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विशेष रिपोर्ट
विशेष रिपोर्ट

विशेष रिपोर्ट (39)

बरकट्ठा प्रखंड के गइपहाड़ी पंचायत से रामदेव प्रसाद ने बताया माननीय पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जी तथा वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी इन दोनों में सबसे अच्छा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जी थे ।रघुवर दास जी के कार्यकाल में काफी लोगों को नौकरियाॅं मिली। जिसमें कुछ लोग इंजीनियर कुछ लोग डॉक्टर तथा कुछ लोग टीचर के पद पाएं। खेतों में फसलो के लिए पानी का व्यवस्था सोलर पैनल द्वारा सिंचाई का व्यवस्था किया गया।झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी सहकारिता विभाग से हजारीबाग जिले के महासचिव मोहम्मद अयूब ने बताया माननीय पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जी से लाख गुना अच्छा अभी के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी है। रघुवर दास जी ने लाखों लोगों को नौकरी देने का वादा करके छोड़ दिये वही हेमंत सोरेन जी कई लोगों को मनरेगा तथा कई योजनाओं के तहत नौकरी देकर हटाए हैं।बरकट्ठा निवासी तुलसी पंडित ने बताया माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अच्छा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जी थे। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जी अपने कार्यकाल में खाना बनाने हेतु एलपीजी गैस तथा चूल्हा फ्री में वितरण करवाये।बरकट्ठा प्रखंड के गंगपांचो निवासी राजेश कुमार का कहना है माननीय पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जी के कार्यकाल में हमारे गांव के बहुत लोगों को नौकरियां मिली राशन कार्ड बना खाना बनाने हेतु एलपीजी गैस तथा चूल्हा फ्री में वितरण किया गया। वही जगह पर अभी का मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के कार्यकाल में अभी तक हमारे एरिया के किसी आदमी को भी नौकरियां नहीं मिली है ना ही किसी को रोजगार मिलाबरकट्ठा प्रखंड के बेड़ों कला निवासी श्यामसुंदर पंडित ने बताया की माननीय पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जी के कार्यकाल में कई डिपार्टमेंटो को समय पर वेतन नहीं दिया गया जैसे मैं बिजली डिपार्टमेंट कर्मचारी, मनरेगा, पारा शिक्षक इत्यादि। लेकिन वही जगह पर माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी के कार्यकाल में उन्हें अच्छी तरह से काम करने का मौका नहीं मिल पाया वह काम करना शुरू किये तभी लॉकडाउन लागू हो गया ।जिसके कारन सही तरह से काम नहीं कर पाए। अब धीरे-धीरे अपने काम को सुधार रहे हैं जिससे जनता को दिक्कत ना हो। यह सरकार जनता के बारे में सोच रही लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री जो नियम पास कर देते थे वह अपने नियम पर यड़े रहते थे किसी और का नहीं सुनते थे।

देश में कांग्रेस का भविष्य इस विषय पर शब्बीर हुसैन ने कहा कि कांग्रेस ने स्वतंत्रता के बाद से शासन करते आ रहा है पर सभीओर से देश की आर्थिक सामाजिक राजनैतिक नुकसान ही पहुंचाया। देश समरसता में जहर घोलकर सम्प्रदाय वाद और परस्पर विवाद को जन्म दिया। वहीं रंजीत मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस के काल में बेरोजगारी कालाबाजारी को पनपने का मौका मिला यदि एक ऐसा नेता देश को मिला है जो देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास रत है उसे हमेशा नीचा दिखाने की कोशिश में लगा हुआ है इसलिए कांग्रेस पतन की ओर जा रहा है। कुछ इसी तरह की बातें राजेश राय ने भी कहा कि कांग्रेस अपनी करनी से रसातल की ओर जा रहा है विपक्ष के प्रति हमेशा खराब व्यवहार झूठा प्रचार गलत आरोप प्रत्यारोप यह कांग्रेस का स्वभाव बन गया है। कौशल जायसवाल ने बताया कि कांग्रेस केवल एक परिवार की पार्टी बनकर रह गई है। भ्रमजाल फैला कर लोगों में विद्वेष फैलाना ही इस पार्टी का काम है। विश्वरुप वनर्जी ने बताया कि कांग्रेस में नेताओं का अभाव हो गया है। येलोग आपस में ही झगड़े में लिप्त हैं। इस पार्टी के बड़े-बड़े नेता अब विपक्ष का गुणगान करने लगे हैं। बेरोजगारी भ्रष्टाचारी इसी पार्टी की देन है। अतः कांग्रेस का पतन होना सम्भव है क्योंकि अभी तक ऐसे विपक्ष से पाला नहीं पड़ा था।

