडीज बनाना शुरू कर देता है, जिससे वायरस को खत्म किया जा सके। इन ऐंटिबॉडीज के बनने की वजह से ही किसी रोगी व्यक्ति के जरिए संक्रमण फैलने की क्षमता कम होने लगती है।

जिनके अंदर एक बार इंफेक्शन हो जाता है और वे इससे रिकवर कर लेते हैं, उनके अंदर बहुत ही रेयर केस में रीइंफेक्शन के चांस होते हैं। ऐसे कुछ केस चीन में सामने आए हैं। इनकी दर टोटल संक्रमित केसेज की 0.2 पर्सेंट बताई जा रही है। हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स इसमें एरर होने की संभावना भी जता रहे हैं।

95 प्रतिशत पॉजिटिव केसेज में यह देखा गया है कि यह संक्रमण -2 डिग्री से लेकर 10 डिग्री सेल्सियस के बीच तेजी से फैला। इससे ऐसा लगता है कि यह वायरस ठंडे इलाकों में तेजी से फैलता है। इसलिए संभावना जताई जा रही है कि तेज गर्मी होने पर इस संक्रमण के फैलने की गति धीमी हो सकती है। जैसा कि फ्लू और कोल्ड में देखने को मिलता है।

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