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Thursday, 25 June 2020 17:26

जब कोहली को लगा, यह उनका अंत है

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साल 2019, तारीख 14 नवंबर। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान टूर के लिए अपनी टीम का ऐलान किया। इसमें तीन नाम नदारद थे। ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल, बैटसमेन निक मैडिंसन और विल पुकोव्स्की। तीनों ने दो हफ्ते से भी कम वक्फे में एक ही वजह से खुद को सिलेक्शन के लिए अनुपलब्ध बताया। वजह मेंटल हेल्थ से जुड़ी हुई थी। इनमें से पुकोव्स्की की उम्र महज 21 साल थी।मेंटल हेल्थ खेल की दुनिया में बड़ी समस्या के तौर पर उभर कर आया है। पहले खिलाड़ी इस बारे में बात करने से कतराते थे। अब स्वीकार कर रहे हैं। भारतीय क्रिकेट के लिए कामयाबी का दूसरा नाम कहे जाने वाले विराट कोहली को भी करियर में एक बार ऐसी दिक्कत का सामना करना पड़ा था। लेकिन वह चुप थे। हाल में मैक्सवेल के बहाने बोल पड़े। विराट ने स्वीकार किया कि साल 2014 के इंग्लैंड दौरे के बाद उन्हें लगने लगा था कि उनका अंत निकट है।कोहली ने उस दौरे में 10 टेस्ट पारियों में केवल 134 रन बनाए थे। एक्सपर्ट्स ने कहना शुरू कर दिया था कि इंग्लिश कंडीशंस में उनकी सारी कमजोरियां सामने आ गईं। कोहली नाकामी और अपने ऊपर उम्दा प्रदर्शन करने के दबाव के कठिन पाटों के बीच पिस रहे थे। पर वह चुप रहे क्योंकि उनके शब्दों में, ‘मैं यह नहीं जानता था कि इसे कैसे लिया जाता।’लेकिन मैक्सवेल के बहाने कोहली खुलकर बोले। उन्होंने बहुत ईमानदारी से स्वीकार किया कि ‘मैं भी अपने करियर में इस दौर से गुजरा हूं। तब मैंने महसूस किया था कि यह मेरे लिए अंत है। मुझे यह पता नहीं था कि क्या करना है। किसी को क्या कहना है। कैसे इस बारे में बात करनी है।’ उन्होंने आगे कहा कि मैक्सवेल ने अपनी मानसिक स्थति को जाहिर करके और क्रिकेट से ब्रेक लेकर कतई गलत नहीं किया।क्रिकेट ही नहीं, दीगर खेलों के खिलाड़ियों को भी मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं ने परेशान किया है। मशहूर टेनिस खिलाड़ी आंद्रे अगासी इन दिक्कतों से जूझते-जूझते ड्रग्स लेने के आदी हो गए थे। तीस बरस बीतने तक भी वह केवल इक्का-दुक्का खिताब ही जीत पाए थे।उन पर प्रदर्शन का दबाव इतना बढ़ा कि हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया की तरफ से उनसे एक ही सवाल पूछा जाता था, 'आप रिटायर कब होंगे।' हालांकि अगासी भरपूर डिप्रेशन और ड्रग्स की डोज से अपनी दूसरी पत्नी स्टेफी ग्राफ की स्नेहिल अंगुली पकड़ कर निकल आए और अगले कुछ बरस में ही टेनिस का हर बड़ा खिताब भी अपने नाम किया।
लेकिन सब अगासी की तरह लकी नहीं होते। इंग्लैंड के बल्लेबाज मार्कस ट्रेस्कोथिक साल 2006 में भारत दौरे पर आए थे। तब वह डिप्रेशन की चपेट में इतने गहरे तक आ गए थे कि उन्होंने न सिर्फ यह दौरा बीच में छोड़ दिया, बल्कि क्रिकेट को भी सदा के लिए अलविदा कह दिया। कुछ इसी तरह के हालात से इंग्लिश बैट्समैन जोनाथन ट्रॉट को भी जूझना पड़ा।लेकिन सबसे डरावना कबूलनामा भारत के पूर्व क्रिकेटर प्रवीण कुमार का था। प्रवीण ने खुलासा किया कि टीम से बाहर होने के बाद एक ऐसा दौर भी आया, जब वह इतना अधिक हताश हो गए कि अपनी पिस्टल से खुद को गोली मार लेना चाहते थे। फिर अपने बच्चों का खयाल आया और उन्होंने इरादा बदल दिया।प्रवीण ने अपने कबूलनामे में इससे भी अहम एक बात कही, जो खेल ही नहीं हर क्षेत्र में उम्दा परफॉरमेंस करने के दबाव से जूझते शख्स पर लागू होती है। एक अखबार को दिए गए इंटरव्यू में प्रवीण कुमार ने पूछा, ‘भारत में कौन करता है डिप्रेशन की बात? मेरठ जैसे इलाके में तो कोई भी नहीं। मैं किसे सुनाऊं अपनी तकलीफ?’प्रवीण कुमार का सवाल बहुत दूर तक जायज है। विराट कोहली भी प्रवीण से जुदा बातें नहीं कह रहे। फर्क बस इतना है कि दबाव में विराट कोहली बिखरे नहीं। प्रवीण बिखर गए। उनके इंटरनैशनल करियर का असमय अंत हो गया। विराट कोहली को उबारने के लिए उनके निजी कोच राजकुमार शर्मा थे। अगासी के लिए स्टेफी ग्राफ थीं, जो विमंस टेनिस में बहुत ऊंचा मकाम रखती थीं। प्रवीण के पास उन्हें उबारने के लिए तो दूर, बात करने के लिए कोई नहीं था।अब बात होने लगी है। मेंटल हेल्थ से जुड़ी कोई दिक्कत है, उसे खिलाड़ियों द्वारा खुले मन से स्वीकार किया जाने लगा है। अपनी चमकीली संभावनाओं को परे रखकर 21 साल के विल पुकोव्स्की ने जो कदम उठाया, वह कई मायनों में साहसिक है। इसकी परवाह किए बगैर कि लोग कहीं ‘रणछोड़ दास’ तो नहीं कहने लगेंगे, मैक्सवेल ने पेशेवर क्रिकेट से ब्रेक लिया। यह भी अपने आप में कम हिम्मती फैसला नहीं है।उनके इस फैसले ने खिलाड़ियों के मेंटल हेल्थ को लेकर दुनिया भर में एक बातचीत का माहौल बनाया। ब्रायन लारा और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज ने भी अपने-अपने अनुभवों का हवाला देकर बताया कि यह खेल और खिलाड़ियों की दुनिया का एक स्याह पन्ना है, जिसे बातचीत की नई रोशनी में पढ़ने की जरूरत है।

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