बंगाल में 10 वर्षों से तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी सरकार है और अब विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। क्या यहां बंगाल में सत्ता परिवर्तन होना संभव है या असंभव ? इस विषय पर रामगढ़ से स्कैनर इंडिया के प्रमुख ब्रह्मदेव महतो द्वारा लोगों से राय ली गई ।उनमें राशन दुकान के रामफल प्रजापति ने कहा कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन होना संभव है ,क्योंकि वहां विकास ना होने के कारण जनता में आक्रोश है।लक्ष्मी बीज भंडार के राजेश प्रजापति ने कहा कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन संभव है ,क्योंकि वहां दंगा  जैसी स्थिति होती रहती है ।विकास के काम भी उतना नहीं हुआ है जितना होना चाहिए।शिक्षक कन्हैया लाल गोस्वामी ने कहा कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन जरूरी है और संभव भी है ।क्योंकि वहां के विकास के लिए एवं अपराध से मुक्त कर करने के लिए सत्ता में परिवर्तन होकर भाजपा का आना जरूरी है। बरकट्ठा प्रखंड के चलकुस्सा ब्लॉक से खालिद खान ने बताया कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन संभव नहीं है। क्योंकि ममता बनर्जी ने बंगाल के बिकाश के लिए बहूत सारा काम कि है इसलिए जनता इसे देखते हुए कभी नहीं चाहेंगे कि वहा सत्ता परिवर्तन हो। बरकट्ठा प्रखंड के घंघरी पंचायत से पंकज मद्धेशिया ने बताया कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन निश्चित संभव है। क्योंकि ममता बनर्जी पुलिस प्रशासन को काफी छूट दे रखी है की बाहरी गाड़ी देखने के साथ ही उसे तंग किया जाता है जगह जगह पर पैसा वसूला जाता है।....

बंगाल में सत्ता परिवर्तन संभव या असंभव इस बिषय पर विभिन्न  माननीयों ने इस मामले में कहा जैसे सिदो कान्हु उच्च विद्यालय दुमका के सचिव प्रदीप्त मुखर्जी ने कहा कि बंगाल की सत्ता वहां के वोटरों पर निर्भर है यदि फेयर वोटिंग होगी तो सत्ता परिवर्तन संभव है ।  इसके लिए लोगों को डर छोड़ कर घर से बाहर निकल वोटिंग करना होगा।अभय आनंद ने कहा कि बंगाल में इस बार सत्ता परिवर्तन संभव है क्योंकि लोग तत्तकालीन सरकार से परेशान हैं।यह सरकार कभी राम के नाम पर तो कभी दुर्गा पूजा तो कभी सरस्वती पूजा के नाम पर एक दूसरे को लड़ाती है।हालांकि भास्कर मुखर्जी का कहना है कि बंगाल के बिषय में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि बंगाल में सत्ता पक्ष का वोटर साइलेंट है अतः उन्हें कम आंकना बेइमानी होगी साथ ही अल्पसंख्यकों का वोट तथा बड़ी संख्या में सवर्णों का वोट सत्यता पक्ष के साथ है। उत्तम गुप्ता ने कहा कि इस बार प्रतिपक्ष के सभा रैलियोंमें लोगों की भीड़ को देखकर लगता है कि परिवर्तन संभव है। नरेश ठाकुर ने कहा कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन होगा ही क्योंकि बंगाल में ढेरों विसंगतियां हैं जो सत्ता परिवर्तन के लिए काफी है जैसे भ्रष्टाचारी बेरोजगारी आदि। अम्फन के पैसे का बंदरबांट प्रधानमंत्री कृषि के लिए किसानों को दिया गया पैसा किसानों को नहीं मिलना आदि सत्ता परिवर्तन का कारण बनेगा ‌ मंतोष तिवारी ने कहा कि बंगाल से इस बार टी एम सी की सरकार को उसका घमंड ही ले डूबेगी।पार्टी से बड़े बड़े नेताओं का इस्तीफा देना तथा उनका प्रतिपक्ष में सामिल होना सत्तापक्ष पर भारी पड़ सकता है।

