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Monday, 22 June 2020 16:42

गुप्त नवरात्रि का पर्व तंत्र साधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है

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22 जून, सोमवार से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, और 1 जुलाई 2020, बुधवार को इसकी समाप्ति होगी। इस नवरात्रि में विशेष प्रकार की इच्छापूर्ति और सिद्धि पाने के लिए पूजा एवं अनुष्ठान किए जाते हैं। तो यदि आप इस पूजा को और भी अधिक सफल बनाना चाहते हैं और जीवन में चल रही समस्याओं का समाधान चाहते हैं, गुप्त नवरात्रि का पर्व तंत्र साधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा माना जाता है कि  जब भगवान विष्णु शयनकाल की अवधि के बीच रहते हैं, तब देवताओं की शक्तियां कमजोर पड़ने लगती हैं और पृथ्वी पर वरुण, यम आदि का प्रकोप बढ़ने लग जाता है। इन विपदाओं से बचाने के लिए ही गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा की जाती है। इन दिनों में देवी दुर्गा की पूजा करने से बहुत लाभ भी मिलता है। साधक चमत्कारी शक्तियों को पाने के लिए गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त सिद्धियों को अंजाम देते हैं। लोग किसी खास मनोकामना की प्राप्ति के लिए तंत्र साधना और अनेक उपाय करते हुए देवी को प्रसन्न करने कोशिश करते हैं। इस दौरान दुर्गा सप्तशती पाठ, दुर्गा चालीसा और दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ करना काफी फलदायी माना गया है। गुप्त नवरात्रि न केवल चमत्कारी शक्तियों, बल्कि धन, संतान सुख और शत्रु से मुक्ति दिलाने में भी कारगर है।

 

 किन देवियों की करते हैं पूजा?

गुप्त नवरात्रि में प्रलय व् संहार के देवता कहे जाने वाले महादेव और मां काली की पूजा करने का विधान है। गुप्त नवरात्रि में निम्नलिखित 10 देवियों की पूजा की जाती है। 

 माँ काली 

भुनेश्वरी माता 

त्रिपुर सुंदरी 

छिन्न माता 

बगलामुखी देवी 

कमला देवी 

त्रिपुर भैरवी माता 

धुमावती माँ 

मातंगी 

गुप्त नवरात्रि का महत्व 

भागवत पुराण के अनुसार साल में आने वाली 2 गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। यह नवरात्रि विशेषतौर पर तांत्रिक कियाएं, शक्ति साधनाएं, महाकाल आदि से संबंध रखने वाले लोगों के लिए खास महत्व रखती है। इस नवरात्रि में देवी भगवती के भक्त कठिन नियमों का पालन करते हुए व्रत और साधना करते हैं। लोग इस दौरान लंबी साधना कर के दुर्लभ शक्तियों को प्राप्त करने की कोशिश करते हैं।

 ऐसे करें गुप्त नवरात्रि में देवी की पूजा  

अन्य नवरात्रि की तरह ही गुप्त नवरात्रि में भी व्रत, पूजा-पाठ, उपवास किया जाता है। प्रतिपदा से नवमी तक उपवास रखा जाता है और सुबह-शाम पूजा की जाती है। 

 गुप्त नवरात्रि में नौ दिनों के लिए आप कलश की स्थापना कर सकते हैं।   

यदि कलशस्थापना की हुई है, तो सुबह और शाम दोनों समय में अच्छे से स्नान करके साफ़ वस्त्र पहन लें। 

अब माता की फल, फूल, धुप, दीप आदि से विधिवत पूजा करें।  ध्यान रहे कि माँ के लिए सबसे उत्तम है लाल रंग का फूल। 

भूलकर भी पूजा में मां को आक, मदार, दूब व् तुलसी न चढ़ाएं। 

इसके बाद माता की आरती करें। इस दौरान मंत्र जाप, चालीसा या सप्तशती का पाठ करना काफी फलदायी माना गया है। 

दोनों समय मां को भोग भी लगायें। यदि आप साधारण तरीके से पूजा कर रहे हैं, तो सबसे देवी के लिए उत्तम भोग है लौंग और बताशा। 

देवी के सामने एक बड़ा घी का एकमुखी दीपक हमेशा जलाकर रखें। 

विशेष इच्छापूर्ति के लिए गुप्त नवरात्रि में सुबह और शाम मां के “ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाय विच्चे” मंत्र का 108 बार जाप ज़रूर करें 

पूरे नौ दिन तक अपना खान पान सात्विक रखें। 

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