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Monday, 11 February 2019 09:57

जानिये क्या होती है प्ली बारगेनिंग

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हमारे कोर्ट में हजारो केस लंबित रहते हैं|मुकदमे लड़ते-लड़ते लोग बूढ़े हो जाते हैं और कई बार फैसले के इन्तजार में दुनिया से चले भी जाते हैं| असल में ये कोर्ट में केसों के भारी दबाव के कारण होता है| ऐसे में कुछ केसों में उन लोगो के पास एक कानूनी उपचार होता है जो लोग अपने केस को जल्द से जल्द ख़त्म करना चाहते हैं| कई बात ऐसा होता है कि व्यक्ति अनवांटेड सिचुएशन में फंस कर या अनजाने में अपराध करबैठता है|इस तरह की सिचुएशन में अगर किसी को सजा हो जाए तो इसे प्ली बारगेनिंग के माध्यम से कम करवाया जा सकता है| इस लेख में हम आपको बताएँगे किPlea bargainingक्या होती है और इसकी सजा क्या होती है|

प्ली बारगेनिंग में अपराधी शिकायतकर्ता से समझौता करके अपने अपराध को कोर्ट के सामने स्वीकार करता है और अपने लिए सजा कम करने की मांग करता है| ये समझौताअदालत की देखरेख में होता है। और इसकी बिनाह पर आरोपी की सजा उस केस की न्यूनतम सजा से आधी या उससे भी कम कर दी जाती है।Plea Bargaining का फ़ायदा उन केसेस में होता हैं जहाँ गलती या आवेश में अपराध हो जाता है| तो ऐसे में अपराधी Plea Bargaining का सहारा ले सकता है|

इससे समाज में सामजस्य और सह्रदयता का वातावरण भी बनता है|Plea Bargainingका फ़ायदा ये होता है कि दोनों पक्ष लम्बी कानूनी प्रक्रिया से बच जाते हैं इसमे दो से तीन तारीख में ही केस का निपटारा कर दिया जाता है| लेकिन इसमे एक बात जरूरी है कि अभियुक्त पर पुलिस या कोर्ट द्वारा ऐसी धारा नहीं लगाई हो जिसमे सजा सात साल से ज्यादा हो या मृत्यु दंड हो| यदि ऐसा है तो ऐसी सिचुएशन में 265 A (1) A लागु नहीं होगी|

अब जान लेते हैं कि किन-किन केसेस में प्लीबारगेनिंग लागू हो सकता है|265 A के अनुसार अगर अपराध देश की समाजिक और आर्धिक दशा पर प्रभाव डालता है या फिर किसी महिला या 14 वर्ष या इससे कम उम्र के बच्चे से सम्बन्धित है तो उसमे प्ली बारगेनिंग काम नही करता|समाजिक व आर्धिक अपराध कौन.कौन से है इसके लिए विवरण केंद्र सरकार अपनी अधिसूचना डालती है |

Plea bargaining में शिकायतकर्ता की मंजूरी भी आवश्यक है| शिकायतकर्ता की सहमती के बिना Plea bargaining नही हो सकती है|

Plea bargaining सिर्फ एक ही केस में हो सकती है|लेकिन अगर केस एक ही व्यक्ति से सम्बन्धित है यानी शिकायतकर्ता एक ही है तो ज्यादा में भी हो सकती है|

धारा 265B के अनुसार कोई भी सजायाफ्ता मुजरिम जिसे पहले कभी भी कोर्ट से सजा मिली है वो Plea bargaining के आवेदन का लाभ नही ले सकता है|

प्ली बार्गेनिग में पार्ट-B भी है जिसके अनुसार यानी की धारा 265A (1) b के अनुसार अगर केस एक complaint case है और मजिस्ट्रेट ने धारा 200 CRPC में भी संज्ञान लिया हुआ है और सजा 7साल से ज्यादा है या मृत्युदंड या आजीवन कारावास भी है, तो भी इस परिस्तिथि में plea bargaining में आवेदन सम्भव है|

अब एक और इम्पोर्टेंट सवाल आता है कि प्ली बारगेनिंग केस की किस स्टेज पर हो सकती है| तो इसका जवाब है कि ट्रायल कोर्ट में पुलिस की चार्जशीट फाइल करने बाद से लेकर कोर्ट का जजमेंट आने से पहले किसी भी स्टेज पर आप इस आवेदन का लाभ ले सकते है| आप अपने जीवन में प्ली बारगेनिंग का आवेदन सिर्फ एक बार ही कर सकते है| तो ये थी प्ली बारगेनिंग के बारे में जानकारी जो कि उन लोगो के लिए लाभदायक हैं जो नेचर से अपराधी नहीं हैं, जो सुधारना चाहते हैं|

Read 13 times Last modified on Friday, 15 February 2019 10:01