Headlines:

Hottest News

विज्ञापन------------

Tuesday, 08 October 2019 10:37

आपसी सहमती से तलाक कैसे ले सकते हैं

Written by
Rate this item
(0 votes)

आज कल तलाक होना एक आम बात हो गयी है| लोग पढ़े लिखें हैं खुद पर निर्भर हैं| कई बार ऐसा होता है कि पति पत्नी के विचार आपस में नहीं मिलते और तलाक लेना चाहते हैं लेकिन वो कोर्ट के चक्कर भी नही लगाना चाहते तो ऐसे में म्यूचुअल डिवोर्स उनके लिए काफी हेल्पफुल होता है|आइये जानते हैं कि आपसी तलाक लेते समय किन बातो का ध्यान रखें| इसके क्या फायदे और नुकसान हैं|म्यूचुअल डिवोर्स या आपसी सहमति से तलाक कैसे लिया जाता है उसकी प्रोसेस क्या होती है|

आपसी सहमती से तलाक या म्यूचुअल डिवोर्स का विवरण हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 की धारा 13 B (1) और 13 B (2) में वर्णित है| आपसी सहमती से तलाक का केस फेमिली कोर्ट में फाइलकरना होता है| सबसे पहले ये सवाल उठता है कि किस जगह कोर्ट में केस डाला जाये| कोर्ट में केस करने के तीन क्षेत्र है–

  • पहला वह जगह जहा पर पति.पत्नी की शादी हुई हो
  • दूसरा - जहा पर पति.पत्नी पहली बार एक साथ रहे हो
  • और तीसरा जहा परपति.पत्नी आखरी बार एक साथ रहे हो|

इन तीन जगह के अलावा आप किसी और जगह की कोर्ट में केस नही कर सकते है| आपसी सहमति से तलाक लेने की भी कुछ शर्ते होती हैं|आपसी सहमती के तलाक लेने के लिए पहली शर्त कि पति.पत्नी कम से कम एक साल से अलग रह रहे होने चाहिए|
और वो एक साल कभी से भी माना जा सकता है चाहे वो समय शादी के अगले दिन से ही क्यों ना शुरू हुआ हो|अलग रहने से मतलब ये है की वे दोनों एक छत के नीचे नही रहे हो| ना ही एक फ्लैट में दो कमरों में रह सकते है लेकिन एक ही अपार्टमेंट में अलग फ्लैट में रह सकते है| मतलब ये कि पता अलग होना चाहिए|एक और जरूरी बात पति.पत्नी के बीच अलग रहते हुए भी शारीरिक सम्बन्ध नही बनने चाहिए| अगर अलग रहते हुए भी शारीरिक सम्बन्ध बन जाते है तो पिछला समय नही गिना जाएगा|

लेकिन अगर कुछ ऐसा कारण बन रहा है जिसमे आप एक साल की समय सीमा का पालन नहीं कर सकते या कर पा रहे हैं तो हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 की धारा 14 के अंतर्गत आवेदन करके इस 1 साल की समय सीमा को समाप्त करवा सकते है| लेकिन इसके लिए आपको कोर्ट के सामने उचित कारण देने होते है|

 

आपसी सहमती से तलाक की दूसरी जरूरी शर्त है कि ये बिना किसी दबाव के होना चाहिए| मतलब ये कि दोनों पक्षों ने तलाक के लिए कोइ दबाव ना बनाया हो|

आइये अब जान लेते हैं की कोर्ट में केस करने की कानूनी प्रकिर्या कैसे शुरू करें|आपसी सहमती से तलाक दो चरणों में होता है| इसके लिए कोर्ट में दो बार आवेदन करने होते है| इन्हे फर्स्ट मोशन और सेकेण्ड मोशन कहते है| इसके बाद तलाक हो जाता है

अब समझ लेते हैं कि फर्स्ट मोशन क्या होता है|.

