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Wednesday, 30 October 2019 15:35

विकास के साथ राष्ट्रवाद पीएम मोदी का 2022 तक के लिए मास्टर प्लान

Written by Scanner India News Network
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 नरेन्द्र मोदी मंत्रिमंडल की पहली बैठक का फैसला सरकार की सोच और दिशा का संकेत देने वाला है। इसमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब सभी किसानों को सालाना 6,000 रुपये मिलेंगे। पहले इस योजना में केवल लघु और सीमांत किसानों को शामिल गया था। भाजपा ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में इस योजना में सभी किसानों को शामिल करने का वादा किया था। फिर किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए पेंशन योजना का भी ऐलान किया गया। पेंशन योजना के तहत 18 से 40 वर्ष के लोगों को 60 साल की उम्र के बाद प्रति महीने 3 हजार रुपये पेंशन मिलेगी। पेंशन योजना के तहत 12 से 13 करोड़ लोग कवर होंगे। पहले चरण में 5 करोड़ लोगों को कवर करने का लक्ष्य है। व्यापारियों के लिए पेंशन योजना से करीब 3 करोड़ खुदरा व्यापारी और दुकानदारों को फायदा मिलेगा। जाहिर है, इन योजनाओं से किसानों, छोटे व्यापारियों के जीवन स्तर में सुधार होगा और उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। मतीसरे फैसले में नेशनल डिफेंस फंड के तहत प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना में बदलाव करते हुए शहीद सुरक्षा बलों के लड़कों को हर महीने 2000 रुपये की जगह 2500 रुपये एवं लड़कियों को अब 2250 रुपये की जगह 3000 रुपये छात्रवृत्ति मिलेगी। छात्रवृत्ति का दायरा बढ़ाते हुए इसमें राज्य पुलिस को भी शामिल किया गया है। आतंकी या माओवादी हमले में शहीद हुए राज्य पुलिस के बच्चों को भी अब छात्रवृत्ति मिलेगी। यह नरेन्द्र मोदी की आर्थिक सामाजिक विकास और राष्ट्रवाद, सुरक्षा तथा सैन्य पराक्रम को साथ लेकर आगे बढ़ने की नीति का स्पष्ट द्योतक है। इससे यह साफ हो जाता है कि आने वाले पांच वर्षों में सरकार की दिशा क्या होगी। इसका आभास भाजपा ने चुनाव के लिए जारी अपने संकल्प पत्र में विस्तार से करा दिया था। उस संकल्प पत्र की शुरुआत राष्ट्रवाद और सुरक्षा से होती है तथा सामाजिक-आर्थिक विकास से होते हुए संस्कृति तक विस्तारित हो जाती है। इसके कवर पृष्ठ पर संकल्पित भारत सशक्त भारत शब्द प्रयोग है तो पीछे के पृष्ठ पर विचारधारा के तीन प्रमुख बिन्दू थे- राष्ट्रवाद हमारी प्रेरणा, अन्त्योदय हमारा दर्शन, सुशासन हमारा मंत्र। प्रधानमंत्री ने अपनी संकल्पना में स्पष्ट कहा था कि हम स्वतंत्रता के 100 वर्ष यानी 2047 के भारत की कल्पना लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उस समय तक भारत को विश्व का महानतम और समृद्धतम देश बनाने की ठोस आधारभूमि में हम 2019 से 2024 के अपने कार्यकाल में तैयार कर देंगे। मोदी के आलोचक राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा सैन्य पराक्रम को महत्व देने को लेकर काफी नाक-भौंहें सिकोड़ते हैं, पर वे नहीं समझते कि इससे लोगों के अंदर राष्ट्र को लेकर एक सामूहिक चेतना जागृत होती है। दूसरे, यह राष्ट्रवाद ही है जो सरकार को भी सामान्य जन के उत्थान के लिए काम करने को प्रेरित करता है। भाजपा के संकल्प में और प्रधानमंत्री की उसकी संकल्पना में स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष यानी 2022 तक के लिए 75 लक्ष्य घोषित किए गए हैं।
मोदी की दूसरी सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ी है। देश का वातावरण पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक बदला हुआ प्रतीत होता है। मोदी के कारण ऐसा राष्ट्रवाद पैदा हुआ है जिसके साथ सामाजिक विकास और लोगों की अपेक्षाएं जुड़ी हुई हैं। एक उदाहरण लीजिए। एक राष्ट्रीय टीवी चैनल का जनता के बीच खुली जगह पर प्रतिदिन कार्यक्रम होता है। उसमें एक दैनिक मजूदर अपनी बात रखने के लिए मजदूरी छोड़कर आया। उससे एंकर ने जब पूछा कि क्या करते हो तो उसने जवाब दिया, मजदूरी। तो फिर मजदूरी छोड़कर यहां बोलने क्यों आ गए? उसने कहा कि देश को बताने। क्या बताने? उसका उत्तर था कि हमने मोदी जी को राष्ट्रवाद पर वोट दिया है। एंकर ने पूछा राष्ट्रवाद से जीवन चल जाएगा? उसका जवाब सुनिए, मोदी जी ने हमको घर बना दिया, शौचालय दे दिया, गैस सिलेंडर दे दिया, बिजली लगवा दी और क्या चाहिए। फिर उससे पूछा गया कि बीमार पड़ने पर जो खर्च होता है उसके लिए अस्पताल कहां है? उसने कहा, पांच लाख का कार्ड मिला है न। उसके बाद उसने जो कहा वह कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण था। उसने कहा कि अब हम मोदी जी से यही कहेंगे कि बच्चों की पढ़ाई की अच्छी व्यवस्था कर दें और फिर बढ़िया रोजगार दिला दें। पूछा गया कि क्या तुमको विश्वास है कि मोदी जी ऐसा कर देंगे? उसने कहा कि मोदीजी हैं तो जरूर करेंगे। नरेन्द्र मोदी के आप विरोधी हों या समर्थक उन्होंने अगर राष्ट्रवाद और सैन्य पराक्रम के संयोग से पूरे देश की चेतना जागृत की है तो समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की आकांक्षाएं और अपेक्षाएं भी बढ़ाई हैं। विश्वास पैदा किया है कि वो आकांक्षाओं को पूरा करेंगे। कोई इसकी आलोचना कर सकता है कि इतनी अपेक्षाएं बढ़ा देंगे जिसकी पूर्ति ही नहीं होगी। किंतु बिना आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के कोई देश प्रगति के उच्च सोपान तक पहुंच नहीं सकता। आकांक्षाओं और अपेक्षाओं से भरा हुआ यह नया भारत है। दूसरे नेतागण आकांक्षा और अपेक्षा इसलिए जागृत नहीं कर पाए कि उन्होंने इस तरह विचार करके काम नहीं किया। उन्हें भारत के इस नए चरित्र को समझना होगा। अन्यथा वो धीरे-धीरे कालबाह्य हो जाएंगे।

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