बरकट्ठा प्रखंड के गइपहाड़ी पंचायत से रामानंद कुमार सागर ने बताया यह किसान आंदोलन है षड्यंत्र नहीं अगर षड्यंत्र रहता तो सभी जगह के किसान धरना प्रदर्शन पर नहीं रहते।बरकट्ठा से अनंत कुमार पांडेय जी ने कहा किसान आंदोलन पूरी तरह से आंदोलन है।लेकिन इसमें कुछ उपद्रवियों ने आंदोलन कर्ताओं के बीच में घुसकर षड्यंत्र रचने और  किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की लेकिन इस बात की जानकारी किसानो को हुई तो उसे आंदोलन से बाहर निकाला ।बरकट्ठा प्रखंड के इचाक बाजार से युवा नेता (आदर्श युवा संगठन केंद्रीय अध्यक्ष)गौतम कुमार ने बताया कि आंदोलन का आरंभ जब भी होता है वास्तविक बिंदु पर होता है। किसान आंदोलन राकेश टिकैत का सबसे अच्छा आंदोलन है। लेकिन राजनीतिक पार्टियां इसे मुद्दा बनाकर अपना चेहरा चमका रही है।बरकट्ठा प्रखंड के घंघरी पंचायत से पंकज मद्धेशिया ने बताया कि वास्तविक में आंदोलन है। अगर यह आंदोलन नहीं होता तो एक-दो दिन में धरना प्रदर्शन खत्म हो जाता। इस कानून में कहीं ना कहीं त्रुटि है इस वजह से या आंदोलन चल रहा है।बरकट्ठा प्रखंड के चलकुस्सा ब्लॉक से खालिद खान ने कहा इस आंदोलन में कई राज्य के किसान शामिल है यह वास्तविक में आंदोलन है हम सभी लोगों को किसानों का समर्थन करना चाहिए और इस काले कानून का विरोध करना चाहिए।

रामगढ जिला से स्कैनर इंडिया के प्रमुख ब्रह्मदेव महतो द्वारा पूर्व रघुवर दास की सरकार और वर्तमान में हेमन्त सोरेन की सरकार में आपको कौन अच्छी लगी। उपरोक्त प्रश्न के उत्तर में निम्नलिखित बुद्विजिवियों, शिक्षकों, व्यवसायियों, समाजसेवी आदि ने साक्षात्कार के रूप में अपने अपने विचार व्यक्त किए.....


