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Monday, 18 March 2019 10:04

डिफेमेशन यानि मान हानि क्या होती है

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कई बार ऐसा होता है कि कोइ व्यक्ति किसी के खिलाफ ऐसी बात कह देता है या टिप्पणी कर देता है जिससे किसी का नाम खराब होजाता हैया समाज में उसकी प्रतिष्ठा यानी सम्मान की हानि होती है| तो ऐसे में व्यक्ति के पास क्या उपाय है? वो व्यक्ति मानहानी का केस कर सकता है| आइये जानते हैं क्या है मानहानी और इसके लिए कोर्ट में केस कैसे किया जाता है|

भारतीय दंड संहिता यानी आई पी सी की धारा 499CR.P.C के अनुसार-किसी के बारे में बुरी बातें बोलना, लोगों को अपमानजनक पत्र भेजना, किसी की प्रतिष्ठा गिराने वाली अफवाह फैलाना, अपमानजनक टिप्पणी प्रकाशित या प्रसारित करना डिफेमेशन यानि मानहानि माना जा सकता है।

थोड़ा और विस्तार से जानते हैं कानून में मानहानि किन बातो को माना गया है-

मृत व्यक्ति को कोई ऐसा लांछन लगाना जो उस व्यक्ति की ख्याति को नुकसान पहुंचाता हो। औरउसके परिवार या निकट संबंधियों की भावनाओं को चोट पहुंचाता हो।
किसी कंपनी, संगठन या व्यक्तियों के समूह के बारे में भी यही बात लागू होती है|
किसी व्यक्ति पर व्यंग्य के रुप में कही गयी बातें भी मानहानि के अंदर आती हैं।
मानहानिकारक बात को छापना या बेचना भी defamation यानी कि मानहानि होता है
कब नहीं होती मानहानि

लेकिन हाँ ये भी सच है कि सच्ची टिप्पणी मानहानि के अंतर्गत नहीं आती है| मान लीजिये| किसी व्यक्ति के बारे में अगर सच्ची टिप्पणी की गयी हो और वह सार्वजनिक हित में किसी भी फेमस या पब्लिक फिगर के सार्वजनिक आचरण के बारे में होया फिर उसके या दूसरों के या समाज हित में हो, लोगों की भलाई को ध्यान में रखते हुए उन्हें आगाह करने के लिए हो तो इसे मानहानि नहीं माना जाता है।

मानहानि के लिए कार्यवाही

ये तो हुई मानहानि की बात अब जानते हैं कि मानहानि के लिए कार्यवाही क्या होती है|कोइ भी व्यक्ति जिसकी मानहानि की गयी हो वो section 499 cr.p.c.के तहत मानहानि करने वाले व्यक्ति या उसमे शामिल समूह या व्यक्तियों पर आपराधिक मुकदमा चलाकर उन्हें कोर्ट से सजा दिलवा सकता है।यदि मानहानि से किसी व्यक्ति की या उसके व्यवसाय की या दोनों को कोई वास्तविक हानि हुई है तो उसका हर्जाना प्राप्त करने के लिए कोर्ट में दीवानी दावा पेश किया जा सकता है और हर्जाना प्राप्त किया जा सकता है।

कैसे करें शिकायत

अब जानते हैं कि इसकी शिकायत कसे की जाती है|मानहानि करने वाले के खिलाफsection 499 cr.p.c. के तहत मुकदमा दर्ज कराने के लिए दस्तावेजों के साथ सक्षम कोर्ट (सक्षम क्षेत्राधिकारी के न्यायालय)में लिखित शिकायत करनी होती है। न्यायालय शिकायत पेश करने वाले का बयान दर्ज करेगा| अगर आवश्यकता हुई तो उसके एक.दो साथियों के भी बयान दर्ज करेगा। इन बयानों के आधार पर यदि न्यायालय समझता है कि मुकदमा दर्ज करने का पर्याप्त आधार उपलब्ध है तो वह मुकदमा दर्ज कर अभियुक्तों को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए समन जारी करेगा।

आपराधिक मामले में छोटी सी फीस न्यायालय शुल्क की रूप में देनी होती है । वहीं हर्जाने के दावे में जितना हर्जाना मांगा गया है, उसके 5 से 7.50 फीसदी के लगभग न्यायालय शुल्क देना पड़ता है। जिसकी दर अलग.अलग राज्यों में अलग.अलग है।मानहानि के मामले में वादी को केवल यह सिद्ध करना होता है कि टिप्पणी अपमानजनक थी और सार्वजनिक रुप से की गयी थी। उस यह सिद्ध करने की जरुरत नहीं है कि टिप्पणी झूठी थी। बचाव पक्ष को ही यह साबित करना होता है कि वादी के खिलाफ उसने जो टिप्पणी की थी वह सही थी ।

मानहानिकेलिएसजा :-   

सेक्शन 499 cr.p.c सिर्फ मानहानि की परिभाषा बताता है| यह बताता है कि मानहानि क्या होती है व कितने प्रकार की हो सकती है पर इसमें सजा का प्रावधान धारा 500 cr.p.c.में है इसके अनुसार जो भी कोई व्यक्ति ऐसा अपराध करेगा वो दो साल के कारावास व जुर्माने व या दोनो की सजा भुगतेगा इसके अलावा वह कोर्ट में अगर कोई मानहानि के लिए भी केस डालता है तो वो जुरमाना भी उसे मिलेगा|

दुर्भावनापूर्ण अभियोजन से बचाव

अगर किसी निर्दोष व्यक्ति को अभियुक्त बना दिया जाय और वह सिद्ध कर सके कि उसे बदनाम या ब्लैकमेल करने जैसे बुरे इरादे से उसके खिलाफ मुकदमा लगाया गया है तो उलटे वो अदालत में मामला दर्ज कर मुआवजा मांग सकता है। यह दावा आर्धिक तथा मानसिक दोनों प्रकार की चोट की भरपाई के लिए हो सकता है।अगर किसी व्यक्ति को बुरे इरादे से सिविल मुकदमें में फंसाया जाय तो वह मामला दर्ज कर मुआवजे की मांग कर सकता है।

तो ये थे मानहानि से जुडी कुछ जानकारी अगर आपको किसी दूसरे विषय पर कानूनी जानकारी चाहिए तो आप हमें कमेन्ट बोक्स में लिख कर भेज सकते हैं|

Read 19 times Last modified on Saturday, 09 January 2021 07:22