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बिहार (27)

17 वीं विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायकों को आज सदन के सदस्यता की शपथ दिलाई जा रही है, लेकिन सदस्यता की शपथ के दौरान आज एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल इमान ने आपत्ति जताते हुए थोड़ी देर के लिए सदन में अजीबोगरीब स्थिति पैदा कर दी. दरअसल और से एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल इमान का नाम जैसे ही सदस्यता की शपथ के लिए पुकारा गया वैसे ही उन्होंने खड़े होकर हिंदुस्तान शब्द पर आपत्ति जता दी. अख्तरुल इमान को उर्दू भाषा में शपथ लेनी थी लेकिन उर्दू में भारत की जगह हिंदुस्तान शब्द के इस्तेमाल पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए प्रोटेम स्पीकर से भारत शब्द का इस्तेमाल करने की गुजारिश की.एआईएमआईएम के विधायक ने कहा कि हिंदी भाषा में भारत के संविधान की शपथ ली जाती है. मैथिली में भी हिन्दुस्तान की जगह भारत शब्द का ही इस्तेमाल किया जाता है लेकिन उर्दू में जो शपथ लेने के लिए जो पत्र मुहैया कराया गया है उसमें भारत की जगह हिंदुस्तान शब्द का इस्तेमाल किया गया है. विधायक ने कहा कि वह भारत के संविधान की शपथ लेना चाहते हैं ना कि हिंदुस्तान की संविधान की.

 प्रोटेम स्पीकर ने जताया एतराज

 विधायक की बात सुन शपथ दिला रहे प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी भी हैरान हो गए. जीतन राम मांझी ने कहा कि यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है. हिंदुस्तान शब्द का इस्तेमाल बहुत पहले से ही होता आ रहा है, लेकिन इसका विधायक पर कोई असर नहीं पड़ा वह अपने बात पर अडे रहे. इससे बाकी विधायक भी हैरान हो गए

17 वीं विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायकों को आज सदन के सदस्यता की शपथ दिलाई जा रही है, लेकिन सदस्यता की शपथ के दौरान आज एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल इमान ने आपत्ति जताते हुए थोड़ी देर के लिए सदन में अजीबोगरीब स्थिति पैदा कर दी. दरअसल और से एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल इमान का नाम जैसे ही सदस्यता की शपथ के लिए पुकारा गया वैसे ही उन्होंने खड़े होकर हिंदुस्तान शब्द पर आपत्ति जता दी. अख्तरुल इमान को उर्दू भाषा में शपथ लेनी थी लेकिन उर्दू में भारत की जगह हिंदुस्तान शब्द के इस्तेमाल पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए प्रोटेम स्पीकर से भारत शब्द का इस्तेमाल करने की गुजारिश की.एआईएमआईएम के विधायक ने कहा कि हिंदी भाषा में भारत के संविधान की शपथ ली जाती है. मैथिली में भी हिन्दुस्तान की जगह भारत शब्द का ही इस्तेमाल किया जाता है लेकिन उर्दू में जो शपथ लेने के लिए जो पत्र मुहैया कराया गया है उसमें भारत की जगह हिंदुस्तान शब्द का इस्तेमाल किया गया है. विधायक ने कहा कि वह भारत के संविधान की शपथ लेना चाहते हैं ना कि हिंदुस्तान की संविधान की.

 प्रोटेम स्पीकर ने जताया एतराज

 विधायक की बात सुन शपथ दिला रहे प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी भी हैरान हो गए. जीतन राम मांझी ने कहा कि यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है. हिंदुस्तान शब्द का इस्तेमाल बहुत पहले से ही होता आ रहा है, लेकिन इसका विधायक पर कोई असर नहीं पड़ा वह अपने बात पर अडे रहे. इससे बाकी विधायक भी हैरान हो गए