आपसी सहमती से तलाक के लिए कोर्ट में हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 की धारा 13B (1) के अंतर्गत आवेदन होता है जिसे फर्स्ट मोशन कहते है| इसमे दोनों पक्षों का शादी से पहले व बाद का नाम, पता, उम्र व शादी का स्टेट्स लिखा होता है| स्टेट्स से मतलब शादी से पहले की वैवाहिक स्तिथि से है जैसे की कोई इस शादी से पहले तलाक शुदा या विदुर रहा हो तो|

 

इसके अवाला इसमे दोनों पक्षों के एफिडेविट भी होते है| जो ये कहते हैं कि किये गए आवेदनों के कथन सत्य है| इसके अलावा लिखा होता है की दोनों पक्ष बिना किसी दबाव के आपसी सहमती से तलाक ले रहे है इनमे आपस में रहने का कोई समझोता नही हो सका है|

अगर कोई शर्त या लेन. देन होती है तो उसका विवरण होता है| ज्यादातर केसों में अग्रीमेंट बना कर उसकी कॉपी साथ लगा दी जाती है|

डाक्यूमेंट्स की बात करे तो दोनों पक्षों के एक.एक पासपोर्ट साइज़ फोटो जो की आवेदन के पहले पेज पर लगते है, शादी का कार्ड या शादी की कोई फोटो, पहचान व पते के लिए आधार कार्ड या पहचान पत्र जिसमे वही पता हो जो की आवेदन में दिया है, अगर नही तो उसके लिए अलग से एफिडेविट आदि देना होता है

इसके अलावा जैसे की उपर विवरण दिया है अगर पति.पत्नी की शादी को एक साल नही हुआ है या फिर वो एक साल से अलग नही रह रहे है तो 1 साल के पर्थिकरण को समाप्त करने के लिए हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 की धारा 14 में एप्लीकेशन जो की इस आवेदन के साथ लगा सकते है|

कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों को सुन कर दोनों की स्टेटमेंट को रिकॉर्ड करती है तथा दोनों पक्षों के हस्ताक्षर अंगूठो के निशान के साथ लिए जाते है, ताकि कोई बाद में मुकर नही सके तथा दोनो पक्षों को उनके वकील identified करते है की ये दोनों वही सही व्यक्ति यानि पति.पत्नी है|

दूसरा चरण

दूसरा आवेदन यानि Second Motion हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 की धारा 13 B (2) के अंतर्गत किया जाता है| जिसमे दुबारा से शादी से पहले व बाद का नाम, पता, उम्र व शादी का स्टेट्स लिखा होता है| इसके अलावा फर्स्ट मोशन हो चुका है इसका विवरण होता है|

साथ ही आपसी सहमती का प्रमाण भी होना चाहिए कि पति-पत्नी अपनी सहमति से तलाक ले रहे हैं|जिला न्यायालय में उन्हें आधार पेश करना होता है कि वे एक वर्ष या उससे अधिक समय से अलग.अलग रह रहे हैं और वे एक साथ नहीं रह सके हैं तथा वे इस बात के लिए परस्पर सहमत हो गए हैं कि विवाह का विच्छेद हो जाना चाहिए।

इस अधिनियम की उपधारा (1) के अनुसार अगर तलाक के आवेदन दिए जाने के 6 महीने के बाद और उस तारीख के 18 महीने पहले दोनों पक्षकारो के द्वारा अर्जी वापस नहीं ली जानी चाहिए| इसके बाद कोर्ट तलाक की डिक्री पारित करेगा|

अगर डाक्यूमेंट्स की बात करे तो इस प्रोसेस में एक बार फिर से दोनों पक्षों के एक एक पासपोर्ट साइज़ फोटो आवेदन के पहले पेज पर शादी का कार्ड या शादी का फोटो, आधार कार्ड या पहचान पत्र लगाया जाता है तथा साथ में पहले आवेदन यानी फर्स्ट मोशन के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी भी लगाई जाती है|

वैसे तो  दूसरा आवेदन  याने सेकेण्ड मोशन पहले आवेदन यानी फर्स्ट मोशन के आदेश के पारित होने से 6 महीने बाद कभी भी कर सकते है| लेकिन 18 महीने से ज्यादा नहीं होना चाहिए|

इसमें कोर्ट के पहले आवेदन के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी लेने के समय को नही गिना जाता है| लेकिन अगर दोनों पक्ष आवेदन के लिए 6 महीने का इन्तजार नही करना चाहते है तो इसके लिए लेकिन CPCकी धारा 151 में एप्लीकेशन लगा कर  इस 6 महीने की समय सीमा को समाप्त करवा सकते है| ये एप्लीकेशन दूसरे आवेदन यानि सेकंड मोशन के साथ जाती है|

इसमें भी कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों को सुन कर दोनों की स्टेटमेंट को रिकॉर्ड करती है वकील दोनों पक्षों को Identified करते है और कोर्ट तलाक की दो डिग्रीया जारी करता है जो की दोनो पक्षों को एकएक ओरिजिनल डिग्री मिलती है| आप इस डिग्री की और भी सर्टिफाइड कॉपी कोर्ट में आवेदन करके ले सकते है|

