Headlines:

Hottest News

विज्ञापन------------

Thursday, 04 March 2021 18:57

अंतर जाति-विवाह से धडकता भारतीय संस्कृति

Written by
Rate this item
(0 votes)

अंतर जातीय-विवाह का अर्थ होता हैं कि अपने जाति को छोड़ कर किसी अन्य जाति में विवाह करना। वर्तमान समय में लोगों में इस विवाह की प्रतिक्रिया में काफी बदलाव देखने को मिला है। ऐसा इसलिए हुआ हैं क्योंकि इस समय में लोगों ने अपनी इच्छा से शादी करने और हमसफ़र-साथी खोजना शुरु कर दिया हैं। अक्सर अंतर जाति-विवाह प्रेम से ज्यादा संबधित होती हैं। अगर देखा जाए तो अंतर जाति-विवाह की जब भी बात आती हैं तो लोगों में एक अलग ही सा विचार और पारदर्शिता देखने को मिलता हैं। जब कोई भी विवाह अंतर जातीय होती हैं तो इस विवाहित जोडो को बहुत सी समस्याओं को सामना करना पड़ता हैं जैसे- समाज से दूरी, अपने घर से दूर व्यवहार, समाज को आपके और आपके परिवार को हीन भावना से देखते है।जैसे कि आदिकाल में लोगों में अंतर जातीय विवाह करने वाले लोगों को समाज और अपने ही घर से दूर कर देते ताकि इनका गलत प्रभाव दूसरे पे न पड़। उस समय भले ही अंतर जातीय विवाह में कमी देखने को मिलती थी,किंतु दहेज प्रथा जो समाज में ज्यादा देखने को मिलता था। और हम कहे सकते है कि अंतर जातीय विवाह बढ़ने का यह मुख्य करना हो सकता हैं। भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति है। इस देश में हमें हमेशा से अपनी संस्कृति से जुड़े रहने और उसका सामना करने का गर्व प्राप्त होते आ रहा हैं। क्योंकि हमारी संस्कृति हमेशा से कुछ ना कुछ सिखाते आ रही हैं।   अंतर जातीय-विवाह से हमारी संस्कृति पे बहुत ज्यादा ही असर पड़ा हैं। देखा जाए तो इस अंतर जातीय-विवाह से लोगों को अपनी संस्कृति से विश्वास उठते जा रहा हैं। कुछ लोगों की वजह से हमारी संस्कृति का मान और सामना खतरे में दिखाई देने लगा हैं, क्याकि उनको न ही तो अपने समाज की और न ही अपनी संस्कृति पर नही विश्वास और नहीं कोई फ़क़ीर हैं। इस विवाह से समाज भी इसलिए गलत मानते हैं क्याकिं इस उनको अपने समाज में अपने जाति, धर्म, ऊँच—नीच,  जोकि उनको समाज में एक अच्छा दर्जा नहीं दिलता हैं। उदाहरण तौर पर हमकहें सकते है कि --- जब कोई विवाहत जोड़ी अपनी जाति या धर्म को छोड़ कर किसी भी अन्य जाति या धर्म से विवाह करता है तो हम इसे अंतर जातीय-विवाह कहते है। पर उसके बाद उसे अपना जाति या धर्म को भुलाना पड़ता है, क्योंकि हमारे जो हमसफ़र है उस अपनी जाति, धर्म और विचार माने वाले है। और उनको नहीं भी पंसद होने के कारण उनको ये पंसद करना पड़ता है और धीरे-धीरे वे अपनी संस्कृति को भुलते जाते है।

Read 32 times