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Thursday, 26 September 2019 10:32

जानिए क्या है यूथेनेसिया याइच्छा मृत्यु

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इस लेख में हम एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दे पर बात करेंगे| मुद्दा है इच्छा मृत्यु और इच्छा मृत्यु के लिए की जाने वाली वसीयत|इसमे हम बताएँगे इच्छा मृत्यु क्या होती है उससे जुडे क्या कानून हैं और यदि कोइ इच्छा मृत्यु लेना चाहता है तो क्या वो इस बारे में पहले से ही डिक्लेयरकर सकता है|हर कोइ चाहता है कि वो इस दुनिया से चलते हाथ पैर चला जाए| यानी उसे कोइ ऐसी बीमारी ना हो जाए या ऐसी हालत ना हो जाए कि उसे दूसरो के ऊपर निर्भर होना पड़े| लेकिन फिर भी जीवन में कुछ भी हो सकता है| यदि कभी ऐसी स्थिति आ जाए वो व्यक्ति इच्छा मृत्यु यानी यूथेनेसिया का सहारा ले सकता है| हालांकिइच्छामृत्यु या मर्सी किलिंग पर दुनियाभर में बहस जारी है। इसमे क़ानून के अलावा मेडिकल और सामाजिक पहलू भी जुड़े हुए हैं। कई ऐसी बीमारियाँ हैं जिनके चलते कष्ट भोग रहे लोगो को इच्छामृत्यु की इजाज़त देने की मांग दुनिया भर में बढ़ रही है। इसके लिए लोग वसीयत यानी लिविंग विल भी करते हैं| लिविंग विल अपने जीवन को सम्मान के साथ साप्त करने बारे में होती है| यानी की किसी बुरी स्थति में यदि उनका जीवन दूसरो पर बोझ बन जाए और उकसा कोइ इलाज ना हो तो वो अपनी इच्छा से मृत्यु को चुन सके|

यूथेनेसियाके प्रकार

इच्छामृत्यु दो प्रकार की होती है पहली - निष्क्रिय इच्छामृत्यु व 2- सक्रिय इच्छामृत्यु

इन दोनों में अंतर है|निष्क्रिय इच्छामृत्यु में मरीज जीवन रक्षक प्रणाली पर अचेत अवस्था में रहता है। वह तकनीकी तौर पर जिंदा रहता है, लेकिन उसका शरीर और दिमाग दोनों निष्क्रिय होते हैं। वह तकनीकी तौर पर जिंदा रहता है, इस स्थिति में उसे उसके परिवार की मंजूरी पर इच्छामृत्यु दी जा सकती है।

वहीं सक्रिय इच्छामृत्यु के मामले में मरीज खुद इच्छा मृत्यु मांगता है। ऐसे मरीजों के ठीक होने की उम्मीद खत्म हो जाती है या उनकी बीमारी लाइलाज होती है और बहुत शाररिक पीड़ा में होता है ऐसे में उसकी इच्छा पर उसे मृत्यु दी जा सकती है|

कोर्ट देता है ईजाजत

इधर भारत में भी 9मार्च 2018 को इच्छा मृत्यु को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिल गई है। कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में व्यक्ति को सम्मान और अपनी मर्जी से मरने की इजाजत दी है| सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए शर्त के साथ इच्छा मृत्यु को मंजूरी दी है। इसको लेकर कोर्ट ने सुरक्षा उपाय की गाइडलाइन्स भी जारी की है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका के जवाब में मरणासन्न व्यक्ति द्वारा इच्छामृत्यु के लिए लिखी गई वसीयत यानी लिविंग विल को भी मान्यता दी है|कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है की अगर कोई लिविंग विल करता भी है तो भी मेडिकल बोर्ड की राय के आधार पर ही जीवन रक्षक उपकरण हटाए जाएंगे।श्लिविंग विलश्  एक लिखित दस्तावेज होता है जिसमें कोई मरीज पहले से यह निर्देश देता है कि मरणासन्न स्थिति में पहुंचने या रजामंदी नहीं दे पाने की स्थिति में पहुंचने पर उसे किस तरह का इलाज दिया जाए। या फिर इलाज न देकर इच्छा मृत्युदे दी जाये और इस कार्य में वह अपनी सहमती देता है|