बिहार विधानसभा चुनाव में चुनाव जीतने के बाद एनडीए को अब बिहार में सरकार गठन में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। रविवार को बिहार बीजेपी विधायक दल की मीटिंग में नीतीश कुमार को एनडीए का नेता और सीएम बनाने का एलान हुआ। बीजेपी नेताओं की मीटिंग में कुछ नेताओं ने हसरत जतायी कि राज्य में मुख्यमंत्री सीएम का होना चाहिए। हालांकि नेताओं की इन मांग पर सीनियर नेताओं ने कुछ नहीं लेकिन पार्टी जरूर इतना जरूर कहा है कि इस बार सत्ता में उनकी हिस्सेदारी पहले से कहीं अधिक रहेगी। राज्य की 243 सदस्य वाली विधानसभा में बीजेपी के 74 और जेडीयू के 43 मेंबर हैं।हालांकि बाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने हुई एनडीए की मीटिंग में नीतीश कुमार ने बीजेपी को जरूर ऑफर किया कि अगर उन्हें लगता है तो वे अपनी पार्टी से किसी को सीएम बना सकते हैं लेकिन बीजेपी ने कहा कि वही नेता बने रहेंगे। लेकिन अगले कुछ घंटे बाद बीजेपी ने साफ संकेत दे दिया कि सरकार का चेहरा जरूर नीतीश कुमार रहेंगे लेकिन इस बार बीजेपी खुद को बड़े भाई की तरह सत्ता में हिस्सेदारी रखेगी।तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी इन दो नाम को चुनने के पीछे बीजेपी की खास रणनीति दिख रही है। अगर ये दोनों मंगलवार को शपथ लेते हैं तो इसके पीछे बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग मानी जाएगी। तारकिशोर प्रसाद पिछड़ी जाति से हैं और राज्य के कटिहार सीट से पिछले तीन बार से लगातार जीत रहे हैं। कटिहार बिहार के सीमांचल इलाके से आते हैं। इस बार बिहार में कांटे के मुकाबले में एनडीए को मिली जीत के लिए सीमांचल का अहम योगदान दिया जा रहा है। ताराकिशोर को चुन कर बीजेपी यह संदेश दे सकती है कि जिस इलाके ने पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया है तो उसका खास ध्यान रखा जाएगा। साथ ही पिछड़े वोटरों के बीच भी संदेश देने की कोशिश की है। उसके अलावा रेणु देवी राज्य के बेतिया इलाके से आती है। वह बीजेपी की पुरानी नेता रही हैं। बेतिया चंपारण इलाके से आता है और यहां भी बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। शुरू से यह इलाका बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है। साथ ही महिला और अति पिछड़ा,दोनों तबका बीजेपी के लिए इस चुनाव में साइलेंट वोटर साबित हुआ है। रेणु देवी का चयन कर बीजेपी ने एक साथ दोनों तबके को एक साथ साधने की कोशिश की है।

बिहार के सरकारी अस्पतालों (Government Hospital) में लगातार इमरजेंसी सेवा का हालत खस्ता होता जा रहा है। अभी कोरोना के संक्रमण को देखते हुए लगातार मामला बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में सरकार दावा कर रही है कि सभी सरकारी अस्पतालों में हर तरह की सुविधा मुहैया करवाई जाएगी। लेकिन पेशेंट को अस्पताल जाने के बाद सुविधा के बजाय बेबस अस्पताल देखने को मिलता है। जहां सरकारी अस्पताल में मामूली इलाज के लिए सुविधाओं की कमी है, तो वहां कोरोना वायरस (Coronavirus) के मरीज की हालत मौत में धकेलने वाली बात होगी। इमरजेंसी सेवा में मरीजों को कोई सुविधा नहीं मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 30 मार्च को आईजीआईंसी में इमरजेंसी भर्ती हार्ट अटैक के पेशेंट को ऑपरेशन करना था, लेकिन सुविधा न होने के चलते लगातार टाल मटोल किया जा रहा है। इसी तरह पीएमसीएच में एक गरीब बच्चे की डायलिसिस के लिए कई चक्कर काटने पड़े। इसके बावजूद कोई सुविधा नहीं मिली। इसके चलते लाचार होकर प्राइवेट अस्पताल में डायलिसिस करवाना पड़ा। इसी तरह हादसे के शिकार हुए मासूम बच्चे को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। तीन दिन बीत गए, लेकिन अब तक कोई जांच नहीं हो पाया। ऐसा ही हाल गायनो का भी है। डॉक्टर ने गर्भवती महिला को कहा कि उसके बच्चे का पैर उल्टा है। अब तक तीन बार अल्ट्रासाउंड के लिए आ चुकी है, लेकिन अभी तक सुविधा नहीं मिल पाया। यहां तक की मरीज का कहना है कि यहां के ब्लड बैंक में बल्ड उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा यहां सिर्फ जूनियर डॉक्टर ही दिखाई देते है। ये जूनियर डॉक्टर भी कभी- कभाल आकर मरीजों को चेक कर लेते हैं।


बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली और बाकी जगहों से घर पहुंचाने के लिए लोगों के लिए की गई बस की व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि बिहार से प्रेम है तो जहां हैं, वहीं रहें। यूपी सरकार ने की है बस की व्यवस्था यूपी बॉर्डर पर फंसे लोगों को घर पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बस की व्यवस्था की है। इससे यह भी तय है कि इन लोगों में बिहार के भी कई लोग शामिल होंगे जिन्हें घर पहुंचाया जाएगा। जिससे कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ेगा। यूपी सरकार के द्वारा लोगों को घर पहुंचाने के लिए बस की व्यवस्था बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए सिर दर्द बन गई है। जिसपर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि इससे कई नए कोरोना के केस सामने आएंगे। जिससे समस्या बढ़ेगी। जिसके कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकडाउन का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। बिहार से है प्रेम, तो जहां हैं वहीं रहें नीतीश कुमार ने दूसरे राज्य में फंसे बिहार के लोगों से कहा कि अगर आपको बिहार और बिहार के लोगों से प्यार है तो जहां हैं वहीं रहें। वरना समस्या बढ़ेगी। इससे आपके जानने वाले लोगों को भी खतरा होगा। उन्होंने कहा कि अगर आप अपने दोस्तों, रिश्तेदारों को सुरक्षि्त देखना चाहते हैं तो जहां हैं वहीं रहें। उन्होंने कहा कि आप जहां हैं, वहीं आपके लिए उचित व्यवस्था की जाएगी। आप हेल्पलाइन नंबर या मुख्यमंत्री ऑफिस में फोन करके अपनी लोकेशन बताएं। जिसके बाद आपके रहने खाने की उचित व्यवस्था की जाएगी।

अरविंद केजरीवाल ने भी की गुजारिश

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली और यूपी की सरकार ने बस की व्यवस्था तो कर दी है। लेकिन मेरी अब भी सबसे यही गुजारिश है कि जहां हैं, वहीं रहें। वरना प्रधानमंत्री का लॉकडाउन फेल हो जाएगा।


