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Tuesday, 21 May 2019 11:17

न्याय पंचायत क्या है और इस का क्षेत्राधिकार क्या है

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आपने अक्सर नगर पंचायत के बारे में सुना होगा मगर आपने ग्राम पंचायत के बारे में कम सुना होगा आज हम आपको न्याय पंचायत के बारे में बताएँगे कि न्याय पंचायत क्या होता है? और न्याय पंचायत के अधिकार क्षेत्र क्या होते हैं? गाँवों में न्याय पंचायत का बहुत महत्त्व है।अगर आप कपल हैं तो ये आपके लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि आप जहां रहते हैं ये वहां काम करती है| इस लेख में हम आपको बताएँगे कि न्याय पंचायत क्या होती है उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 के अंतर्गत न्याय पंचायत क्या है? और न्याय पंचायत का क्षेत्राधिकार कहाँ तक है?


न्याय पंचायत क्या है?


न्याय पंचायत जो कि ग्राम स्तर पर होने वाले विवादों के निपटारा करने वाली एक प्रणाली है. इसका कार्य प्रकृतिक न्याय के सिद्धांत के अंतर्गत न्याय करना है। इस न्याय पंचायत में दीवानी के साथ साथ फौजदारी यानी क्रिमिनल मैटर को भी देखा जाता है| इसमे ख़ास बात यह है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम धारा की 42 में न्याय पंचायत की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत राज्य सरकार या कोइ भी विहित उनके अंर्तगत आने वाले प्राधिकारी होंगे जिलों को मंडल में विभाजित करेगा, और हर एक मंडल ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र में उतने ग्राम सम्मिलित होंगे जितने इष्टकर हो, राज्य सरकार या विहित प्राधिकारी हर एक के मंडल के लिए एक न्याय पंचायत की स्थापना करेगा। लेकिन यहाँ एक निर्बन्धन भी है कि हर एक ग्राम पंचायत के क्षेत्र जहाँ तक संभव है परस्पर एक दूसरे से जुड़े रहेंगे।


दूसरी मुख्य बात है कि अधिनियम के तहत हर एक न्याय पंचायत के कम से कम 10 सदस्य या अधिक से अधिक 25 सदस्य होंगे जो निर्धारित किये जायेंगे, लेकिन न्याय पंचायत के लिए यह वैध होगा कि उनके सदस्यों के किसी स्थान के रिक्त (खाली) होते हुए भी न्याय पंचायत अपना काम करती रहे,
लेकिन यहाँ भी एक निर्बन्धन है कि जब तक उसके पंचो की संख्या जो है उसकी दो तिहाई संख्या से कम नही होनी चाहिए। इस लेख में हम आपको 5 बिंदुओं से समझाने की कोशिश करेंगे जिससे आपको न्याय पंचायत के बारे में आसानी से समझ आ जाएगा|


पहला बिन्दु यह है कि न्याय पंचायत को ग्राम पंचायत की न्यायपालिका कहा जाता है, क्योकि यह न्याय का कार्य करती है, गाँव में होने वाले विवादों का पक्षपात किये बिना निपटारा करती है। दूसरा न्याय पंचायत में एक सरपंच और उपसरपंच होते है। तीसरा न्याय पंचायत में कम से कम 10 या अधिक से अधिक 25 तक सदस्य होते है। चौथा न्याय पंचायत पचो का कार्यकाल 5 वर्ष के लिए होता है। और पांचवा न्यायपंचायत को दीवानी और छोटे फौजदारी यानी क्रिमिनल मुकदमे होते हैं उनको सुनने का अधिकार है।


आइये जानते हैं न्याय पंचों की नियुक्ति कैसे होती है।


उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम धारा 43 के तहत न्याय पंचायत के पंचो की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत ग्राम पंचायत के सदस्यों में से विहित प्राधिकारी जितने की नियत किये जाये, न्याय पंचायत के पंच नियुक्त करेगा और इसके बाद इस प्रकर जो व्यक्ति पंच के लिए नियुक्त किये जायेंगे, वे सस्दय ग्राम पंचायत के सस्दय नहीं रहेंगे और ग्राम पंचायत उनके स्थान, जहाँ तक कि संभव हो, उस रिक्त स्थान को उसी तरीके से भरे जाएंगे जो कि अधिनियम 12 में दिया गया है।


न्याय पंचायत का स्थानीय क्षेत्राधिकार कहाँ यहाँ भी आपके लिए जानना बेहद जरूरी है ?


उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम धारा 51 में न्याय पंचायत की उस स्थानीय अधिकारिता का उल्लेख किया गया है जिसके अंतर्गत दीवानी और फौजदारी के मुक़दमे दाखिल किये जाते है जैसे कि:दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में यानी IPC 1973 किसी बात के होते हुए भी, फौजदारी का ऐसा हर एक मुकदमा जो कि न्याय पंचायत के द्वारा विचार किया जा सकता है, वो न्ह्याय पंचायत जो क्षेत्राधिकार होता है वो भी आपको बताया है| तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि अगर आप किसी गाँव में रहते हैं तो वहां पर ग्राम पंचायत हैं आपको क्षेत्राधिकार के बारे में भी जानकारी दी गयी| और सामान्य प्रकृति के जो अपराध होते हैं चाहे वो सिविल प्रकृति के हों या क्रिमिनल के हों वो सभी न्याय पंचायत के अंर्तगत आते हैं जिसको हम देखते हैं कि अगर कोइ विवाद हो जाए तो पांचो के माध्यम से भी उसका समाधान किया जाता है| वो पञ्च और जो पंचायत होती है वो न्याय पंचायत का कार्य करती है| तो इस लेख के माध्यम से यह बताने का प्रयास था कि जहां आप रहते हिं वहां न्याय पंचायत किस प्रकार से कार्य करता है| कभी अगले लेख में हम आपको बताएँगे कि न्याय पंचायत IPC और CPC की कौन से सेक्शन को कवर करती है और उस पर भी अपने फैसले दे सकती है|

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