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दिल्ली (2)

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने भगवा परचम लहरा दिया है। पिछले चुनाव में महज चार सीटें जीतने वाली बीजेपी ने इस चुनाव में अब तक 46 सीटें जीतीं हैं। जानकारों की माने तो बीजेपी के लिए यह जीत हैदराबाद का किला जीतने के समान है। GHMC चुनाव में सत्तारूढ़ टीआरएस के खाते में 56 सीटें गई हैं। जबकि ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 43 सीटों पर कब्जा जमाया है।ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव के प्रचार के दौरान बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इस असर चुनाव परिणाम में साफ दिख रहा है। वहीं बीजेपी के इस दमदार प्रदर्शन ने विपक्षी पार्टियों की चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। पिछले चुनाव 2016 में टीआरएस ने 99 और असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी AIMIM ने 44 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के खाते में सिर्फ 2 वार्ड आए थे। इस बार के चुनाव में टीआरएस को बड़ा झटका लगा है।

 दिल्ली के स्टेडियमों को किसानों की अस्थाई जेल नहीं बनाया जाएगा। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी है और दिल्ली के स्टेडियमों को जेल बनाने से इनकार कर दिया है।दरअसल केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों पर अपना विरोध दर्ज करने कई किसान संगठन दिल्ली पहुंच रहे हैं। पुलिस प्रदर्शनकारी किसानों को गिरफ्तार कर स्टेडियमों में रखना चाहती थी। दिल्ली सरकार में गृहमंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा, किसानों की मांग जायज है।केंद्र सरकार को किसानों की मांगे तुरंत माननी चाहिए। किसानों को जेल में डालना इसका समाधान नहीं है। किसानों का आंदोलन बिल्कुल अहिंसक है। अहिंसक तरीके से प्रदर्शन करना हर भारतीय का अधिकार है। इसके लिए उन्हें जेल में नहीं डाला जा सकता। इसलिए पुलिस द्वारा स्टेडियम को जेल बनाने की मांग नामंजूर की जाती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली आने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों के प्रति अपना समर्थन जताया है।मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानून किसान विरोधी हैं। ये कानून वापिस लेने की बजाय किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है, उन पर वॉटर कैनन चलाई जा रही हैं। किसानों पर ये जुल्म बिलकुल गलत है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन उनका संवैधानिक अधिकार है।दरअसल, बड़ी संख्या में हरियाणा और पंजाब के किसान दिल्ली बॉर्डर पर हैं। ये किसान राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करना चाहते हैं। किसानों को प्रदर्शन करने से रोकने के लिए, पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर में दिल्ली के 9 अलग अलग स्टेडियमों में रखना चाहती थी, लेकिन दिल्ली सरकार स्टेडियमों को अस्थाई जेल में तब्दील करने से इनकार कर दिया है।