इसके आलावा कुछ एनी बाते भी आपसे सहमति से तलाक के लिए जरूरी हैं|

पहली - आप अपने वकील वकील के द्वारा एक सैटलमेंट डीड यानी समझौता डीड MOU बनवा ले जिसमे समझोते की सभी बातें लिखी हो|

दूसरी जैसे की तलाक के बाद यदि बच्चा है तो उसकी कस्टडी किसके पास रहेगी|

तीसरी जरूरी बात पति द्वारा दी जाने वाली एकमुश्त राशि कितनी होगी, कब और कैसे उसकी पेमेंट की जायेगी|

चौथी जरूरी बात यदि दोनों पक्षों के बीच केस चल रहे हैं जैसे दहेज़, खर्चे यानी मेंटीनेंस धारा 125 CRPC काया घरेलु हिंसा का है तो उनको कब और कैसे विड्रो करना है|

पांचवी बात अगर पति और उसके अन्य घरवालों के खिलाफ कोई FIR धारा 498A /406 IPC में रजिस्टर्ड है तो उसे कैसे और कब हाई कोर्ट से खत्म करना है|

छठी बाद यदि कोई प्रॉपर्टी हैं तोए उनका बटवारा कैसे किया जाएगा? पत्नी को कितनी प्रॉपर्टी दी जाएगी?

सातवी बात पत्नी को उसका स्त्रीधन वापिस किया गया है या नहीं अगर करना है तो कब और कैसे किया जाएगा|

आठवी बात कोर्ट के खर्चो से सम्बन्धित जैसे FIR धारा 498A /406 IPC के केस को ख़त्म करवाना और आपसी सहमती से तलाक का खर्चा कौन उठाएगा| इन बातो पर भी सहमति बनाना जरूरी है|

नवी बात भविष्य में मेंटीनेंस या कोई और क्लेम किया जा सकता है या नहीं| अगर भविष्य में कोई क्लेम देना है या निरंतर पति को पत्नी को मेंटेनेंस देना है तो उसका जिक्र की कब और कैसे? ऐसी और भी बहुत सी बातें हैं? उपरोक्त सभी बातों का सेटलमेंट डीड में उल्लेख करना बहुत जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी पक्ष को किसी भी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े|

10वी बात सब पैसो या कीमती समानए जेवर का लेन देन कोर्ट के सामने ही करे|

तो ये थी वो जरूरी बाते जो आपको ध्यान रखनी चाहिए|

 

कुछ और बाते हैं जो उन लोगो के लिए जानना जरूरी है जो आपसी सहमति से तालक चाहते हिं| जैसे कई बार ऐसा होता है कि फर्स्ट मोशन में ही काफी चीजे सैटल हो जाती हैं अगर ऐसे में पत्नी पैसा, मेंटीनेंस लेकर सेकण्ड मोशन में मुकर जाए तो पुरुष के क्या अधिकार होंगे|

तो ऐसे मेंअगर आपका समझोता लिखित में हुआ है और पत्नी फर्स्ट मोशन में पैसा ले कर सेकेण्ड मोशन में नही आये तो आप  हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 की धारा धारा 13 B (2)  के अंतर्गत फाइल करे और आपनी पत्नी को कोर्ट के द्वारा नोटिस पहुचाये| तब आपकी पत्नी को कोर्ट में साइन करने के लिए आना पडेगा, अगर वो नही आती है तो आप सिविल कोर्ट में अपनी पत्नी के खिलाफ रिकवरी का केस फाइल करके अपना पैसा और कीमती समान वापस ले सकते है|

अब लास्ट में एक बहुत ही इम्पोर्टेंट सवाल का जवाब दे देते हैं, कि क्या तलाक के बाद दोनों पक्ष शादी कर सकते है या फिर इस आपसी सहमती के तलाक को खत्म भी कर सकते है?

जी हां अगर पति. पत्नी तलाक होने के बाद दुबारा पति.पत्नी की तरह रहना चाहते है तो हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 की धारा 10 के अनुसार कोर्ट में आवेदन करके वे अपनी तलाक की डिग्री को खत्म करवा सकते है|

तो ये थी आपसी सहमति से तलाक लेने के विषय में जानकारी| उम्मीद है ये वीडियो आपको पसंद आया होगा| वीडियो देखने के लये बहुत बहुत धन्यवाद|

Read 102 times