1.राशन दुकान से गंगाधर ठाकुर कहते हैं कि उन दोनों के सरकार में तो मुझे हेमन्त सोरेन की सरकार फिलहाल अच्छी लग रही है, क्योंकि रघुवर दास की पूर्ण बहुमत में पांच साल की अपेक्षा वर्तमान में सोरेन सरकार ने अच्छा काम किया है और आगे करके दिखाएगी ।
2. बेबी ड्रेसेस के कपड़ा व्यवसायी सूरज कुमार ने दोनो सरकारों में से हेमंत सरकार को कहा है। उन्होंने कहा है कि रघुवर दास की सरकार में जो स्थानीय नीति लागु हुई है वह गलत है। इसका कट आॅफ डेट 1985 नही होनी चाहिए। इसपर हेमंत सोरेन ने रोक लगाई है और 1932 का खतियान लागु करने की बात कह रहा है इसलिए यह हेमंत सोरेन की सरकार अच्छी है।
3. रसायन शास्त्र के ही शिक्षक कन्हैया लाल गोस्वामी ने कहा कि रघुवर सरकार भी अच्छी थी, लेकिन कोविड-19 जैसी महामारी में जो हेमन्त सोरेन सरकार ने कार्य किया वह सराहनीय रहा। इसलिए हेमन्त सोरेन सरकार सबसे अच्छी सरकार है।
4. उप मुखिया (बड़का चुम्बा से ) इंद्रदेव महतो ने कहा कि पूर्व सरकार रघुवर दास की सरकार से मुझे हेमन्त सरकार अच्छी लगती है क्योंकि इन्होने चुनाव के समय जो घोषणा की थी उसे एक साल के अंदर निभा रही है । पारा शिक्षक एवं आॅंगनबाड़ी सेवक सेविकाओं को समय पर मानदेय का भुगतान कर रही है और सेवा स्थायी एवं वेतनमान देने के लिए साकारात्मक सोच बना रही है।
5. रोहित कुमार रसायन शास्त्र के शिक्षक के द्वारा हेमन्त सरकार रोजगार सृजन करने के लिए अच्छी लगती है। क्यांकि यह पिछले सरकार में भी रोजगार दि थे। और इस बार में रोजगार देने के वादे के साथ में ही आई है लेकिन सरकार में रोजगार देने नही, बल्कि रोजगार छीनने का काम किया था।
6. युवा नेता आशीष प्रकाश ने कहा कि रघुवर सरकार 1983 का खतियान अर्थात कट आफ डेट लाई थी लेकिन हेमन्त सरकार इस वादे के यसाथ्ज्ञ आई है िकवह 1932 का खतियान लेकर आएगी जो कि हित में होगा।इसलिए हेमन्त सरकार अच्छी है।
7. एक ठेलावाला टेपा प्रजापति ने कहा कि वर्तमान में हेमन्त सोरेन की गठबंधन सरकार जिस तरह से कोरोना काल में काम किया र्है इससे यह लगता है कि यह और भी काम करेगी। ण्वं झारखंड को उॅचाईयों में ले जाएगी। वहीं रघुवर दास की सरकार डबल इंजन की थी लेकिन विकास की उॅंचाइयों में नही ले जा पाई, केवल बाहरी भीतरी में फॅंसी हुई थी।
8. ज्वेलर्स विक्रेता राजकुमार सोनी ने कहा कि मेरे विचार से रघुवर दास एवं हेमन्त सोरेन की सरकार दोनो ही अच्छी है। लेकिन सबसे अच्छी रघुवर सरकार लगी क्योंकि इनकी सरकार में समय पर रोजगार के प्रति ध्यान दिया गया था।
9. पारा शिक्षिका इंन्दु देवी ने कहा कि हमारे राज्य में डबल इंजन बहुमत की सरकार थी फिर भी उतना कार्य नहीं किया जितना उन्हें करना चाहिए थी।इसलिए जनता उन्हें सपोर्ट भी नही किया और मुख्यमंत्री रघुवर दास खुद चुनाव हार गए। अभी हेमन्त सोरेन की गठबंधन सरकार है।फिलहाल बढिया काम कर रही है इसलिए हेमन्त सरकार ठीक है।

 

भारत की पहली महिला आईपीएस और वर्तमान में पुडुचेरी के उपराज्यपाल किरण बेदी का आज 71 वां जन्मदिन है। आज के दिन पंजाब के अमृतसर में 9 जून 1949 को उनका जन्म हुआ। एक सुपर कॉप से लेकर अन्ना आंदोलन और बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करने से लेकर दिल्ली के सीएम उम्मीदवार घोषित होने तक, जानें उनके जीवन से जुड़ी पांच रोचक बातें... 1. भारत की प्रथम महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने सभी को सिविल सर्विसेज परीक्षा में बेहतर रैंक और सीनियर ऑफिसर के रूप में आईपीएस ज्वाइन करके हैरत में डाल दिया था। आज भी उनके बारे में जनरल नॉलेज की किताबों में बताया जाता है। देश की प्रथम महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी है। 2. कहा जाता है कि किरण बेदी ने अपने शुरुआती करियर में एक लेक्चरर की नौकरी की थी। उन्होंने पंजाब के अमृतसर के खालसा कॉलेज में राजनीतिक शास्त्र के लेक्चर हुआ करती थी। 3. किरण बेदी ऑल इंडिया के साथ-साथ ऑल एशिया टेनिस चैंपियनशिप का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं। बचपन से ही उनको टेनिस खेलना बहुत पसंद था। उन्होंने अपनी बहन के साथ भी कई चैंपियनशिप में भाग लिया। 4. किरण बेदी का दूसरा नाम क्रेन बेदी भी कहा जाता है। उनका एक किस्सा आज भी इंदिरा गांधी के साथ जुड़ा हुआ है। जब वह दिल्ली ट्रैफिक पुलिस प्रमुख थी। तो उन्होंने क्रेन से प्रधानमंत्री की गाड़ी को भी जप्त कर लिया था। 5. किरण बेदी के नाम कई पुरस्कार हैं। तो वही उन्होंने समाजसेवी अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के साथ इंडिया अगेंस्ट करप्शन से जुड़कर काम कर चुके हैं। उन्होंने जनलोकपाल आंदोलन में हिस्सा लेकर भूख हड़ताल भी की थी। तब उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। हमेशा से किरन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है। तो वहीं तिहाड़ जेल में बंद कैदियों के लिए भी सराहनीय काम किए जो आज भी याद किए जाते हैं।

आखिर क्या है हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन?

