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Friday, 01 March 2019 10:02

क्या होता है एफिडेविट

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आमतौर पर हमें कभी ना कभी किसी ना किसी चीज के लिए ऐफिडेविट यानी हलफनामा बनवाना पड़ता है। इस लेख में आज हम आपको बताएँगे कि ये हलफनामा क्या होता है इसकी कानून की नजर में क्या वैल्यू होती है और अगर कोइ हलफनामे में गलत जानकारी दे तो उसके क्या परिणाम होते हैं|साथ ही ये भी बताएँगे कि हलफनामा कैसे बनवाते हैं और ये कितने तरह का होता है|

शपथपत्र या हलफनामा

शपथपत्र या हलफनामा एक लिखित तथ्यात्मक घोषणा होती है जो किसी व्यक्ति द्वारा,  बिना किसी दबाव में,  यानी अपनी मर्जी से की जाती है|  इसके लिए नोटरी पब्लिक या फिर ओथ कमिश्नर आदि के सामने शपथ ली जाती है और बयान दिया जाता है। उस बयान को अधिकारी अटेस्टेड करता है। इसके बाद ऐफिडेविट का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐफिडेविट के प्रकार

ऐफिडेविट तीन प्रकार के होते है|पहला ऐफिडेविट वो है जो की जो कि की हम किसी सरकारी कार्यालय या गैर सरकारी कर्यालय में शपथ के रूप में देते है सरकारी कार्यालय या गैर सरकारी कर्यालय में देने वाले ऐफिडेविट शादी के लिए,  जन्म राशन कार्ड, व अन्य से सम्बन्धित होते है|

दूसरा ऐफिडेविट वो है जो हम कोर्ट में देते है ये ऐफिडेविट भी दो प्रकार के होते है इसमें कोर्ट के आदेश के अनुसार व्यक्ति को अपने बयान को लिख कर देना  होता  है

इसमे पहला ऐफिडेविट जो  कोर्ट में एविडेंस यानि गवाही के रूप में दिया जाता है ये ज्यादातर चेक बौंसिंग के केस या सिविल केस में दिया जाता है ये साधारण ऐफिडेविट जैसा ही होता है पर उपर कोर्ट का नाम होता है तथा इसे नये केस या एप्लीकेशन के साथ कोर्ट में दिया जाता है |

दूसरा ऐफिडेविट वो है जो कोर्ट में गवाही के लिए दिया जाता है इस ऐफिडेविट में व्यक्ति अपनी कोर्ट की गवाही की बाते लिखता है तथा इसके उपर सिर्फ ऐफिडेविट की जगह “एविडेंसबीदवेऑफऐफिडेविट“evidence to be way of affidavit ”लिखाजाताहै|येसभीकोर्टमेंचलतेहै|

तीसरा ऐफिडेविट वो है जो की हलफनामे के नाम से सिर्फ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दिया जाता है इसमे व्यक्ति अपनी कहने वाली बात को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लिख कर देता है |

अब ये जानान भी जरूरी है आखिर ऐफिडेविट का उदेश्य क्या होता है| हम ऐफिडेविट क्यों देते हैं|

ऐफिडेविट का उदेश्य अपनी किसी बात को शब्दों में लिख कर किसी सरकारी या गैर सरकारी अधिकारी या कोर्ट के समक्ष लिखित में ये कहने से हैकि वह व्यक्ति अपने या किसी दुसरे या किसी के बिहाफ पर जो कह रहा है वह पूर्ण सत्य है तथा उसे सच मान कर उसके लिए कार्यवाही की जाये| और इस ओथ एक्ट 1969 के तहत यह तय है कि जो भी बयान ऐफिडेविट में दिया गया है, वह सच है।

जैसा कि पहले बताया ऐफिडेविट का इस्तेमाल कोर्ट में भी हो सकता है और अर्द्धन्यायिक संस्था (कमीशन आदि) या किसी दूसरी अथॉरिटी (एमसीडी, डीडीए आदि) के सामने भी हो सकता है।

ऐफिडेविट की भाषा

ऐफिडेविट हिंदी , इंग्लिश या अपने राज्य की भाषा में बनवा सकते है लेकिन हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में ऐफिडेविट इंग्लिश में ही दिया जाता है या फिर आप कोर्ट की परमिशन से अपने राज्य की भाषा में दे सकते है|

ऐफिडेविट बनता कैसे है

ऐफिडेविट में सबसे पहले उसकी हेडिंग लिखे जैसे कि जन्म प्रमाण पत्र के लिए ऐफिडेविट बनवाना है तो “ऐफिडेविट फॉर नेम चेंज” या सिर्फ “ऐफिडेविट” भी लिख सकते है |

इसके बाद ऐफिडेविट में अपना नाम, उम्र, व पता लिखे

अगर ऐफिडेविट किसी के बिहाफ पर है तो उसका विवरण दे जैसे अगर आपके बच्चे के लिए है तो आपने बच्चे के नाम, लिंग, उम्र, व उससे अपने सम्बन्ध का विवरण दे |

इसके बाद मूल बात लिखे की आप ये ऐफिडेविट क्यों बनवाना चाहते है जैसे कि आप अपने बच्चे का नाम बदल कर दूसरा रखना चाहते हैं या ऐफिडेविट आपके बच्चे की उम्र व जन्म तिथि से सम्बन्धित है तो अपने बच्चे की जो उम्र या जन्म तिथि आप चाहते है उसका विवरण दे और बताये की सही उम्र या जन्म तिथि क्या होनी चाहिए |

और अगर इसमें कोई और जरूरी बात भी लिखने की है तो वो भी लिखे जैसे कि अभी तक जन्म प्रमाण पत्र क्यों नही बन सका या नाम में परिवर्तन क्यों चाहते हैं|

इसके बाद शपथ आती है इसमे आप लिखते है की उपर दी गई सारी बाते सत्य है सत्य के अलावा कुछ नही है| इसके बाद आप अपने दस्तखत करते है

अंत में कार्य उस ऐफिडेविट को रजिस्टर्ड करवाने का होता है जो आप ओथ कमिश्नर या नोटरी पब्लिक अटेस्टेड करवाते है।

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