देश में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के बाद अब बिहार में 31 मार्च तक सभी स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों और सिनेमा घरों को बंद करने की घोषणा की गई है। शुक्रवार को सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। सरकार ने कहा कि बंद के दौरान सरकारी स्कूलों के छात्रों को दोपहर में मिलने वाले भोजन के पैसे को उसके बैंक खाते में डाल दिया जाएगा। स्कूल, कॉलेज बंद रहेंगें लेकिन CBSE की परीक्षा जारी रहेगी। वहीं सरकार ने संबंधित अथॉरिटी से कहा है कि दूसरे स्कूलों में चल रही परीक्षाओं की तारीख को जल्द से जल्द आगे बढ़ाने पर विचार करें। इसके अलावा 22 से 24 मार्च तक आयोजित होने वाले बिहार दिवस कार्यक्रम पर रोक लगा दिया गया। बिहार से सटी नेपाल की सीमा पर कड़ी जांच करने का निर्देश दिया गया। साथ ही नेपाल से आने वाले लोगों को स्क्रीनिंग के लिए सीमा पर 24x7 डॉक्टरों की टीम तैनात रहेगी। सिनेमा घरों के अलावा म्यूजियम बंद स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थानों, सिनेमा घरों के अलावा म्यूजियम को भी बंद करने का फैसला लिया गया। ज्ञान भवन, एसके मेमोरियल हॉल और बापू सभागार समेत सभी हॉल में होने वाले कार्यक्रमों को फिलहाल के लिए रोक लगा दिया गया। साथ ही 31 मार्च तक सभी तरह के कार्यक्रमों की बुकिंग पर रोक लगा दी गई। आंगनबाड़ी केंद्रों को भी बंद रखा जाएगा। बता दें कि बिहार में 142 मरीजों को ऑब्जर्वेशन में रखा गया था। जिनमें से 73 मरीजों को छुट्टी दे दी गई। वहीं, पीएमसीएच, एसकेएमसीएच, एनएमसीएच सहित बिहार के सभी सरकारी अस्पतालों में संदिग्ध कोरोना के मरीजों की जांच की जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी भी मरीज में कोरोना वायरस नहीं पाया गया।


बिहार के सुपौल में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व नेता कन्हैया कुमार के काफिले पर पथराव किया गया। इस हमले में कन्हैया कुमार के घायल होने की खबर है। बताया जा रहा है कि अन्य लोग भी जख्मी हुए हैं। कन्हैया कुमार के काफिले पर उस समय हमला हुआ जब वे सुपौल में एक रैली को संबोधित करने के बाद सहरसा की ओर जा रहे थे। यह हमला सदर थाना के मल्लिक चौक के समीप हुआ है। हमले में एक गाड़ी का शीशा फूट गया है। पुलिस ने आरोपियों हिरासत में ले लिया है।

बिहार के सुपौल में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व नेता कन्हैया कुमार के काफिले पर पथराव किया गया। इस हमले में कन्हैया कुमार के घायल होने की खबर है। बताया जा रहा है कि अन्य लोग भी जख्मी हुए हैं। कन्हैया कुमार के काफिले पर उस समय हमला हुआ जब वे सुपौल में एक रैली को संबोधित करने के बाद सहरसा की ओर जा रहे थे। यह हमला सदर थाना के मल्लिक चौक के समीप हुआ है। हमले में एक गाड़ी का शीशा फूट गया है। पुलिस ने आरोपियों हिरासत में ले लिया है।

बिहार के सुपौल में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व नेता कन्हैया कुमार के काफिले पर पथराव किया गया। इस हमले में कन्हैया कुमार के घायल होने की खबर है। बताया जा रहा है कि अन्य लोग भी जख्मी हुए हैं। कन्हैया कुमार के काफिले पर उस समय हमला हुआ जब वे सुपौल में एक रैली को संबोधित करने के बाद सहरसा की ओर जा रहे थे। यह हमला सदर थाना के मल्लिक चौक के समीप हुआ है। हमले में एक गाड़ी का शीशा फूट गया है। पुलिस ने आरोपियों हिरासत में ले लिया है।

बिहार के सारण में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। जहां आपसी दुश्मनी निकालने के लिए मासूम बच्चे को मौत के घाट उतार दिया। गुरुवार को मासूम के शव घर से थोड़ी दूर पर खेत में पड़ा मिला। साथ ही उसके सिर के बाल मूंड दिए और कान भी काट दिया गया था। गांव वालों की जानकारी पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। वहीं पुलिस गांव के ही पड़ोसी को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है। हालांकि अब तक हत्या के पीछे का कारण पता नहीं चल पाया है। जानकारी के मुताबिक बच्चे के लापता होने से दो दिन पहले ही मृतक के परिजन से किसी पड़ोसी महिला का झगड़ा हो गया था। जिस पर पड़ोस की महिला ने धमकी दी थी कि इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। जिसके दो दिन बाद ही बच्चा घर से लापता हो गया था। वहीं पुलिस, शक के आधार पर पड़ोसी महिला को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। 

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