नई दिल्ली । इस वक्त पूरी दुनिया कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रही है। इस वक्त इस ख़तरनाक बीमारी के कहर की मार सबसे ज़्यादा अमेरिका पर दिख रही है। अमेरिका में अभी तक करीब 4 लाख लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, वहीं, लगभग 13 हज़ार लोगों की कोरोना वायरस की वजह से जान जा चुकी है। अमेरिका की टॉप मेडिकल रिसर्च टीम इसका इलाज और वैक्सीन को जल्द से जल्द तैयार करने में लगी है।इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कई दवाइयों को लेकर दावा किया है कि ये कोरोना वायरस के इलाज में कारगर साबित हो सकती हैं। मार्च में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने COVID-19 के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया था। ट्रम्प ने इस दवा के बारे में बात करते हुए कहा था, "मुझे यकीन है कि ये दवाई काम आएगी और हमें इसे आज़मा कर देखना चाहिए।"ट्रम्प के एक बयान के बाद एंटी-मलेरिया ड्रग हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन ख़बरों में छा गई है। दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बीते दिनों फोन पर कोरोना वायरस पर चर्चा की थी। इस दौरान उन्होंने कोरोना वायरस से लड़ने में मददगार माने जाने वाली दवाई हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की सप्लाई फिर शुरू करने को कहा, लेकिन अब दो दिन के बाद ट्रंप ने कहा है कि अगर भारत ये मदद नहीं करता तो फिर उसका करारा जवाब दिया जाएगा। हालांकि, इस ब्यान के कुछ घंटों बाद भारत ने कहा कि वह बाकी देशों के साथ ये एंटी-मलेरिया ड्रग शेयर करने के लिए तैयार है। 

 

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन का इस्तेमाल आमतौर पर मलेरिया के इलाज में किया जाता है

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन का इस्तेमाल आमतौर पर मलेरिया के इलाज में किया जाता है। साथ ही इसका प्रयोग आर्थराइटिस के उपचार में भी होता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस दवा का आविष्कार किया गया था। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी ल्यूपस सेंटर के अनुसार, मलेरिया रोधी दवा ने मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द, स्किन रैशेज़, इंफ्लेमेशन ऑफ हर्ट, लंग लाइनिंग, थकान और बुखार जैसे लक्षणों में सुधार दिखाया है। और अब ऐसा माना जा रहा है कि ये दवा कोरोना वायरस के इलाज में भी काफी कारगार साबित हो सकती है। हालांकि, अभी तक किसी भी तरह का क्लीनिकल ट्रायल या परीक्षण नहीं हुआ है, जिसमें ये पूरी तरह से साबित हो कि ये दवा जिसका इस्तेमाल रूमटॉइड गठिया में भी किया जाता है, वाकई कोरोना वायरस के इलाज में भी प्रभावी हो सकती है। एक छोटे से फ्रेंच शोध में कहा गया था हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन COVID-19 के इलाज में काम आ सकती है। जिसके बाद यूएस के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने इस दवा को कोरोना वायरस के खिलाफ एक गेम चेंजर कहा था। 

हिंदुस्तान की सरजमीं से कई शौर्य गाथाएं निकली हैं। मगर इस देश ने दुनिया के सामने प्रेम की कई मिसालें भी पेश की। एक वक्त था जब उन कहानियों से प्रेरणा लेकर लोग जीने मरने की कसमे खाते थे। भारत के इतिहास में ऐसी प्रेम कहानियों ने जन्म लिया जिसने समाज की परवाह किये बिना प्यार को चुना। दुश्मनी दोस्ती में बदल गयी और दोस्त दुश्मन बन गए। भारत के इतिहास में कई असाधारण प्रेम कहानियां मिलती हैं जो दुनियाभर के लिए आज भी मिसाल है। आज ऐसी ही कुछ मशहूर प्रेम कहानियों के बारे में जानते हैं।

