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Monday, 03 June 2019 10:14

सेल्फ डिफेन्स क्या होता है और क्या हैं कानून

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आपने अक्सर एक शब्द सुना होगा| सेल्फ डिफेन्स| कहा जाता है कि अगर सेल्फ डिफेन्स यानी की आत्म रक्षा में किसी का मर्डर भी हो जाए तो उस व्यक्ति पर हत्यारे की तरह मुकदमा नहीं चलता बल्कि बहुत सारी परिस्थितियों-स्थितियों का आंकलन किया जाता है तब उसकी सजा पर विचार किया जाता है|इस लेख में हम इसी पर बात करेंगे| सेल्फ डिफेन्स क्या है और अगर सेल्फ डिफेन्स में कोइ अपराध हो जाए तो इसे अदालत में कैसे साबित करे|

लेकिन पहले आप जानना चाहेंगे कि कानून की नजर में आत्म रक्षा क्या है|.....जब किसी व्यक्ति की जान खतरे में हो और उसे लगे की अमुक व्यक्ति उसे जान से मार ही देगा और उसके पास हथियार भी हो तो वो उससे बचने के लिए उस पर हमला करना आत्मरक्षा है ऐसा भी होता है की सामने वाला व्यक्ति ज्यादा ताकतवर है तो उससे लड़ने के लिए किसी हथियार का उपयोग भी आत्मरक्षा माना जाता है|

भारतीय दंड संहिता की धारा 96 से लेकर 106 तक की धारा में सभी व्यक्तियों को सेल्फ डिफेन्स यानी  आत्मरक्षा का अधिकार दिया गया है। इन धाराओ में व्यक्ति से अपनी जान यासम्पत्ति बचाने या दूसरे किसी की जान बचाने के दौरान कोइ अपराध हो जाता है तो वो सेल्फ डिफेन्स में आता है|लेकिन हाँ दूसरे की सम्पत्ति बचाने के मामले में यह नियम लागू नहीं होता| आत्मा रक्षा कानून का लाभ तब तक नहीं मिल सकता जब तक कि व्यक्ति ये साबित ना कर दे कि उसने जो एक्शन लिया वो उसकी जान व माल की रक्षा के लिए अपरिहार्य था|इसमे एक और चीज है यदि कोइ मानसिक रूप से कमजोर या पागल व्यक्ति है उसके हाथो अपराध हो जाए तो वहा भी सेल्फ डिफेन्स के अन्दर आता है|सेल्फ डिफेन्स मे सजा या तो नरमी रख कर दी जाती है या माफ भी कर दी जाती है|

आत्मरक्षा को साबित करने की जिम्मेदारी अभियुक्त की होती है कि वह तथ्यों व परिस्थितियों के द्वारा ये साबित करे कि उसने ये काम आत्मरक्षा में किया है। यदि व्यक्ति इस अधिकार का उपयोग करना चाहे तो वो कोर्ट में एप्लीकेशन दे सकता है| लेकिन यदि व्यक्ति आवेदन नहीं भी करता और कोर्ट को लगता है तो कोर्ट उचित सबूतों के आधार पर आत्म रक्षा कानून पर विचार कर सकता है|अभियुक्त पर घाव या चोट के निशान आत्मरक्षा के दावे को साबित करने के लिए मददगार साबित हो सकते हैं ।

लेकिन कई बार ऐसा भी हो सकता है कि अगर आत्म रक्षा में किसी की ह्त्या हो जाए लेकिन अभियुक्त के शरीर पर चोट के निशान भी ना हो तो क्या हो होगा?इसमे हम रेप केस का उदाहरण ले सकते हैं| यदि किसी महिला के साथ कोइ रेप करने की कोशिश करे तो और आत्म रक्षा में उसके हाथो रेपिस्ट का मर्डर हो जाए और उसके ऊपर एक भी खरोंच ना लगी हो तो भी महिला को आत्म रक्षा कानून के तहत सजा माफ करवाने का मौक़ा मिलेगा| इसलिए ऐसे अपराधो में हालातो का बहुत बारीकी से विश्लेषण किया जाता है| एक और विशेश बात परिस्तिथि व जगह भी मायने रखती है| ऐसा नहीं हो सकता कि कोइ किसी के घर पर जा कर उसे खूब मारे या उसकी ह्त्या कर दे और उसे आत्मरक्षा का नाम दे दे| अपराध के सीन में आत्म रक्षा तभी मानी जाएगी जब यह साबित हो जाए कि अभियुक्त के पास अपने बचाव में ये करना अनिवार्य था मतलब उसके पास इसके सिवा कोइ चारा नहीं बचा था|

तो ये था आत्म रक्षा से जुडा कानून, आशा है ये लेख आपको पसंद आया होगा और आपके लिए उपयोगी होगा|

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