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जम्मू और कश्मीर
जम्मू और कश्मीर

जम्मू और कश्मीर (2)

एक न्यूज एजेंसी के साथ बातचीत में कहा कि ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है कि लोग गुस्सा न हों और बंदूक न उठाएं। प्रशासन को सख्त हिदायत दी गई है ताकि आम नागरिकों के साथ न तो किसी प्रकार की ज्यादती हो और न ही अन्याय। सेना, पुलिस तथा सुरक्षाबलों को मुठभेड़ के दौरान अधिकतम संयम बरतने की हिदायत दी गई है। हालांकि, उन्होंने लोगों से भी मुठभेड़स्थल से दूर रहने को कहा।

 

राज्यपाल ने कहा कि यदि कहीं गोली चलती है या फिर बम चलता है तो जवाब देना बाध्यता है। यह आसान है। गोली चलाओगे तो गोली चलेगी, कोई गुलदस्ता तो मिलेगा नहीं। वर्ष 2019 में आने वाले दो चुनावों को देखते हुए उन्होंने नेताओं से भी अपील की कि वे लोगों को समझाएं कि मुठभेड़ स्थल तक भागकर न जाएं ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हों।

 

ज्यादा लोगों तक पहुंच का संकल्प

आम जनता तक और अधिक पहुंच बढ़ाए जाने का नए साल का संकल्प लिया है। यह साल रियासत के लोगों तक ज्यादा से ज्यादा पहुंच बनाने का वर्ष है। खासकर घाटी के युवाओं के बीच। इस वजह से उन्होंने पदभार संभालने के बाद से राजभवन के दरवाजे खोल दिए हैं।

आईएएस अधिकारी शाह फैसल के इस्तीफे पर मलिक ने कहा कि वह खुद ही सरकारी कर्मचारी थे और इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। चुनाव आयोग ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव अगले छह महीने के भीतर आयोजित किया जाएगा।

 

यहां तक कि आयोग ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राज्य के विधानसभा चुनाव आयोजित कराने की संभावना से भी इनकार नहीं किया था। तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त ओ. पी. रावत ने कहा था, ‘जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव मई से पहले आयोजित कराना चाहिए। इसे संसदीय चुनाव से पहले भी कराया जा सकता है।' उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने पिछले साल 28 दिसंबर को लोकसभा में कहा था कि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के पास राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि कोई भी पार्टी या गठबंधन सरकार बनाने का दावा करने के लिए सामने नहीं आए थे। मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि विधानसभा चुनाव ‘जल्द से जल्द’ आयोजित होने चाहिए।