इच्छा मृत्यु और वसीयत 

हालांकि अभी इच्छा मृत्यु और लिविंग विल पर कानून में कोई प्रावधान नही है न ही इसके लिए कोई एक्ट बनाया गया है न ही कोई धारा या आर्टिकल हमारे सविधान में रखा गया है ये एक धारणा है जिनमे स्थितियों को देखते हुए कोर्ट एक निर्णय लेता है| ये कानून नहीं है | ऐसा हमारे देश में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी है जो की लिखित कानून का हिस्सा न हो कर भी कानून बन गये है| मतलब लोगो अपने जीवन और मृत्यु के बारे में निर्णय कर सकते हैं जिन्हें कानूनी, सामाजिक और मेडिकल हालातो के नजरिये से देखते हुए मान्य किया जा सकता है|

इच्छा.मृत्यु के लिए आवेदन

आइये जानते हैं कि कोइ व्यक्ति यदि इच्छा.मृत्यु लेना चाहे तो कैसे ले| इच्छा.मृत्यु किसी को भी उसके हालत के अनुसार ही मिलती है| इसके लिए कोर्ट व मेडिकल बोर्ड अपनी इजाजत देता है| मेडिकल बोर्ड की इजाजत जरूरी होती है ताकि वो ये बयान दे की इस बीमारी का कोई इलाज नही है या ये बीमारी व्यक्ति को बहुत ही ज्यादा दर्द और परेशानी दे रही है और इससे छुटकारा केवल मृत्यु ही है|

और भी कुछ बाते हैं जो जरूरी हैं

1-अगर कोई व्यक्ति पहले से लिविंग विल कर चुका है और उसमे अपनी बीमारी या ऐसे हालत होने का ब्यौरा दे चुका है तो उसकी इच्छा के अनुसार मेडिकल बोर्ड द्वारा इच्छामृत्यु दे दी जाएगी

2- अगर वह व्यक्ति सचेत है यानी कि वो बोल और समझ सकता है और किसी गम्भीर बीमारी से पीड़ित है तो उसे कोर्ट से अनुमति लेकर ही इच्छा मृत्यु दी जाएगी| ऐसे में कोर्ट मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट व राय पर ही अपना निर्णय लेता है|

3 - और अगर कोई व्यक्ति बिना लिविंग विल किये ही कोमा में चला जाता है या फिर किसी ऐसी बीमारी का शिकार हो जाता है जिसमे की वो अपनी सहमती देने में असमर्थ है तो ऐसे हालात में उस व्यक्ति के परिजन कोर्ट में उस व्यक्ति के लिए इच्छा.मृत्यु की याचना कर सकते है ऐसे में कोर्ट का निर्णय ही अंतिम निर्णय होगा| ऐसा अधिकार कोर्ट ने अपने पास इसलिए रखा है ताकि इस कानून का दुरूपयोग नही हो सके| ये इच्छा मृत्यु के लिए जरूरी कंडीशंस है|

कैसे दी जाती है इच्छा.मृत्यु

अब प्रश्न उठता है कि इच्छा.मृत्यु लेने का तरीका क्या होता है|इच्छा.मृत्यु व्यक्ति को इस प्रकार से दी जाती है जिससे उस व्यक्ति को किसी भी प्रकार का दर्द नही हो| ये काम डॉक्टर्स और एक्सपर्ट टीम की निगरानी में होता है| इसमे डॉक्टर इच्छा मृत्यु लेने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को ह्रदय गति रोकने वाला इंजेक्शन दिया जाता है जिससे उसे पीड़ा रहित मृत्यु संभव हो पाती है|

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