शाहजहां-मुमताज

 ऐतिहासिक प्रेम कहानियों की इस फेहरिस्त को शाहजहां-मुमताज का नाम लिए बिना शुरू करना गलत होगा। इनकी अनोखी प्रेम कहानी की निशानी आज भी ताजमहल के रूप में मौजूद है। शाहजहां की यूं तो कई बेगमें थी लेकिन मुमताज के प्रति उनके प्रेम का जुनून ही था जिसने उन सगमरमर के पत्थरों को भी जीवंत कर दिया। आज भी ताजमहल की दरों-दीवारों पर उनकी कहानी गूंजती है।


पृथ्वीराज-संयुक्ता

शौर्य और पराक्रम के लिए तो पृथ्वीराज की कई कहानियां मशहूर हैं। मगर इस वीर ने प्रेम के मैदान में भी अपनी पताका लहराई। दरअसल पृथ्वीराज को अपने शत्रु कन्नौज के राजा जयचंद की बेटी संयुक्ता से प्रेम हो गया। जयचंद को जब इस बारे में पता चला तब वो काफी क्रोधित हुए और संयुक्ता के स्वंयवर का आयोजन किया। इस स्वयंवर में उन्होंने कई राजकुमारों को बुलाया लेकिन जयचंद ने पृथ्वीराज को निमंत्रण नहीं दिया और अपने दरबार के बाहर उसका एक पुतला बनवाकर दरबान के तौर पर खड़ा कर दिया। संयुक्ता से जब वरमाला डालने के लिए कहा तब वो उस सभा में मौजूद सभी राजकुमारों को छोड़ कर द्वार पर चली गयी और पृथ्वीराज के पुतले को माला पहना दी। उस पुतले के पीछे पृथ्वीराज पहले से मौजूद थे और सबके सामने वो संयुक्ता को अपने साथ भगा कर ले गए।

 साधारण परिस्थितियों में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन को इस बार विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपन्न करना पड़ा। आज जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है, इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता पहली बार संसार की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मंच जी-20 पर ही देखी गई। इस मंच पर सदस्य देशों ने जो संकल्प लिए हैं, उन्हें वे पूरा कर ले गए तो कोरोना के अभिशाप से निपटने में दुनिया को इससे काफी मदद मिलेगी। कोरोना वायरस के असर से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाली मार का मुकाबला करने के लिए जी-20 देशों ने पांच ट्रिलियन डॉलर खर्च करने का फैसला किया है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए सऊदी अरब के शाह सलमान ने जी-20 के नेताओं से अपील की कि वे वैश्विक महामारी से निपटने के लिए ‘कारगर एवं समन्वित कार्यवाही’ की ओर बढ़ें। उन्होंने जी-20 देशों से विकासशील देशों की मदद करने का भी आग्रह किया। इतने सारे राष्ट्राध्यक्षों के विडियो संवाद का यह पहला अवसर था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, जापान के पीएम शिंजो आबे और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व खाद्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर सच में दुनिया की हालत सुधारनी है तो हमें केवल आर्थिक पहलू पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय जनकल्याण पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें इस बहस में नहीं जाना चाहिए कि कोरोना वायरस का संक्रमण कहां से या कैसे शुरू हुआ। जी-20 के सदस्य देशों को मिलकर इस वैश्विक संक्रमण को दूर करने के उपायों पर बात करनी चाहिए। भारत इस महामारी के प्रभावों से निपटने के लिए कई नीतिगत उपाय कर रहा है। शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने मुख्य ब्याज दर रेपो रेट में 0.75 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट में 0.90 प्रतिशत की कटौती घोषित की, जो एक दिन में ब्याज दरों में अभी तक का सबसे बड़ा बदलाव है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इन कदमों से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए 3.74 लाख करोड़ रुपये के बराबर अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी। सभी वाणिज्यिक बैंकों और ऋणदाता संस्थानों को छूट दी गई है कि वे किसी भी कर्ज की किस्तें तीन महीने तक न जमा होने पर भी उसे बट्टे खाते में न डालें। उम्मीद करें कि तमाम देश अपने यहां ऐसे सभी उपाय करेंगे, जिनसे घर बैठने के बावजूद लोगों का जीवन चलता रहे, वे अपनी कर्ज अदायगी को लेकर परेशान न हों, और जैसे ही महामारी काबू में आनी शुरू हो, विश्व अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की शुरुआत भी हो जाए। 

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